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म्यांमार में सेना ने लोगों पर हवाई हमले कर बरसाए बम, बच्चों और महिलाओं समेत 100 की मौत

म्यांमार की सेना ने मंगलवार को नागरिकों के समूह पर बम बरसाए और कई राउंड तक फायरिंग की. हमले में बच्चों और महिलाओं समेत 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है. कई ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं जो विचलित कर देने वाली हैं.

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सेना के हमले के बाद की एक तस्वीर (ट्विटर)
सेना के हमले के बाद की एक तस्वीर (ट्विटर)

म्यांमार की सेना द्वारा मंगलवार को किए गए हवाई हमले में महिलाओं और कई बच्चों सहित 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई है. ये लोग सैन्य शासन के विरोधियों द्वारा आयोजित एक समारोह में भाग ले रहे थे. इस नरसंहार की कुछ तस्वीरें सामने आई हैं जो विचलित कर देने वाली हैं. इस कृत्य पर संयुक्त राष्ट्र की भी प्रतिक्रिया आई है और उसने इसे परेशान करने वाली घटना बताया है.

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बम गिराए और की हवाई फायरिंग

एक प्रत्यक्षदर्शी ने द एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि एक लड़ाकू विमान ने सागैंग प्रांत के कनबालु टाउनशिप में स्थित पजीगी गांव के बाहर एकत्र हुई भीड़ पर बम गिराए और फिर हेलीकॉप्टर से फायरिंग कर दी. यहां लोग विद्रोही गुट के स्थानीय कार्यालय के उद्घाटन के लिए एकत्र हुए थे. यह प्रांत देश के दूसरे सबसे बड़े शहर मांडले से लगभग 110 किलोमीटर (70 मील) उत्तर में स्थित है.

सैन्य सरकार ने स्वीकार की हमले की बात

शुरुआती रिपोर्टों में मरने वालों की संख्या लगभग 50 बताई गई थी, लेकिन बाद में स्वतंत्र मीडिया की रिपोर्ट आई कि मौत का आंकड़ा 100 से भी अधिक है. यहां इस घटना के विवरण की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना इसलिए असंभव था, क्योंकि रिपोर्टिंग पर वहां की सैन्य सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाया गया है. जो लोग मारे गए हैं उनमें महिलाएं और छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल हैं.

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सैन्य सरकार के प्रवक्ता, मेजर जनरल ज़ॉ मिन टुन ने सरकारी टेलीवीजन को फोन पर दिए गए एक बयान में स्वीकार किया कि विद्रोही गुट के ऑफिस के उद्घाटन के दौरान यह हमला किया गया था. उन्होंने सरकार विरोधी ताकतों पर आतंक का हिंसक अभियान चलाने का आरोप लगाया.

सेना ने किया था तख्तापलट

म्यांमार में 1 फरवरी 2021 को सेना ने तख्तापलट कर सत्ता हासिल की थी. इसके बाद देश में इमरजेंसी लगा दी गई. इस दौरान म्यांमार की नेता आंग सान सू की और नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी के अन्य नेताओं को हिरासत में ले लिया गया था. इसके बाद देशभर में लोकतंत्र बहाली की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ था. तब से सुरक्षा बलों के हाथों  3,000 से अधिक नागरिकों के मारे जाने का अनुमान है.

 

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