अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव का असर अब इन देशों के नागरिकों पर भी होने लगा है. अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए हुए जून के बाद 1000 से अधिक चीनी नागरिकों का वीजा रद्द कर दिया है. अमेरिका की ट्रंप सरकार का मानना है कि जिन चीनी छात्रों का वीजा रद्द किया गया है उनका संबंध चीनी सेना के साथ है.
अमेरिकी विदेश विभाग ने बुधवार को एक बयान में कहा कि "उच्च जोखिम वाले स्नातक छात्रों और अनुसंधान करने वाले रिसर्चर्स को" निष्कासित कर दिया गया था, क्योंकि वो "राष्ट्रपति की घोषणा के बाद अवैध पाए गए थे. इसलिए वे वीजा के लिए अयोग्य थे."
बता दें कि मई के अंत में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चीनी लोगों के वीजा पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया था और यह 1 जून से शुरू हुआ था. ट्रंप ने कहा था कि चीन अमेरिका के संवेदनशील जानकारियों और बौद्धिक संपदा पर कब्जे के लिए व्यापक अभियान में लगा हुआ है जिसमें इन लोगों की मदद से पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की क्षमता में विस्तार करना प्रमुख है.
विदेश विभाग ने कहा, "संयुक्त राज्य अमेरिका में चीनी स्नातक छात्र और शोधकर्ता संयुक्त राज्य अमेरिका की तकनीक, बौद्धिक संपदा और उन्नत सैन्य क्षमताओं से जुड़ी जानकारी को चोरी करने की कोशिश में लगे हुए थे. यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है.
होमलैंड सिक्योरिटी के कार्यवाहक सचिव चाड वुल्फ ने कहा, "चीन ने पश्चिमी उदार लोकतंत्र की अस्वीकृति का प्रदर्शन करते हुए अपनी अर्थव्यवस्था, अपनी सैन्य और अपनी राजनयिक शक्ति सहित देश के हर पहलू का लाभ उठाया है और दुनिया को रीमेक करने की अपनी प्रतिबद्धता के लिए काम कर रहा है.''
विदेश विभाग के अनुसार, हालिया निष्कासन से प्रभावित होने वाले लोग "संयुक्त राज्य में आने वाले चीनी छात्रों और विद्वानों की कुल संख्या का एक छोटा समूह है."
369,000 चीनी नागरिकों के अमेरिका में अध्ययन करने का अनुमान है, हालांकि कई छात्र कोरोना वायरस महामारी की वजह से पहले ही चीन वापस लौट आए थे. बीजिंग ने अभी हाल की घोषणा पर प्रतिक्रिया नहीं दी है.
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