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अमेरिका ने बिगाड़ा सऊदी अरब का खेल! भारत के लिए होगा फायदे का सौदा

सऊदी अरब ओपेक प्लस देशों के साथ मिलकर तेल उत्पादन में लगातार कटौती कर रहा है ताकि तेल की कीमतों को बढ़ाया जा सके. लेकिन अमेरिका ने अपना तेल उत्पादन बढ़ाकर उसका खेल बिगाड़ दिया है. बाजार में अमेरिकी तेल की अधिकता से सऊदी तेल की मांग घट रही है जो सऊदी किंगडम के लिए बड़ी समस्या है.

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अमेरिका के तेल उत्पादन को देखते हुए सऊदी ने तेल की कीमत कम कर दी है (Photo- Reuters/Bloomberg Via Getty Images)
अमेरिका के तेल उत्पादन को देखते हुए सऊदी ने तेल की कीमत कम कर दी है (Photo- Reuters/Bloomberg Via Getty Images)

तेल उत्पादक देशों ओपेक का अहम सदस्य सऊदी अरब अमेरिका के बढ़े तेल उत्पादन को लेकर परेशान हो गया है और अपने तेल की मांग बढ़ाने के लिए ऐसे उपाय करने को मजबूर है जो उसके लिए घाटे का सौदा है. अमेरिका पिछले कई महीनों से सऊदी अरब से तेल उत्पादन बढ़ाने की गुहार कर रहा था लेकिन सऊदी अरब ने उसकी बात नहीं मानी जिसके बाद खुद अमेरिका ने अपना तेल उत्पादन बढ़ा दिया है. इससे परेशान सऊदी अरब मजबूरन अपने तेल की मांग बढ़ाने के लिए एशिया में तेल की कीमतों में कटौती कर रहा है.

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ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी की सरकारी तेल कंपनी अरामको ने जनवरी में एशिया में बेचे जाने वाले अपने कच्चे तेल अरब लाइट क्रूड की कीमत 50 सेंट से घटाकर 3.50 डॉलर प्रति बैरल कर दी है. जून के बाद पहली बार अरामको ने अपनी तेल कीमत में इतनी कटौती की है.

यह फैसला बताता है कि दुनिया के शीर्ष तेल निर्यातक सऊदी के तेल की मांग गिर रही है. मांग गिरने की वजह अमेरिका जैसे अन्य उत्पादक देशों का बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ा देना है. हाल के हफ्तों में, खासकर, मीठे और लो सल्फर वाले कच्चे तेल की कीमतें गिर रही है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में इसका कारण अमेरिकी तेल निर्यात के बढ़ने को बताया गया है.

तेजी से कच्चा तेल उत्पादन बढ़ा रहा अमेरिका

तेल की कीमतों में गिरावट इसलिए देखी जा रही है क्योंकि अमेरिका कच्चे तेल का उत्पादन तेजी से बढ़ा रहा है. ऊर्जा सूचना प्रशासन (Energy Information Administration) के अनुसार, सितंबर में अमेरिका का तेल उत्पादन 1.32 करोड़ बैरल प्रतिदिन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया.

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अमेरिका के अलावा ब्राजील जैसे गैर-ओपेक प्लस देश भी कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ा रहे हैं क्योंकि सऊदी अरब और रूस ने हाल ही में अगले साल के लिए तेल उत्पादन में कटौती की घोषणा की है. ओपेक से बाहर के देशों की तरफ से तेल उत्पादन बढ़ने से तेल की कीमतें बढ़ गई हैं जिससे सऊदी कच्चे तेल को काफी प्रतिस्पर्धा झेलनी पड़ रही है.

बुधवार को वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 3% गिरकर 75 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया. ब्रेंट क्रूड सितंबर में अपने उच्चतम स्तर पर था जिसमें 20% की गिरावट आ गई है.

बढ़ने के बजाए घट रही कीमत लेकिन इस बात पर अड़ा सऊदी 

सऊदी अरब ने रूस जैसे ओपेक सहयोगियो के साथ मिलकर हाल ही में घोषणा की है कि वो 2024 की पहली तिमाही में तेल उत्पादन घटाकर 2.2 अरब बैरल तक कर देंगे. ओपेक देशों के इस कदम का उद्देश्य कीमतों में तेजी लाना था. लेकिन ओपेक देशों की इस मंशा पर फिलहाल के लिए पानी फिरता दिख रहा है क्योंकि गैर ओपेक देशों ने बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ा दी है जिससे मांग में कमी आ गई है.

सऊदी ने अपने तेल की मांग में कमी को देखते हुए तेल की कीमतें कम कर दीं लेकिन सऊदी अधिकारी उत्पादन में कटौती पर अड़े हुए हैं. सोमवार को सऊदी के ऊर्जा मंत्री ने ब्लूमबर्ग टीवी पर कहा कि उत्पादन में कटौती अगले साल की पहली तिमाही के बाद भी जारी रह सकती है.

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ऊर्जा विशेषज्ञ पॉल सैंकी का मानना है कि अमेरिका के तेल उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी को देखते हुए सऊदी अरब उसके खिलाफ बाजार में हिस्सेदारी का 'युद्ध' शुरू करेगा. उनका कहना है कि अगले साल सऊदी तेल उत्पादन बढ़ाएगा और तेल बाजार में अमेरिका की हिस्सेदारी को कम करने की कोशिश करेगा.

तेल बाजार में इस उथल-पुथल से भारत पर क्या होगा असर?

भारत एक तेल आधारित अर्थव्यवस्था है जहां महंगाई और तेल की कीमतों में सीधा संबंध देखने को मिलता है. भारत अपने इस्तेमाल का 80%  से अधिक कच्चे तेल का आयात करता है. रूस, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, इराक जैसे देशों से सबसे अधिक तेल का आयात किया जाता है.

अमेरिका के तेल उत्पादन बढ़ाने और सऊदी के तेल के दाम घटाने से भारत को फायदा ही होगा. सऊदी अरब ने एशियाई बाजारों के लिए अपनी तेल की कीमतें घटाई है जो भारत के लिए फायदेमंद साबित होगा. बुधवार को जैसे ही कच्चा तेल सस्ता हुआ, देश के कई शहरों में पेट्रोल डीजल की कीमतों में गिरावट देखी गईं.

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