प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने अमेरिका दौरे पर जाने वाले हैं, इससे ठीक एक महीने पहले अमेरिका ने धार्मिक अल्पसंख्यकों को लेकर भारत पर निशाना साधा है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने धार्मिक स्वतंत्रता पर सोमवार को एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें भारत में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की 20 से अधिक घटनाओं का जिक्र किया गया है. रिपोर्ट के संदर्भ में एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका चाहता है, भारत लगातार हो रही धार्मिक हिंसा की निंदा करे.
15 मई को जारी धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिका की वार्षिक रिपोर्ट में भारत में मुस्लिमों और ईसाइयों सहित धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमलों को सूचीबद्ध किया गया है.
समाचार एजेंसी एएफपी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर पत्रकारों से रिपोर्ट के संदर्भ में बात करते हुए कहा कि वो भारत में लगातार हो रही धार्मिक हिंसा से दुखी हैं.
अधिकारी ने कहा, 'इन चिंताओं के संबंध में, हम सरकार को हिंसा की निंदा करने और धार्मिक अल्पसंख्यकों के प्रति अमानवीय बयानबाजी करने वालों को जवाबदेह ठहराने के लिए प्रोत्साहित करते हैं.'
अधिकारी ने कहा कि वो इसे लेकर अपने भारतीय समकक्षों से बात करेंगे. उन्होंने आगे कहा, 'हम अपने सिविल सोसाइटी के सहयोगियों और पत्रकारों के साथ मिलकर जमीन पर काम करना जारी रखेंगे जो हर दिन इनमें से कुछ दुर्व्यवहारों का दस्तावेजीकरण करने के लिए काम कर रहे हैं.'
मीडिया और एडवोकेसी ग्रुप्स के रिसर्च पर आधारित अमेरिकी विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट में गुजरात में हिंदुओं पर हमला करने के आरोपी मुस्लिमों के घर तोड़ने और उनकी सार्वजनिक पिटाई करने के बारे में चिंता जताई गई है.
रिपोर्ट में योगी आदित्यनाथ की सरकार के तहत उत्तर प्रदेश में कुछ मुस्लिमों के घरों पर बुलडोजर की कार्रवाई का भी जिक्र है. साथ ही रिपोर्ट में 2002 के बिल्किस बानो गैंगरेप के 11 दोषियों को रिहा करने का भी जिक्र किया गया है.
रिपोर्ट पेश करते हुए ब्लिंकन ने नहीं लिया भारत का नाम
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट 2022 पेश करते हुए चीन, ईरान, म्यांमार और निकारागुआ को धार्मिक हिंसा पर चेतावनी दी लेकिन भारत का कहीं भी जिक्र नहीं किया.
उन्होंने कहा, 'हम धर्म में विश्वास करने या न करने के अधिकार की रक्षा करते हैं. सिर्फ इसलिए नहीं कि यह सही है बल्कि इसलिए भी कि उस धर्म को मानने वाले हमारे समाज और दुनिया की भलाई के लिए बेहतरीन काम कर सकते हैं.'
अमेरिका की USCIRF रिपोर्ट में भी भारत पर साधा गया था निशाना
इस महीने की शुरुआत में ही अमेरिका के धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने भारत को ब्लैकलिस्ट में जोड़ने की सिफारिश की थी. आयोग का कहना था कि धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए भारत में स्थिति बिगड़ती जा रही है. USCIRF ने अमेरिकी विदेश मंत्रालय से आह्वान किया था कि वो भारत को 'विशेष चिंता वाले देश' के रूप में नामित करे.
आयोग ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा था, 'भारत सरकार ने 2022 में केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर धार्मिक रूप से भेदभावपूर्ण नीतियों को बढ़ावा दिया और लागू किया है. इनमें धर्म परिवर्तन, अंतरधार्मिक संबंध, हिजाब पहनने और गोहत्या को निशाना बनाने वाले कानून शामिल हैं जो मुसलमान, सिख, ईसाई, दलित और आदिवासी समुदाय को गलत तरीके से प्रभावित करते हैं.'
आयोग यह सिफारिश पिछले चार सालों से करता आया है लेकिन अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने उसकी सिफारिशों पर ध्यान नहीं दिया है.
भारत अमेरिका के लिए अहम
इस साल के अंत में ब्लिंकन धार्मिक स्वतंत्रता पर विशेष चिंता वाले देशों की सूची जारी करेंगे और इस बार भी यह माना जा रहा है कि अमेरिका भारत को इस सूची में शामिल नहीं करेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन का मुकाबला करने के लिए भारत अमेरिका के लिए बेहद अहम है.
अमेरिका चीन की आक्रामकता का मुकाबला करने के लिए भारत के साथ अपने संबंधों को लगातार मजबूत कर रहा है.
धार्मिक स्वतंत्रता की रिपोर्ट्स पर भारत का पलटवार
अमेरिका की तरफ से धार्मिक स्वंतत्रता की इन रिपोर्ट्स पर भारत तीखा पलटवार करता रहा है. USCIRF की रिपोर्ट को भी भारत ने खारिज कर दिया था. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा था कि रिपोर्ट में तथ्यों को लेकर गलतबयानी की गई है.
उन्होंने USCIRF पर भारत को लेकर पक्षपातपूर्ण टिप्पणी करने का आरोप लगाया था. उन्होंने USCIRF से इस तरह की कोशिशों से दूर रहने और भारत, इसकी बहुलता, लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक तंत्र की बेहतर समझ विकसित करने की अपील की थी.