चीन से निकले कोरोना वायरस ने दुनियाभर को परेशान किया हुआ है. इसके अलावा कई अन्य मोर्चों पर चीन मुश्किलें पैदा कर रहा है. इसी को जवाब देते हुए भारत ने बीते दिन सौ से अधिक चीनी मोबाइल ऐप्स पर बैन लगा दिया, जो डाटा सुरक्षा के लिए खतरा थीं. भारत के इस कदम का अब अमेरिका ने भी स्वागत किया है और बिल्कुल सही बताया है.
अमेरिकी सरकार में इकॉनोमिक ग्रोथ डिपार्टमेंट के अंडर सेक्रेटरी कीथ राच ने बयान जारी करते हुए कहा कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी 5G तकनीक के जरिए दुनिया को नुकसान पहुंचाने में जुटी है. भारत ने पहले ही सौ से अधिक चीनी ऐप को बंद कर दिया है. ऐसे में हम भारत जैसे कई देशों से अपील करते हैं कि वो सही नेटवर्क बनाने के मिशन में वो हमारे साथ जुड़ें.
.@State_E Keith Krach: The CCP is trying to leverage 5G-enabled technology to create and export George Orwell’s version of “1984” into the 21st century. India has already banned 100+ Chinese apps. We call on all freedom-loving nations and companies to join The Clean Network. pic.twitter.com/Ow2z0OErLA
— Department of State (@StateDept) September 2, 2020
दरअसल, अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने बुधवार को अमेरिका की बड़ी यूनिवर्सिटी और अन्य कुछ कंपनियों के साथ संवाद किया. इसमें तकनीकी लेवल पर आने वाली चुनौतियों को लेकर बात की. इसी दौरान माइक पोम्पियो ने कहा कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी अमेरिका की फ्रीडम ऑफ स्पीच को खत्म करना चाहती है. CCP अलग-अलग तरीके से इनमें इन्वेस्ट कर रही है, ताकि अपने पैर जमा सकें. यही कारण है कि हमें इस मुद्दे का हल निकालना होगा.
.@SecPompeo discusses how the State Department is alerting American universities of the threats the Chinese Communist Party poses to academic freedom, human rights, and university endowments. pic.twitter.com/N2302ePg0y
— Department of State (@StateDept) September 2, 2020
आपको बता दें कि इससे पहले भी अमेरिका की ओर से भारत के उस फैसले का समर्थन किया गया था, जब भारत ने टिकटॉक समेत 59 ऐप को बैन किया था. अब भारत ने पबजी समेत 118 नए ऐप को बंद किया है. अमेरिका बॉर्डर के मसले पर भी चीन को लताड़ चुका है और बार-बार भारत को उकसाने का आरोप लगाता आया है.
अमेरिका की ओर से पहले ही चीन की 5G कंपनियों पर काम से रोक लगा दी गई है, जिसके बाद भारत ने भी इन मसलों पर कड़ा रुख अपनाया था. यही कारण है कि भारत-अमेरिका की दोस्ती को लेकर चीन चिढ़ा हुआ है.