अमेरिका और भारत के बीच संबंधों में लगातार बेहतरी देखने को मिली है. कुछ समय पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अमेरिका में गर्मजोशी से स्वागत किया गया था. इस दौरान पीएम मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन और वाइस प्रेसीडेंट कमला हैरिस से मुलाकात की थी. रूस से एस-400 मिसाइल के रक्षा सौदा करने के बावजूद अमेरिका में भारत का दबदबा ऐसा है कि कई अमेरिकी सांसदों ने भारत पर प्रतिबंध ना लगाने की वकालत की है और अब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने एक खास वर्चुएल कॉन्फ्रेंस के लिए 110 देशों की लिस्ट में भारत को भी शामिल किया है.
जो बाइडेन ने इन सभी देशों को लोकतंत्र के विषय पर एक वर्चुएल सम्मेलन के लिए इंवाइट किया है. उन्होंने इस सम्मेलन के लिए कई पश्चिमी देशों के अलावा इराक, भारत और पाकिस्तान जैसे देशों को भी न्योता भेजा है. हालांकि, इस लिस्ट में चीन का नाम नहीं है लेकिन ताइवान का नाम है. माना जा रहा है कि ताइवान को न्योता भेजे जाने के कदम से चीन नाराज हो सकता है.
इसके अलावा, इस लिस्ट में बांग्लादेश, रूस, तुर्की और श्रीलंका का नाम भी शामिल नहीं है.
अपने कुछ पारंपरिक दोस्त देशों को भी नहीं भेजा अमेरिका ने न्योता
अमेरिका की स्टेट डिपार्टमेंट वेबसाइट पर इस लिस्ट को पोस्ट किया गया है. ये सम्मेलन 9 और 10 दिसंबर को शेड्यूल किया गया है. इस ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस में कुछ चौंकाने वाले फैसले भी लिए गए हैं मसलन अमेरिका ने अपने पारंपरिक दोस्त देशों- मिस्त्र, सऊदी अरब, जॉर्डन, कतर और यूएई को इस सम्मेलन के लिए आमंत्रण नहीं भेजा है. मिडिल ईस्ट के देशों की बात की जाए तो इस लिस्ट में केवल इजरायल और इराक का नाम ही शामिल है.
इसके अलावा, बाइडेन ने ब्राजील को भी न्योता भेजा है. हालांकि, इस देश के राष्ट्रपति दक्षिणपंथी जेर बोल्सोनारो अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक रहे हैं. बोल्सोनारो को एमेजॉन के विशालकाय जंगलों को कटवाकर मानवीय गतिविधियां कराने के चलते भी जबरदस्त आलोचना का सामना करना पड़ता रहा है. यूरोप में भी पोलैंड को अमेरिका ने न्योता भेजा है. हालांकि, पिछले कुछ समय से इस देश में ह्यूमन राइट्स रिकॉर्ड्स को लेकर लगातार चिंता जाहिर की जा रही है.
वहीं, अगर अफ्रीका की बात की जाए तो डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कॉन्गो, साउथ अफ्रीका, नाइजीरिया और नाइजर जैसे देशों को न्योता भेजा गया है. गौरतलब है कि अगस्त में शिखर सम्मेलन की घोषणा करते हुए व्हाइट हाउस ने कहा था कि इस सम्मेलन में तीन प्रमुख विषयों और पहलों पर बात की जाएगी जिनमें अधिनायकवाद के खिलाफ आवाज उठाना, भ्रष्टाचार से लड़ना और मानवाधिकारों के सम्मान को बढ़ावा देना शामिल है.