कनाडा में हिंदू मंदिरों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है. ओंटेरियो प्रांत में स्थित BAPS श्री स्वामीनारायण मंदिर में मंगलवार रात को तोड़फोड़ की गई और दीवारों पर भारत विरोधी नारे लिखे गए. इस संबंध में मंदिर के प्रतिनिधियों द्वारा पुलिस को सूचना दी गई और आरोपियों के खिलाफ एक्शन लेने की मांग की गई है. मंदिर की दीवारों पर भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लिखे गए हैं और खालिस्तान के समर्थन में नारे लिखे हैं.
पुलिस को दी सूचना
बीएपीएस संगठन ने विंडसर में श्री स्वामीनारायण मंदिर को निशाना बनाने पर हैरानी व्यक्त की है. संगठन के एक प्रवक्ता ने कहा कि, 'हमारे मंदिर की दीवारों पर भारतीय विरोधी नारों को देखकर हैरानी हुई. तत्काल कार्रवाई के लिए घटना की सूचना स्थानीय पुलिस को दे दी गई है.' पुलिस ने शिकायत पर एक्शन लेने के बाद आरोपियों का सीसीटीवी फुटेज जारी किया है. फुटेज में दिख रहा है कि रात में दो लोग नकाब पहनकर आते हैं और फिर दीवार पर स्प्रे कर भारत विरोधी नारे लिखते हैं.
मंदिर लगातार बन रहे हैं निशाना
जुलाई 2022 के बाद यह पांचवीं ऐसी घटना है जहां मंदिरों को निशाना बनाया गया और दीवारों पर आपत्तिजनक नारे लिखे गए. 14 फरवरी को जीटीए स्थित मिसिसॉगा कस्बे में श्री राम मंदिर को निशाना बनाया गया था. यहां स्प्रे पेंट किए गए नारों में भारत विरोधी नारे लिखे गए थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया था. इसके अलावा अलगाववादी खालिस्तान आंदोलन के संस्थापक जरनैल सिंह भिंडरावाले को 'शहीद' के रूप में वर्णित किया गया था.
इससे पहले 30 जनवरी को ब्रैम्पटन में गौरी शंकर मंदिर को भी इसी तरह से अपवित्र किया गया था. वहीं रिचमंड हिल के विष्णु मंदिर में स्थित महात्मा गांधी की एक प्रतिमा को पिछले साल जुलाई में खंडित किया गया था. इसके एक सप्ताह बाद, सितंबर में 2022 में टोरंटो में BAPS श्री स्वामीनारायण मंदिर के सामने के प्रवेश द्वार पर भी इस तरह की तोड़फोड़ की गई थी.
लगातार बढ़ रहे हैं मामले
भारतीयों के खिलाफ घृणा और भारत विरोधी गतिविधियों से जुड़े मामलों में तेज बढ़ोतरी हुई है. भारत सरकार ने इन घटनाओं की उचित जांच का आग्रह किया था. कनाडा सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2019 और 2021 के बीच कनाडा में धर्म, सेक्सुअल ओरिएंटेशन और नस्ल से जुड़े हेट क्राइम के 72 फीसदी मामले बढ़े हैं. इससे अल्पसंख्यक समुदायों विशेष रूप से भारतीय समुदाय में खौफ बढ़ा है.