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Pakistan की नई सरकार में कौन-कौन होगा हिस्सेदार, जानिए 10 बड़े चेहरों के बारे में

Pakistan News: पाकिस्तान में गठबंधन की सरकार चला रहे इमरान खान को आउट करने के पीछे शाहबाज शरीफ के अलावा दूसरे और भी राजनीतिक खिलाड़ियों का हाथ है. अब नई सरकार में इन सभी को अहम जिम्मेदारियों से नवाजा जाने की पूरी संभावना है. आखिर कौन-कौन निभाएगा नई सरकार में हिस्सेदारी...

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पाकिस्तान में संयुक्त विपक्ष ने इमरान को हराया. (फाइल)
पाकिस्तान में संयुक्त विपक्ष ने इमरान को हराया. (फाइल)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • इमरान खान ने नेशनल असेंबली में विश्वास मत खोया
  • शाहबाज शरीफ होंगे पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव पर शनिवार-रविवार की रात हुई वोटिंग में इमरान खान को हार का सामना करना पड़ा.  342 सदस्यीय सदन में विपक्ष को 174 सदस्यों का समर्थन मिला, जो प्रधानमंत्री को हटाने के लिए जरूरी नंबर 172 से ज्यादा रहा. अब संयुक्त विपक्ष के नेता शाहबाज शरीफ पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री बनेंगे और इमरान सरकार को गिराने में अहम भूमिका निभाने वाले दलों के नेताओं को भी सत्ता में हिस्सेदारी मिलेगी. जानिए, Pakistan की नई सरकार के चेहरों को...

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शहबाज शरीफ

पाकिस्तान के तीन बार प्रधानमंत्री रहे नवाज शरीफ के भाई शाहबाज खान मुल्क के वजीर-ए-आजम यानी प्रधानमंत्री बनेंगे. 70 साल के शाहबाज 13 अगस्त 2018 से नेशनल असेंबली के सदस्य हैं और विपक्ष के नेता भी हैं. इससे पहले पाकिस्तान मुस्लिम लीग-एन (पीएमएल-एन) का यह नेता तीन बार पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री रह चुका है.  

आसिफ अली जरदारी

एक अमीर सिंध परिवार से ताल्लुक रखने वाले आसिफ अली जरदारी नेशनल असेंबली में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता हैं.  पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता जरदारी 2008 से 2013 तक पाकिस्तान के 11वें राष्ट्रपति रह चुके हैं. वह अगस्त 2018 से पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के सदस्य हैं. बता दें कि 2007 में पत्नी बेनजीर भुट्टो की हत्या के बाद जरदारी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के सह-अध्यक्ष बने और एक साल बाद पीएमएल-एन की मदद से देश के राष्ट्रपति बने थे.   

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बिलावल भुट्टो जरदारी

बेनजीर भुट्टो और आसिफ जरदारी के बेटे बिलावल भुट्टो अपनी मां की हत्या के बाद महज 19 साल की उम्र में ही पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बन गए थे.  ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़े 33 साल के बिलावल को अपनी मां तरह प्रगतिशील छवि का माना जाता है, और वह अक्सर महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर बात करते नजर आते हें. हालांकि उर्दू भाषा पर पकड़ ढीली होने के कारण उनका अक्सर मजाक उड़ाया जाता है. 

मौलाना फजलुर रहमान

एक तेजतर्रार इस्लामवादी कट्टरपंथी के रूप में राजनीतिक पारी का आगाज करने वाले मौलाना फजलुर रहमान पाकिस्तान की सबसे बड़ी धार्मिक पार्टी जमिअत उलेमा-ए-इस्लाम (जेयूआई-एफ) के चीफ हैं. उनके पिता खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के मुख्यमंत्री रह चुके हैं.  मौलाना पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में नेता विपक्ष भी रह चुके हैं. उनकी जमीयतुल उलेमा-ए-इस्लाम (एफ) पार्टी को कभी भी अपने दम पर सत्ता हासिल करने का सौभाग्य नहीं मिला, लेकिन आमतौर पर किसी भी सरकार में यह पार्टी एक प्रमुख भूमिका निभाती है. मौलाना का इमरान खान के साथ छत्तीस का आंकड़ा रहता है. इमरान खान की शादी जेमिमा गोल्डस्मिथ से होने की वजह से मौलाना उन्हें यहूदी कहते हैं. वहीं, ईंधन लाइसेंस से जुड़े भ्रष्टाचार में कथित भागीदारी के चलते इमरान खान उन्हें "मुल्ला डीजल" कहते हैं. 

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खालिद मकबूल सिद्दीकी

इमरान खान सरकार में  20 अगस्त 2018 से 06 अप्रैल 2020 तक सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार मंत्री रहे खालिद मकबूल सिद्दीकी अब नई सरकार में अहम जिम्मेदारी निभा सकते हैं. उन्होंने चंद दिनों पहले ही इमरान सरकर से समर्थन वापस लेकर विपक्ष को मजबूत बना दिया था. मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट पाकिस्तान (MQM-Pakistan) के नेता अगस्त 2018 से पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के सदस्य  हैं. 

नवाबज़ादा शाहज़ैन बुगती 

नवाबज़ादा शाहज़ैन बुगती अगस्त 2018 से पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के सदस्य हैं.  उन्होंने 7 जुलाई 2021 से 27 मार्च 2022 तक बलूचिस्तान में सुलह और सद्भाव पर प्रधानमंत्री इमरान खान के विशेष सहायक के रूप में कार्य किया है. बुगती  2018 के पाकिस्तानी आम चुनाव में जम्हूरी वतन पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के लिए चुने गए थे. अविश्वास मत के दौरान उन्होंने विपक्ष का साथ दिया.

 तारिक बशीर चीमा

चौधरी तारिक बशीर चीमा 5 सीटों वाली पीएमएल-क्यू पार्टी के महासचिव हैं. वह जून 2013 से पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के सदस्य हैं. चीमा ने 1980 में गवर्नमेंट हाई स्कूल सजवल वाला में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के छात्र विंग के लिए एक कार्यकर्ता के रूप में अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया था. इस अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग के दौरान चीमा ने इमरान सरकार के खिलाफ वोट दिया था. 

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मोहसिन जावेद डावर

इमरान सरकार के खिलाफ वोट करने में मोहसिन जावेद डावर भी शामिल हैं. पश्तून राष्ट्रवादी नेता डावर राष्ट्रीय जनतांत्रिक आंदोलन (NDM) के अध्यक्ष हैं.  वह अगस्त 2018 से नेशनल असेंबली के सदस्य हैं और पश्तून तहफुज मूवमेंट (पीटीएम) के नेता हैं. उन्होंने पहले राष्ट्रीय युवा संगठन (एनवाईओ) और पश्तून स्टूडेंट्स फेडरेशन (पीएसएफ), अवामी नेशनल पार्टी (एएनपी) के यूथ विंग के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया है. 

मुहम्मद अली वजीर

एक और पश्तून नेता मुहम्मद अली वजीर भी संयुक्त विपक्ष में शामिल हैं. वजीर अगस्त 2018 से पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के सदस्य हैं. खास बात यह है कि इमरान खान साल 2018 के चुनाव में वजीर को अपनी पार्टी पीटीआई का टिकट देने की पेशकश की थी, जिसे पश्तून नेता ने ठुकरा दिया था. इसके बाद पीटीआई ने अपना कोई उम्मीदवार उनके खिलाफ नहीं उतारा और वजीर ने निर्दलीय जीत हासिल की थी.

खालिद हुसैन मैगसी

बलूचिस्तान आवामी पार्टी के नेता खालिद हुसैन मैगसी 2018 से पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के सदस्य हैं. 62 साल के मगसी इससे पहले  जून 2013 से सितंबर 2014 तक और फिर मई 2016 से मई 2018 तक नेशनल असेंबली के सदस्य रह चुके हैं. इमरान सरकार को गिराने में उनका भी वोट है. 

अख्तर मेंगल

1997 और 1998 के बीच बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री रह चुके अख्तर मेंगल बलूचिस्तान नेशनल पार्टी (मेंगल) के अध्यक्ष हैं. 59 साल के मेंगल वर्तमान में अगस्त 2018 से पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के सदस्य हैं. उन्होंने इस अविश्वास प्रस्ताव में इमरान का समर्थन न करते हुए संयुक्त विपक्ष का हिस्सा बनना उचित समझा. 

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