पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सह-अध्यक्ष आसिफ अली जरदारी शनिवार को पाकिस्तान के 14वें राष्ट्रपति चुने गए. ऐसा दूसरी बार है जब आसिफ अली राष्ट्रपति बने हैं. 68 वर्षीय जरदारी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के संयुक्त उम्मीदवार थे, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी 75 वर्षीय महमूद खान अचकजई सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल (एसआईसी) के उम्मीदवार थे.
136 वोटों से हराया
संविधान के प्रावधानों के अनुसार, नए राष्ट्रपति का चुनाव नेशनल असेंबली और चार प्रांतीय विधानसभाओं के नवनिर्वाचित सदस्यों के निर्वाचक मंडल द्वारा किया गया. व्यवसायी से राजनेता बने जरदारी पाकिस्तान की दिवंगत प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के पति हैं. पाकिस्तानी मीडिया ने बताया कि उन्हें 255 वोट मिले जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी को 119 वोट मिले. इस तरह वह 136 मतों से विजयी रहे.
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जरदारी निवर्तमान डॉ. आरिफ अल्वी का स्थान लेंगे, जिनका पांच साल का कार्यकाल पिछले साल समाप्त हो गया था. हालाँकि, वह पद पर बने हुए थे क्योंकि नए निर्वाचक मंडल का गठन अभी तक नहीं हुआ था.
दूसरी बार बनेंगे राष्ट्रपति
2008 से 2013 तक राष्ट्रपति रहे जरदारी दूसरी बार राष्ट्रपति चुने जाने वाले पहले नेता हैं. वहीं राष्ट्रपति पद के दूसरे उम्मीदवार रहे अचकजई उनकी पश्तूनख्वा मिल्ली अवामी पार्टी (पीकेएमएपी) के प्रमुख हैं और सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल (एसआईसी) के बैनर तले से चुनाव लड़ रहे थे, जो जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ द्वारा समर्थित स्वतंत्र उम्मीदवारों के बाद बना था.
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12 साल तक जेल में रहे आसिफ अली जरदारी
जरदारी पर भ्रष्टाचार से लेकर अपहरण और बैंक फ्रॉड जैसे कई आरोप लगे. वह साल 1990 में पहली बार जेल गए थे. इसके बाद वह 1996 में दोबारा जेल गए. उन्होंने तकरीबन 12 साल जेल में बिताए थे. उन्हें भ्रष्टाचार और हत्या के आरोप में 1997 से 2004 तक जेल में रखा गया था.
नवंबर 2004 में जमानत मिली लेकिन हत्या के मुकदमे की सुनवाई में शामिल नहीं होने के बाद उन्हें फिर से गिरफ्तार किया गया. जरदारी को एक स्विस कंपनी से जुड़े मामले में रिश्वत लेने का दोषी भी ठहराया गया. बता दें कि जरदारी पर पाकिस्तान में ही नहीं बल्कि ब्रिटेन और स्पेन सहित कई मुल्कों में भी मुकदमे चले थे.