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Bacha Posh: जब लड़कों जैसे कपड़े पहन लड़कियां घरों से निकलती हैं

Bacha Posh tradition in Afghanistan: इस्लामिक पुरुष प्रधान देश अफगानिस्‍तान में इस प्रथा के अनुसार लड़कियां और महिलाएं पुरुष की तरह कुछ हद तक जी सकती हैं. इस प्रथा के अनुसार- परिवार वाले अपने किसी बेटी को चुनते हैं. जिसकी परवरिश लड़कों की तरह की जाती है. 

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Bacha Posh सनम अपने पैरेंट्स के साथ. (Photo: Associated Press)
Bacha Posh सनम अपने पैरेंट्स के साथ. (Photo: Associated Press)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अफगानिस्‍तान में निभाई जाती है ये परंपरा
  • अल्‍बानिया और पाकिस्‍तान में भी ऐसी प्रथा

Bacha Posh tradition: अफगानिस्‍तान  में अब तालिबान का शासन है. तालिबान के शासन आने के बाद से सबसे ज्‍यादा खराब हालात का सामना यहां की महिलाओं को करना पड़ रहा है. महिलाओं और लड़कियों को तरह-तरह की पाबंदियों से जूझना पड़ रहा है. लेकिन अफगानिस्तान में एक ऐसी प्रथा भी है जिसके तहत लड़कियों को लड़के की तरह जीने की 'आजादी' मिलती है. इस प्रथा का नाम है बच्चा पोश (Bacha Posh) है.

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इस्लामिक पुरुष प्रधान देश अफगानिस्‍तान में इस प्रथा के अनुसार लड़कियां और महिलाएं पुरुष की तरह कुछ हद तक जी सकती हैं. इस प्रथा के अनुसार- परिवार वाले अपने किसी बेटी को चुनते हैं. जिसकी परवरिश लड़कों की तरह की जाती है. कपड़े भी लड़कों की तरह होते हैं. हालांकि इसे लेकन कई नियम कानून भी हैं. वहीं पाकिस्‍तान के पश्‍तून भी लड़कियों को इस प्रथा के मुताबिक पालन पोषण करते हैं.

एक ऐसी ही लड़की है सनम (Sanam), सनम 8 साल की है, जो अफगानिस्‍तान की राजधानी काबुल में अपने परिजनों के साथ रहती है. यह अब Bacha Posh है.  कुछ दिन पहले तक उसके लंबे बाल थे. लेकिन अब उसका नाम बदलकर ओमिद (Omid) रख दिया गया है. अब वह लड़कों की तरह व्‍यवहार करती है. लिबास भी अब लड़कों की तरह हो गया है. वह लड़कों के साथ फुटबॉल (Football) और क्रिकेट (Cricket) खेलती है. वहीं कुश्‍ती भी कर सकती हैं. इसके इतर वह परिवार के काम भी हाथ बंटा सकती है. इस प्रथा के बाद लड़कियां स्‍कूल और मदरसा भी जा सकती हैं.

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लेकिन Bacha Posh प्रथा में कुछ सीमाएं भी 
Bacha Posh प्रथा में जहां लड़कियां लड़कों की तरह व्‍यववहार करती हैं. वहीं इस प्रथा में कुछ सीमाएं भी हैं. जैसे जब लड़की किशोरावस्‍था से युवावस्‍था में पहुंचती है तब उन्‍हें फिर से पारंपरिक लड़की के रोल में वापस आना होता है. 

तालिबान का रुख साफ नहीं 
हालांकि, अब अफगानिस्‍तान में तालिबान का शासन है, ऐसे में अभी तक ये साफ नहीं है कि वह इस प्रथा को लेकर नई सरकार क्‍या रुख अपनाती है. तालिबान का इस प्रथा को लेकर बयान नहीं आया है. क्‍योंकि तालिबान के शासन में महिलाओं को लेकर लगातार सवाल उठ रहा है. कई महिलाओं को काम करने से रोक दिया गया है. वहीं पांचवी तक के स्‍कूल में भी लड़कियां नहीं जा पा रही हैं. ऐसे में जिस तरह से महिलाओं के अधिकारों का हनन हुआ है, ये प्रथा कई परिवारों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है. 

कैसे हुई Bacha posh की शुरुआत 
बोस्‍टन यूनिवर्सिटी में  एंथ्रोपोलॉजी (Anthropology) के प्रोफेसर थॉमस बारफील्‍ड (Thomas Barfield) ने अफगानिस्‍तान पर कई किताबें लिखी हैं. उन्‍होंने कहा कि चूंकि ये परिवार के अंदर का मामला है, ऐसे में तालिबान ने इस मामले से अपनी दूरी बना ली है. अफगानिस्‍तान में बच्चा पोश प्रथा (Bacha Posh tradition) पर ज्‍यादा जांच पड़ताल नहीं हुई है. Bacha Posh प्रथा की शुरुआत कहां से हुई, इसे लेकर तमाम सवाल हैं. इस तरह की प्र‍था अल्‍बानिया (Albania) में भी है. जहां महिला शपथ लेती है कि वह कुंवारी रहेगी, इसके बाद वह खुद को पुरुष घोषित कर देती है. इसके बाद वह विरासत में मिली संपत्ति की भी हकदार होती है. अल्‍बानिया में तो महिला गांव की पंचायत में भी बैठती है. 

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