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बलोच लड़ाकों ने चीन को दी धमकी, जानिए CPEC प्रोजेक्ट और चीन के साम्राज्यवाद का ग्राउंड पर कैसे हो रहा विरोध

मिलिटेंट्स ग्रुप का आरोप है कि पाकिस्तान और चीन लंबे समय से बलूचिस्तानी लोगों के अधिकारों का दोहन कर रहे हैं. वे उनकी संपत्तियों पर कब्जा कर रहे हैं और लोगों को मार रहे हैं. चीन पर आरोप है कि उन्होंने यहां के संसाधनों पर कब्जा जमा लिया है और उनकी जगहों पर महात्वाकांक्षी योजनाएं बिना उनकी इजाजत के खोल रहे हैं.

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बीएलए ने पाकिस्तान और चीन को दी धमकी. (फाइल फोटो)
बीएलए ने पाकिस्तान और चीन को दी धमकी. (फाइल फोटो)

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में इस वक्त अंदरूनी तनाव चरम पर है. बलूचिस्तान में स्थानीय मिलिटेंट्स ने पाकिस्तान और चीन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. हाल ही में मिलिटेंट्स के हमले में करीब 100 लोगों की मौत हुई थी. इसी बीच बलोच लिबरेशन आर्मी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें हाथ में बंदूक लिए लड़ाके चीन और पाकिस्तान को अल्टीमेटम देते दिख रहे हैं. उन्होंने बलूचिस्तान खाली करने के लिए चीन और पाकिस्तान को 48 घंटे का वक्त दिया है.

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48 घंटे में बलूचिस्तान खाली करो वरना....

बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें उन्होंने कहा, 'हमारे हमले का मकसद एकदम साफ है कि पाकिस्तान और चीन तत्काल प्रभाव से बलूचिस्तान खाली कर दें. ये अल्टीमेटम हमारे नेता असलम बलूच ने भी दिया था. लेकिन चीन ने इसे अनसुना कर दिया. हम एकबार फिर से चेतावनी दे रहे हैं कि बलोच की जगहों को तुरंत खाली कर दें. ये हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी जगह की रक्षा करें. चीन आप यहां बिना हमारे परमिशन के आए हैं. पाकिस्तान सेना हमारे गांवों को नष्ट कर रही है. मजीद ब्रिगेड खासतौर पर चीनी अधिकारियों पर हमले के लिए बनाई गई है. शी जिनपिंग हम आपको चेतावनी दे रहे हैं कि तुरंत बलूचिस्तान छोड़ दें. वरना हम आपको ऐसा सबक सिखाएंगे जो आप कभी नहीं भूल पाएंगे. '

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क्यों चीन को निशाना बना रहे BLA के लड़ाके

मिलिटेंट्स ग्रुप का आरोप है कि पाकिस्तान और चीन लंबे समय से बलूचिस्तानी लोगों के अधिकारों का दोहन कर रहे हैं. वे उनकी संपत्तियों पर कब्जा कर रहे हैं और लोगों को मार रहे हैं. चीन पर आरोप है कि उन्होंने यहां के संसाधनों पर कब्जा जमा लिया है और उनकी जगहों पर महात्वाकांक्षी योजनाएं बिना उनकी इजाजत के खोल रहे हैं. बता दें कि चीन का महात्वाकांक्षी CPEC प्रोजेक्ट इन्हीं इलाकों से होकर गुजरता है.

क्या है CPEC प्रोजेक्ट

बता दें कि ग्वादर बंदरगाह चीन और पाकिस्तान के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट सीपीईसी (चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर) का सबसे अहम हिस्सा है. लेकिन बलूचिस्तान के लोग इसे अपने संसाधनों पर कब्जे के रूप में देखते हैं. यही वजह है कि लंबे समय इस इलाके में निर्माण कार्यों के शोर के बजाय खौफ और दहशत का सन्नाटा पसरा हुआ है. 

साल 2015 में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) की घोषणा हुई थी. यानी करीब 2442 किमी लंबी सड़क जो चीन के शिंजियांग शहर को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से जोड़ेगी. सीपीईसी के तहत चीन ग्वादर बंदरगाह को विकसित कर रहा है और पानी की तरह पैसा बहा रहा है. इस पोर्ट पर चीन 46 बिलियन डॉलर खर्च कर चुका है. दरअसल चीन खाड़ी देशों से आने वाले तेल और गैस को बंदरगाह, रेलवे और सड़क के जरिए कम समय और कम खर्च में अपने देश तक पहुंचाना चाहता है.

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बलूचों का क्या है आरोप

बलूचों का आरोप है कि सीपीईसी और ग्वादर में चल रहे दूसरे प्रोजेक्ट्स का उद्देश्य चीन के हितों को साधना है. इसमें स्थानीय लोगों को नजरअंदाज किया जा रहा है. चीन की तरफ से किए जा रहे निर्माण कार्यों ने स्थानीय लोगों के जीवन में कोई सुधार तो नहीं किया बल्कि कई लोगों की आजीविका भी उजाड़ दी. ग्वादर की एक बड़ी आबादी जीविका के लिए मछली पालन पर निर्भर है. लेकिन पाकिस्तान ने चीनी नावों को यहां मछली पकड़ने का लाइसेंस दे दिया है. 

यह भी पढ़ें: 33 यात्रियों को गोलियों से भूना, 10 गाड़ियां फूंकीं, पाकिस्तान के बलूचिस्तान में बड़ा अटैक

एक रिपोर्ट के अनुसार, ग्वादर पोर्ट शहर में करीब 1 लाख लोगों के पास पीने का पानी तक नहीं है. बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और बिजली जैसी मूलभूत जरूरतों के लिए पाकिस्तान सरकार के खिलाफ बलूचों का प्रदर्शन किसी से छिपा नहीं है. बलूचिस्तान के लोगों को डर सता रहा है कि सीपीईसी के पूरा होने के बाद चीन और पाकिस्तान के अन्य हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग यहां आएंगे और आखिर में एक बड़े डेमोग्राफिक बदलाव के बाद वे अपने ही घर में अल्पसंख्यक बनकर रह जाएंगे.

बता दें कि भारत भी चीन के सीपीईसी प्रोजेक्ट का विरोध करता रहा है क्योंकि यह प्रोजेक्ट पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से होकर गुजरता है.

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ताजा हमले में करीब 100 लोगों की मौत

बलूचिस्तान में सोमवार को बलोच विद्रोहियों ने बड़े हमले को अंजाम दिया. इस हमले में 24 घंटे के अंदर पुलिस स्टेशन, रेलवे लाइन और नेशनल हाईवे को निशाना बनाया गया, जिसमें सैनिकों करीब 100 लोगों की मौत हुई. बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है. बीएलए ने इसे ऑपरेशन Dark Windy Storm नाम दिया है. 

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