बलूचिस्तान तो पाकिस्तान को प्यारा है, पर बलूच लोग नहीं. यही वजह है कि बलूचिस्तान के लोगों के दिलों में हमेशा पाकिस्तानी हुक्मरानों के लिए नफरत ही रही है. दरअसल, पाकिस्तान के सबसे बड़े राज्य बलूचिस्तान में सबसे ज्यादा खजाना छुपा है, वो खजाना जिस पर पाकिस्तान अपना कब्ज़ा चाहता है. आखिर क्या है वो खज़ाना? जिसके लिए पाकिस्तान लगातार खून बहाता आ रहा है. आइए आपको बताते हैं उस खजाने की कहानी.
दशकों से चले आ रहे विरोध की वजह वो खजाना ही है, जो बलूचिस्तान में मौजूद है. पाकिस्तान इसी खज़ाने को पाना चाहता है. इसके लिए वो अपने नागरिकों का खून बेदर्दी से बहा रहा है. असल में बलूचिस्तान के रेतीले इलाके की ज़मीन में खरबों का खज़ाना छिपा है. इस ज़मीन में यूरेनियम, पेट्रोल, नेचुरल गैस और कीमती धातुओं का बेशकीमती भंडार मौजूद है. पाकिस्तान उस पर अपना कब्जा जमाना चाहता है. हालांकि बलूचिस्तान के लोग किसी भी कीमत पर उस खजाने को सरकार के हवाले नहीं करना चाहते. क्योंकि पाकिस्तानी हुक्मरान तो उनके बारे में कुछ भी अच्छा नहीं सोचते.
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पाकिस्तान अक्सर भारत पर कश्मीर को अपने कब्ज़े में लेने का इल्ज़ाम लगाता रहता है. मगर खुद पाकिस्तान की करतूत देखिए कि वो बलूचिस्तान में अपने कब्ज़े के लिए बलूच लोगों को बेहरमी से पीटता है. निहत्थों पर अपनी ताकत दिखाता है. उसके जुल्मों सितम की तस्वीरें दुनिया के सामने आती रही हैं. जिससे पता चलता है कि पाकिस्तान कैसे दुनिया के सामने झूठ बोलता आ रहा है.
पाकिस्तान उस खज़ाने के लिए बेदर्दी से खून बहा रहा है. कहते हैं अगर वो खज़ाना पाकिस्तान के हाथ लग जाए तो उसकी तकदीर बदल जाएगी. इस खजाने पर कब्जे के लिए पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने जबरदस्त कोशिश की, लेकिन सिवाए नाकामी के कुछ उनके हाथ नहीं लगा. अब वर्तमान पाक सरकार भी इसी कोशिश में जुटी है. पाकिस्तान इस खजाने का दोहन करना चाहता है. ताकि जिस आर्थिक बदहाली से वो जूझ रहा है, उससे छुटकारा मिल जाए.
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आपको बता दें कि बलूचिस्तान के सुई इलाके में मिलने वाली गैस से पूरे पाकिस्तान की आधी से ज्यादा जरूरत पूरी होती है. लेकिन इसके बदले स्थानीय बलूची लोगों को न तो रोजगार मिला और न ही रॉयल्टी. इसी वजह से इस खज़ाने पर बलूच पाकिस्तान को कब्जा करने नहीं देना चाहते हैं. ईरान और अफगानिस्तान से सटे हुए बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा है. वहां उनका अपना अलग कानून है. यही वजह है कि बलूचिस्तान कभी भी पूरी तरह से पाकिस्तान के कब्ज़े में नहीं रहा है. इसीलिए पाकिस्तान को हमेशा बलूचिस्तान के अलग हो जाने का डर सताता रहता है.