बांग्लादेश में फैली अस्थिरता के बीच मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार भारत पर लगातार आरोप लगाने से बाज नहीं आ रही. शेख हसीना के सत्ता से हटने के तीन महीने हो चुके हैं और यूनुस सरकार बांग्लादेश को स्थिर करने में विफल रही है. अपनी इस विफलता को छिपाने के लिए बांग्लादेशी सरकार भारत का सहारा लेने की कोशिश कर रही है. अंतरिम सरकार में सूचना एवं प्रसारण सलाहकार नाहिद इस्लाम ने कहा कि भारत बांग्लादेश के घरेलू मामलों में हस्तक्षेप करके उसकी आंतरिक राजनीति को अस्थिर करने के प्रयास में है.
नाहिद इस्लाम छात्र आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे हैं जिसके कारण अगस्त की शुरुआत में शेख हसीना सरकार का पतन हुआ और उन्हें भागकर भारत में शरण लेनी पड़ी.
एक्स पर एक पोस्ट में नाहिद ने कहा कि बांग्लादेश विरोधी और मुस्लिम विरोधी बयानों को बढ़ावा देना अंततः भारत के राष्ट्रीय हितों के खिलाफ काम करेगा.
उन्होंने लिखा, 'भारत का सत्तारूढ़ वर्ग विभाजनकारी राजनीति और बांग्लादेश विरोधी बयानबाजी में लगा हुआ है. बांग्लादेश के पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और असम के साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध हैं, वे हमारे हितधारक हैं.'
नाहिद ने अपने ट्वीट में दावा किया कि बांग्लादेश में विद्रोह के दौरान कोलकाता और दिल्ली के छात्र उनके साथ एकजुटता से खड़े हुए और शेख हसीना के अत्याचारों का विरोध किया. उन्होंने कहा कि 'भारत की हिंदुत्ववादी ताकतें ऐसे लोकतांत्रिक संबंध और सद्भाव नहीं चाहती हैं.'
'अल्पसंख्यक उत्पीड़न के नैरेटिव का इस्तेमाल...'
छात्र आंदोलन के दौरान और शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं और उनके धार्मिक स्थलों पर हमले की खबरें आती रही है. हाल ही में बांग्लादेश के हिंदू पुजारी चिन्मय कृष्ण दास को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था. इन खबरों को लेकर नाहिद का कहना कि 'अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न' के नैरेटिव का इस्तेमाल कर भारत फासीवादी अवामी लीग को फिर से सत्ता में लाने और बांग्लादेश की लोकतांत्रिक और राष्ट्र की निर्माण प्रक्रिया को रोकने का काम कर रहा है.
नाहिद इस्लाम ने अपने लंबे ट्वीट में आगे लिखा, 'शुरू से ही हम इस बात पर जोर देते रहे हैं कि भारत सरकार को बांग्लादेश को अवामी लीग के चश्मे से देखना बंद कर देना चाहिए और समानता, निष्पक्षता और आपसी सम्मान के आधार पर एक नया रिश्ता कायम करना चाहिए. अवामी लीग के कार्यकाल के दौरान ही अल्पसंख्यकों को सबसे अधिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा, फिर भी भारत ने अवामी लीग का बिना शर्त समर्थन किया है. भारत अपने अल्पसंख्यकों के अधिकारों को सुनिश्चित करने में विफल रहा है लेकिन उसने एक ऐसी पार्टी को आश्रय दिया है जिसने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को सताया.'
नाहिद ने आगे लिखा कि भारत को यह नहीं भूलना चाहिए कि उसकी स्थिरता और अखंडता बांग्लादेश की स्थिरता और अखंडता के साथ जुड़ी हुई है.
उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा, 'भाजपा बांग्लादेश को भारत का घरेलू राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है. अगर ऐसा हुआ तो यह भारत की घरेलू राजनीति के लिए नुकसानदेह होगा. बांग्लादेश विरोधी और मुस्लिम विरोधी राजनीति भारत के राष्ट्रीय हित में नहीं होगी और न ही इसकी एकता में योगदान देगी. इसलिए, हम भारत से बांग्लादेश के खिलाफ प्रोपेगैंडा को बंद करने और सद्भाव और लोकतंत्र के प्रति सम्मान बनाए रखने का आह्वान करते हैं.'
चिन्मय दास की गिरफ्तारी पर भारत के बयान से भी भड़के थे नाहिद इस्लाम
पिछले महीने जब बांग्लादेश में चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी हुई थी तब भारत ने चिंता जताई थी. भारत ने बांग्लादेश से मांग की थी कि बांग्लादेश में हिंदू समेत सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए. भारत की इस प्रतिक्रिया को नाहिद इस्लाम ने 'अनुचित हस्तक्षेप' बताया था.
उन्होंने कहा था, 'हमारा मानना है कि इस तरह के बयान अनुचित हस्तक्षेप हैं. ऐसा लगता है जैसे भारत माहौल को और बिगाड़ना चाहता है. भारत को अपने अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों और उनकी सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए.'
उन्होंने आगे कहा, 'हम भारत को जिम्मेदारी से काम करने और आवामी लीग के झूठे प्रोपेगैंडा पर ध्यान न देने का आग्रह करते हैं.'