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शेख हसीना के जाते ही खुल गई पाकिस्तान की किस्मत! बांग्लादेश ने दिया ये ऑफर

बांग्लादेश में शेख हसीना के जाने से बड़ा राजनीतिक परिवर्तन देखने को मिल रहा है. पाकिस्तान का दुश्मन रहा बांग्लादेश अब दोस्ती का हाथ बढ़ा रहा है जिससे पाकिस्तान की बांछे खिल गई हैं. बांग्लादेश में पाकिस्तान का उच्चायोग भी अब काफी सक्रिय हो गया है.

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बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन से पाकिस्तान के भाग्य खुल गए हैं (Photo- X)
बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन से पाकिस्तान के भाग्य खुल गए हैं (Photo- X)

4 अगस्त को छात्र आंदोलन के बाद बांग्लादेश में हुए सत्ता परिवर्तन से पाकिस्तान बेहद खुश है. अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल के दौरान दोनों देशों के संबंध खराब बने हुए थे. बांग्लादेश चाहता था कि 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तान की तरफ से किए गए युद्ध अपराधों के लिए वो माफी मांगे लेकिन पाकिस्तान ने इससे इनकार कर दिया था. इस इनकार के बाद दोनों देशों के संबंध और खराब हुए थे. अब जबकि शेख हसीना सरकार का तख्तापलट हो गया है और देश में पाकिस्तान समर्थक सरकार बनी है, पाकिस्तान फूले नहीं समा रहा है. 

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नोबेल विजेता डॉ. मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार भी पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों में सुधार के लिए कोशिशें करने लगी है. अंतरिम सरकार में सूचना और प्रसारण के सलाहकार नाहिद इस्लाम ने सोमवार को कहा कि बांग्लादेश प्रशासन पाकिस्तान के साथ 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम से जुड़े "मुद्दों" का समाधान करना चाहता है.

26 वर्षीय छात्र कार्यकर्ता नाहिद इस्लाम शेख हसीना सरकार के पतन का मुख्य चेहरा थे. ढाका में सूत्रों के मुताबिक, नाहिद इस्लाम ने सोमवार को बांग्लादेश में पाकिस्तान के उच्चायुक्त सैयद अहमद मारूफ से मुलाकात की और कहा कि उनका देश पाकिस्तान के साथ लंबे समय से चले आ रहे विवाद को सुलझाना चाहता है.

इस्लाम ने कहा, 'आवामी लीग (शेख हसीना की पार्टी) 1971 को "इतिहास का आखिरी अध्याय" मानती थी. हालांकि, हम मानते हैं कि इसके आगे भी इतिहास बनता रहा है और बनेगा. हम पाकिस्तान के साथ 1971 के मुद्दे को हल करना चाहते हैं.' 

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साल 1971 में पाकिस्तान में आंतरिक संकट के कारण भारत और पाकिस्तान के बीच तीसरा युद्ध हुआ था. इस युद्ध के बाद पूर्वी पाकिस्तान अलग हो गया और बांग्लादेश का जन्म हुआ था.

'बांग्लादेश के कुछ नेता खतरनाक मिसाल...'

अंतरिम सरकार कथित तौर पर आवामी लीग के मूलभूत सिद्धांतों में बदलाव पर भी विचार कर रही है. सरकार ने बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम के चेहरे और इसके पहले राष्ट्रपति शेख मुजीबुर्रहमान की मूर्तियों और उनके संग्रहालयों के साथ की गई तोड़फोड़ पर चुप्पी साधे रखी है जिससे उनकी मंशा को समझा जा सकता है.

ढाका के राजनीतिक टिप्पणीकार प्रोफेसर नजमुल अहसन कलीमुल्ला ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया, 'कुछ नेता तेजी से पाकिस्तान के साथ संबंधों को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं... ऐसा कर एक खतरनाक मिसाल कायम की जा रही है और यह जल्दबाजी में किया जा रहा है.'

शेख मुजीबुर्रहमान की मूर्तियां तोड़े जाने का शहबाज शरीफ ने किया था बचाव

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कुछ समय पहले मुजीबुर्रहमान की मूर्तियों के साथ बर्बरता का बचाव करते हुए कहा था, 'जो जैसा करता है, उसके साथ वैसा ही होता है.' उन्होंने कहा था कि जिसने भी पाकिस्तान विरोधी आंदोलन का नेतृत्व किया, उसका यही हश्र हुआ है.

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बांग्लादेश में सक्रिय हुआ पाकिस्तानी उच्चायोग

शेख हसीना के शासनकाल के दौरान राजधानी ढाका में पाकिस्तानी उच्चायोग में बहुत ही कम हलचल होती थी. उच्चायोग पर 2018 के संसदीय चुनावों में विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के उम्मीदवारों का समर्थन करने का आरोप लगाया गया था.

अब ढाका में पाकिस्तानी उच्चायुक्त ने घोषणा की है कि बांग्लादेशी जल्द ही बिना वीजा के पाकिस्तान की यात्रा कर सकेंगे और ढाका-इस्लामाबाद के बीच सीधी उड़ानें फिर से शुरू होंगी. नाहिद इस्लाम के साथ बैठक के दौरान, पाकिस्तान के उच्चायुक्त ने भी बांग्लादेश के साथ मुक्ति संग्राम के मुद्दे को सुलझाने की अपने देश की इच्छा जाहिर की.

उच्चायुक्त मारूफ ने कहा, 'हम 1971 के मुद्दे को हल करना चाहते थे. हालांकि, पिछली सरकार ने हमें बातचीत का कोई अवसर नहीं दिया और जानबूझकर इस मुद्दे को अनसुलझा रखा. यह मामला बहुत पहले ही सुलझाया जा सकता था. हम बांग्लादेश के साथ संबंध बढ़ाने की इच्छा रखते हैं.'

पाकिस्तान ने बाढ़ से जूझ रहे बांग्लादेश को भी सहायता की पेशकश की है. नाहिद इस्लाम ने ये भी कहा कि उनकी सरकार बांग्लादेश की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए अन्य दक्षिण एशियाई देशों के साथ मजबूत संबंध स्थापित करेगी.

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