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बांग्लादेश-पाकिस्तान के रिश्तों पर नजर डालें तो ये दो दूरस्थ 'पड़ोसियों' का संबंध तनावपूर्ण रहा है. दूरस्थ इसलिए क्योंकि ढाका से इस्लामाबाद की हवाई दूरी 2000 किलोमीटर से भी ज्यादा है और पड़ोसी इसलिए क्योंकि बांग्लादेश कभी पाकिस्तान का हिस्सा था. लेकिन 1971 में भारत की वजह से बांग्ला आंदोलन फलीभूत हुआ और बांग्लादेश एक आजाद मुल्क बना. अब बांग्लादेश दक्षिण एशिया में पाकिस्तान का पड़ोसी जैसा ही है.
अगस्त 2024 से पहले तक इन दोनों देशों के बीच कोई खास रिश्ते नहीं थे. लेकिन 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना की सत्ता से विदाई और बांग्लादेश की कथित 'क्रांति' के बाद अचानक ढाका का प्यार पाकिस्तान के लिए उमड़ पड़ा है. पाकिस्तान की सेना और कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई तो इसी मौके की तलाश में थी. ढाका अब पाकिस्तान को न सिर्फ पुचकार रहा है बल्कि भारत के खिलाफ उकसा भी रहा है.
कुछ ही दिन पहले बांग्लादेश सेना के एक अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल एसएम कमरुल हसन रावलपिंडी दौरे पर थे. उनकी आगवानी में पाकिस्तान बिछ ही गया. एक मेज पर जिन्ना की तस्वीर थी. इसके एक ओर बांग्लादेश का झंडा था दूसरी ओर पाकिस्तान का. पाकि्स्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर ने जनरल एसएम कमरुल हसन से मुलाकात की.
जिस पाकिस्तानी आर्मी ने 1971 की बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में बांग्लादेशियों को रौंद दिया था. उसी पाकिस्तान आर्मी ने बांग्लादेश को अपना 'भातृ राष्ट्र' बताया.
अब दौरों की सीरीज में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के सीनियर अफसरों की टीम बांग्लादेश आई है.
आईएसआई प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व महानिदेशक (विश्लेषण) और चीन में पूर्व रक्षा अधिकारी मेजर जनरल शाहिद आमिर अफसर कर रहे हैं. दो ब्रिगेडियर, आलम आमिर अवान और मुहम्मद उस्मान जतीफ भी बांग्लादेश आने वाले आईएसआई प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं.
यह दशकों के बाद आईएसआई अधिकारियों की ढाका की पहली यात्रा है. आईएसआई अधिकारी 21 जनवरी को अमीरात की फ्लाइट ईके-586 से ढाका पहुंचे और 24 जनवरी तक बांग्लादेश में रहेंगे.
हालांकि आईएसआई और बांग्लादेश सेना की बैठक के एजेंडे की जानकारी अभी तक नहीं दी गई है, लेकिन इस यात्रा में सैन्य और सुरक्षा सहयोग, खुफिया जानकारी साझा करने के तंत्र को मजबूत करने और क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं को संबोधित करने पर चर्चा होने की संभावना है. ऐसा प्रतीत होता है कि पाकिस्तान अपनी व्यापक क्षेत्रीय रणनीति के तहत बांग्लादेश के साथ गहन जुड़ाव चाहता है.
ऐसी भी खबरें है कि पिछले कुछ महीनों में ढाका आईएसआई और कट्टरपंथी जमात को बांग्लादेश दौरे में ढील दे रहा है.
निश्चित रूप से भारत के दो पड़ोसियों के बीच की ये गर्मजोशी भारत के लिए चिंता का विषय है.
ISI का जो रिकॉर्ड रहा है उससे इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है वो बांग्लादेश के साथ खुफिया जानकारी साझा करने के तंत्र को मजबूत करने के बहाने भारत में ताक-झांक कर सकता है.
आईएसआई बांग्लादेश की सेना और वहां की एजेंसियों से तालमेल बढ़ाकर भारत के सीमावर्ती इलाकों पर हिंसक गतिविधियों को अंजाम दे सकता है. गौरतलब है कि भारत के साथ बांग्लादेश की सीमा सबसे लंबी है. इस वक्त भारत और बांग्लादेश के संबंध भी गिरावट के दौर पर हैं. ऐसी परिस्थिति में बांग्लादेश की यूनुस सरकर भारत विरोधी तत्वों को अपने देश में हवा दे सकते हैं.
आईएसआई के दौरे से सीमा पार की गतिविधियों में वृद्धि हो सकती है, जिससे भारत को अपनी सीमा सुरक्षा को और मजबूत करने की आवश्यकता पड़ सकती है. यह सीमा पार से होने वाले अपराध, तस्करी, और अवैध प्रवास को भी प्रभावित कर सकता है. बांग्लादेश पहले से ही सीमा पर बाड़ेबंदी का विरोध कर रहा है.
बांग्लादेश में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत अशरफ कुरैशी ने अल जजीरा से कहा, "निश्चित रूप से, यदि आप बांग्लादेश हैं, तो आप अपने विकल्पों पर विचार करेंगे, और भारत के साथ उनके संबंधों की स्थिति को देखते हुए, पाकिस्तान भी समीकरण में आ जाता है."
कुरैशी ने भी चेतावनी दी कि इस क्षेत्र की भौगोलिक वास्तविकताओं का मतलब है कि बांग्लादेश भारत विरोधी रुख नहीं अपना सकता.
उन्होंने कहा, "बांग्लादेश उनके साथ एक लंबी सीमा साझा करते हैं. उनका जल स्रोत भारत से आता है. अधिक से अधिक, वे शेख हसीना के समय की तुलना में थोड़ा स्वतंत्र नीतिगत रुख अपना सकते हैं, लेकिन वे भारत विरोधी रुख नहीं अपनाएंगे."
किंग्स कॉलेज लंदन में सीनियर लेक्चरर वाल्टर लैडविग ने कहा कि 'बांग्लादेश के अंदर कई राजनीतिक शक्तियां ज्योग्राफी और अर्थशास्त्र की वास्तविकताओं को पहचानने में जुटे हैं. ये रुझान देखने लायक है, लेकिन भारत और पाकिस्तान को लेकर बांग्लादेश के रुख को समझने में जल्दबाजी नहीं की जानी चाहिए.'
बांग्लादेश में जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश की भारत विरोधी सक्रियता ने भारत की चिंताएं और बढ़ा दी है. पाकिस्तान इन तत्वों को और भी शह दे सकता है. गौरतलब है कि जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) ने भारत के खिलाफ कई गतिविधियों को अंजाम दिया है या देने की कोशिश की है.
ISI बांग्लादेश में जमात के इन तत्वों को और भी बढ़ावा दे सकता है. और इन्हें भारत के खिलाफ उकसा सकता है. बांग्लादेश की यूनुस सरकार ने जेल में बंद में जमात के कई कट्टरपंथी नेताओं को रिहा कर दिया है.
JMB ने बांग्लादेश के साथ-साथ भारत के पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में भी अपने नेटवर्क का विस्तार किया है. वे वहां युवाओं की भर्ती और प्रशिक्षण भी करते हैं. ऐसे में ISI अफसरों के दौरे ने भारत की चिंता में इजाफा किया है.