बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनके मंत्रिमंडल के पूर्व मंत्रियों समेत कई लोगों के खिलाफ एक वकील के अपहरण के आरोप में केस दर्ज किया गया है. बता दें कि शेख हसीना (76 साल) के इस्तीफा देने के बाद उनके खिलाफ यह दूसरा मामला है.
द डेली स्टार अखबार की रिपोर्ट के अनुसार जबरन गायब किए जाने के मामले में पीड़ित सुप्रीम कोर्ट के वकील सोहेल राणा ने केस आवेदन दायर किया है. ढाका मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट फरजाना शकीला सुमू चौधरी की अदालत ने केस दर्ज करने का आदेश दिया.
इस मामले में शेख हसीना के तत्कालीन मंत्रिमंडल के पूर्व गृहमंत्री असदुज्जमां खान, पूर्व कानून मंत्री अनीसुल हक, पूर्व पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) शाहिदुल हक, रैपिड एक्शन बटालियन (आरएबी) की पूर्व महानिदेशक बेनजीर अहमद और आरएबी के 25 अज्ञात सदस्य शामिल हैं.
रिपोर्ट में एडवोकेट सोहेल राणा के हवाले से कहा गया है कि 10 फरवरी 2015 को मुझे उत्तरा के सेक्टर 5 से हिरासत में लिया गया और जबरन एक गाड़ी में बैठा दिया गया था, जैसे ही मैं कार के अंदर गया, मेरे कानों और प्राइवेट पार्ट में बिजली के झटके देकर मुझे बेहोश कर दिया गया था. उन्होंने कहा कि उस दौरान मुझे कई तरह की क्रूर यातनाएं दी गई. आखिरकार मुझे अगस्त में राजशाही के गोदागरी में रिहा कर दिया गया.
बता दें कि इससे पहले शेख हसीना और 6 अन्य आरोपियों के खिलाफ पिछले महीने हिंसक झड़पों के दौरान एक किराना दुकान के मालिक की मौत के मामले में हत्या का मामला दर्ज किया गया था. 5 अगस्त को शेख हसीना सरकार के इस्तीफे के बाद देशभर में भड़की हिंसक घटनाओं में बांग्लादेश में 230 से अधिक लोग मारे गए थे. जबकि जुलाई में आरक्षण विरोधी प्रदर्शनों के शुरू होने के बाद से बांग्लादेश में मरने वालों की संख्या 560 हो गई थी.
शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के पतन के बाद एक अंतरिम सरकार का गठन किया गया और इसके मुख्य सलाहकार 84 वर्षीय नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने पिछले सप्ताह अपने 16 सदस्यीय सलाहकार परिषद के विभागों की घोषणा की थी.