बांग्लादेश में चल रही राजनीतिक उथल-पुथल के बीच सोमवार को ढाका स्थित भारतीय वीजा आवेदन केंद्र पर जोरदार विरोध प्रदर्शन देखने को मिला. दरअसल अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर वीज़ा के लिए उनके अनुरोधों में देरी किए जाने के बाद सैकड़ों बांग्लादेशी नागरिक भड़क उठे और उन्होंने भारतीय वीज़ा आवेदन केंद्र के बाहर जमकर हंगामा किया.
सोशल मीडिया पर इस विरोध प्रदर्शन के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं जिनमें नाराज़ वीज़ा आवेदक, वीज़ा प्राप्त करने में हो रही देरी और कथित उत्पीड़न के खिलाफ नारे लगाते हुए नजर आ रहे हैं. प्रदर्शनकारियों ने दावा किया है कि महीनों तक इंतज़ार करने के बाद भी उन्हें अपना वीज़ा नहीं मिला. इंडिया टुडे टीवी को सूत्रों ने बताया कि इस अराजकता ने न केवल भारतीय वीज़ा केंद्र (IVAC) के संचालन को प्रभावित किया है, बल्कि अन्य देशों के लिए वीज़ा प्रक्रिया पर भी इसका असर पड़ा है.
इसी महीने में फिर से शुरू हुआ था संचालन
बांग्लादेशी नागरिक अक्सर मुख्य रूप से चिकित्सा और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए भारत आना पसंद करते हैं. भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली अन्य देशों की तुलना में अपेक्षाकृत सस्ती कीमत पर विशेष उपचार, सर्जरी और स्वास्थ्य सेवा प्रदान करती है. उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले बांग्लादेशी छात्रों के लिए भी भारत एक पसंदीदा डेस्टिनेशन है.
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आपको बता दें कि ढाका स्थित भारत के वीज़ा आवेदन केंद्र ने इस महीने की शुरुआत में "सीमित संचालन" फिर से शुरू किया था. वीजा संचालन केंद्र उस समय प्रभावित हुआ था जब पड़ोसी देश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के आवामी लीग सरकार को सत्ता से बाहर होना पड़ा और इस वजह से बड़े पैमाने पर हिंसक झड़पें हुईं थी, जिसके कारण प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार को सत्ता से बाहर होना पड़ा.
13 अगस्त को एक प्रेस विज्ञप्ति में IVAC ने कहा, "IVAC ढाका ने सीमित संचालन फिर से शुरू कर दिया है. पासपोर्ट के संग्रह के संबंध में व्यक्तिगत आवेदकों को संदेश भेजे जाएंगे." इसने वीज़ा आवेदकों से अनुरोध किया कि वे अपने पासपोर्ट लेने के लिए एक टेक्स्ट संदेश प्राप्त करने के बाद ही केंद्र पर आएं.
25 अगस्त को हुई थी हिंसा
इस बीच, 25 अगस्त को ढाका में ताजा हिंसा की खबर आई, जब छात्रों और सैकड़ों अर्धसैनिक बलों के कर्मियों के बीच झड़प हुई जो नौकरी नियमित करने की मांग कर रहे थे. डेली स्टार के अनुसार, 'कम से कम 50 लोग घायल हुए. टकराव के दौरान, दोनों समूहों ने हिंसक झड़पें कीं, एक-दूसरे पर ईंटें फेंकी और अराजक तरीके से भाग निकले. स्थिति इतनी बिगड़ गई कि व्यवस्था बहाल करने के लिए पुलिस और सेना के जवानों को तैनात करना पड़ा.'
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