पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा है कि दोनों देशों के बीच के मतभेदों को सुलझाने का एकमात्र तरीका बातचीत है. कुरैशी ने यह टिप्पणी तब सामने आई है जब पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के लिए भारत में हैं. पूर्व पाक विदेश मंत्री ने कहा है कि भुट्टो के पास अपनी भारत यात्रा के दौरान कश्मीर का मुद्दा उठाने का एक बड़ा अवसर है.
पिछले 12 सालों में यह पहली बार है जब पाकिस्तान का कोई विदेश मंत्री भारत आ रहा हो. इस यात्रा के संदर्भ में टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत करते हुए कुरैशी ने भारत-पाक संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर बात की है.
दोनों देशों के बीच बंद पड़े व्यापार को लेकर कुरैशी ने कहा कि अकेले व्यापार को शुरू कर देने से दोनों देशों के रिश्तों में नरमी नहीं आएगी. उन्होंने कहा कि व्यापार से दोनों ही देशों को फायदा है लेकिन जब सब कुछ लगभग बंद पड़ा हो तो अकेले व्यापार को शुरू करने का कोई मतलब नहीं है.
'केवल व्यापार शुरू करना पर्याप्त नहीं'
उनसे पूछा गया कि उनके कार्यकाल में ऐसी रिपोर्टें आईं कि वो भारत के साथ व्यापारिक रिश्ते शुरू करने को इच्छुक नहीं थे तो उन्होंने कहा, 'देखिए, मुद्दा यह है, मैं जानता हूं कि दोनों देशों के बीच व्यापार से बहुत फायदा होगा. इससे बहुत अधिक आर्थिक लाभ होगा लेकिन व्यापार को अलग करके नहीं देखा जा सकता.'
उन्होंने आगे कहा, 'व्यापार को दूसरी चीजों के साथ ही चलना है.., भारत से केवल व्यापार शुरू कर देना ही पर्याप्त नहीं है. मैं बस इतना ही कह रहा हूं. व्यापार संबंधों को सुधारने में मदद कर सकता है, लेकिन व्यापार अपने आप में काफी नहीं होगा.'
इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) सरकार में विदेश मंत्री रहे कुरैशी ने बिलावल भुट्टो की भारत यात्रा पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उनकी पार्टी इसका विरोध नहीं करती है. उन्होंने कहा कि पीटीआई ये समझती है कि एससीओ में शामिल होना पाकिस्तान का बहुपक्षीय दायित्व है.
उन्होंने कहा, 'एक पूर्व विदेश मंत्री के रूप में, जो इस तरह के सम्मेलनों में जाता रहा है, मैं कहूंगा कि यह एक महत्वपूर्ण यात्रा है. और हर हाल में उन्हें जाना ही चाहिए था.'
अगर भारत-पाक एससीओ से इतर मिलते तो....
कुरैशी ने कहा कि बिलावल भुट्टो की भारत यात्रा तब दोनों देशों के रिश्तों के लिए लाभदायक साबित होती जब दोनों देश एससीओ से इतर द्विपक्षीय संबंधों पर बात करने के लिए मिलते.
उन्होंने कहा, 'पुलवामा हमला और बालाकोट (एयरस्ट्राइक) के बाद हमारे राजनयिक संबंध सीमित हो गए. फिलहाल हमारे बीच कोई व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध नहीं हैं और हम क्रिकेट मैचों के लिए किसी तटस्थ देश की तलाश करते रहते हैं. मेरी पार्टी और मैं भारत के साथ शांति चाहते हैं.'
भारत-पाक के बीच बातचीत के महत्व पर जोर देते हुए कुरैशी ने कहा, 'जब तक हमारे बीच बातचीत नहीं होगी, हम कैसे अच्छे पड़ोसी बनेंगे और शांति बहाल करेंगे? हमें यह स्वीकार करने की जरूरत है कि हमारे बीच कई ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें सुलझाया जाना बाकी है. हम उन्हें छोड़ नहीं सकते बल्कि हमें उन्हें सुलझाना होगा. और इसे सुलझाने का सबसे सभ्य तरीका बातचीत ही है.'
कुरैशी ने कहा कि दोनों देशों के बीच के मुद्दों को सैन्य तरीके से नहीं सुलझाया जा सकता बल्कि उन्हें बातचीत के जरिए राजनीतिक रूप से हल करना होगा.
कुरैशी ने कहा कि एससीओ एक बहुपक्षीय मंच है जहां द्विपक्षीय मुद्दों को नहीं उठाया जा सकता है. लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि बिलावल के पास एससीओ बैठक से इतर कुछ 'प्रासंगिक' मुद्दों को उठाने का अवसर है.
उन्होंने कहा, 'मुझे उम्मीद है कि वो मानवाधिकार, विशेष रूप से मुसलमानों के साथ हो रहे बर्ताव के मुद्दों को उठाने में नहीं कतराएंगे. मुझे उम्मीद है कि वो पानी के मुद्दे को भी उठाएंगे जो दोनों देशों के बीच चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है.'
जब कुरैशी से इंटरव्यू के दौरान यह कहा गया कि 2019 में पुलवामा हमले में शामिल आत्मघाती हमलावर पाकिस्तान से आया था तो उन्होंने कहा, 'भारत में पाकिस्तान को कोसना बेहद लोकप्रिय है.'
उन्होंने दावा किया, 'यह आपका नजरिया है कि हमलावर पाकिस्तान से आया था. इसका एक दूसरा नजरिया भी है और वो यह है कि हमला राजनीतिक कारणों से एक स्व-निर्मित, सुनियोजित घटना थी.'
'भारत को अपने रुख में बदलाव करना चाहिए'
भारत लगातार कहता रहा है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद पर नकेल नहीं कसता और आतंकवादियों को अपनी जमीन इस्तेमाल करने से नहीं रोकता, वो उसके साथ द्विपक्षीय बातचीत शुरू नहीं करेगा.
भारत के इस रुख पर कुरैशी ने कहा, 'मुझे लगता है कि भारत को अपने इस रुख में बदलाव करना होगा कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को नहीं छोड़ देता तब तक उससे बातचीत नहीं होगी. पाकिस्तान ने आतंकवाद से लड़ाई लड़ी है, पाकिस्तान उग्रवाद और आतंकवाद को हराने की प्रक्रिया में है. जैसा कि मैंने कहा, हम भुगत चुके हैं. तो हमें इसे बातचीत न करने का बहाना नहीं बनाना चाहिए.
कुरैशी से यह भी पूछा गया कि क्या विदेश मंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल के दौरान पर्दे के पीछे भारत-पाक के बीच कोई बातचीत चल रही थी.
उन्होंने जवाब दिया, 'मुझे नहीं लगता कि कोई औपचारिक बैकचैनल था. लेकिन हां, जैसा कि होता है, खुफिया प्रमुख संपर्क में रहते हैं.'
कश्मीर को लेकर क्या बोले कुरैशी
कुरैशी ने कश्मीर के मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि 5 अगस्त 2019 को भारत सरकार ने जो कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त किया वो एकतरफा था.
कुरैशी ने कहा कि कश्मीर का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त विवाद है जिसे भारत आंतरिक मामला कहकर खारिज नहीं कर सकता.