कनाडा (Canada) के ब्रैम्पटन शहर में एक हिंदू मंदिर के पुजारी पर हाल ही में खालिस्तानी झंडे लिए प्रदर्शनकारियों और वहां मौजूद लोगों के बीच हुई झड़पों के दौरान ‘‘हिंसक बयानबाजी’’ करने का आरोप लगा. पील क्षेत्रीय पुलिस ने ब्रैम्पटन में गोर रोड पर एक मंदिर में एक बड़े प्रदर्शन पर कार्रवाई शुरू की है. जैसे-जैसे विरोधी पक्षों के बीच तनाव बढ़ता गया, लोगों सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पब्लिक ऑर्डर यूनिट को तैनात किया गया.
पुलिस ने प्रदर्शनों के दौरान हुई कई घटनाओं की जांच शुरू की. घटना के कई वीडियोज भी सामने आए हैं. एक वीडियो में, एक शख्स को हिंसा भड़काने के लिए लाउडस्पीकर का उपयोग करते हुए, समूहों से सिख मंदिरों पर हमला करने का आह्वान करते हुए पकड़ा गया है.
आरोपियों पर कौन सी धाराएं लगीं?
6 नवंबर, 2024 को टोरंटो के 57 वर्षीय शख्स रणेंद्र लाल बनर्जी को कनाडा के आपराधिक संहिता की धारा 319 (1) के विपरीत सार्वजनिक रूप से नफरत फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया. उन्हें शर्तों के साथ रिहा कर दिया गया और बाद में उन्हें ब्रैम्पटन में ओंटारियो कोर्ट ऑफ जस्टिस में पेश होना है.
किचनर इलाके के अरमान गहलोत (24) और बिना किसी निश्चित पते वाले अर्पित (22) के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए हैं. मामले में मौत या शारीरिक नुकसान पहुंचाने की धमकी देना, हथियार से हमला करने की साजिश और शरारत करने की साजिश जैसे आरोप शामिल किए गए है.
पील क्षेत्रीय पुलिस कनाडा के अधिकार और स्वतंत्रता के चार्टर के मुताबिक, किसी व्यक्ति के विरोध करने के अधिकार का सम्मान करने के लिए प्रतिबद्ध है. हिंसा, हिंसा की धमकियों या बर्बरता के किसी भी कृत्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. हम उन लोगों के सहयोग की सराहना करते हैं, जो इन घटनाओं के दौरान शांतिपूर्ण रहे.
पील क्षेत्रीय पुलिस ने तब से एक जांच टीम का गठन किया है, जो 3 और 4 नवंबर की घटनाओं के दौरान अपराध की सभी घटनाओं की जांच करने के लिए समर्पित है.
भारत ने कनाडा में वाणिज्य दूतावास शिविर बंद किए
कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों द्वारा "न्यूनतम सुरक्षा सुरक्षा" से भी वंचित किए जाने के बाद, कनाडा में भारतीय उच्चायोग ने कुछ नियोजित वाणिज्य दूतावास शिविरों को रद्द करने का फैसला किया है. यह 2 और 3 नवंबर को ब्रैम्पटन और सरे में दो वाणिज्य दूतावास शिविरों पर खालिस्तानी भीड़ द्वारा किए गए हमलों के बाद हुआ है. टोरंटो में भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "सुरक्षा एजेंसियों द्वारा सामुदायिक शिविर आयोजकों को न्यूनतम सुरक्षा सुरक्षा देने में अपनी असमर्थता व्यक्त करने के मद्देनजर, वाणिज्य दूतावास ने कुछ निर्धारित शिविरों को रद्द करने का फैसला किया है."
क्या है पूरा मामला?
कनाडा के ब्रैम्पटन में 3 नवंबर को हिंदू सभा मंदिर में विरोध प्रदर्शन हुआ था. सोशल मीडिया पर इससे संबंधित कुछ वीडियोज सामने आए थे, जिसमें प्रदर्शनकारी खालिस्तान समर्थक बैनर लिए हुए थे. वीडियो में लोगों के बीच हाथापाई और मंदिर के आस-पास के मैदान में एक-दूसरे पर डंडे से वार करते हुए दिखाया गया.
एजेंसी के मुताबिक, खालिस्तानी झंडे लेकर आए प्रदर्शनकारियों की लोगों के साथ झड़प हुई और उन्होंने मंदिर प्राधिकारियों और भारतीय वाणिज्य दूतावास द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित वाणिज्य दूतावास के एक कार्यक्रम में भी बाधा पहुंचाई.
हिंसा की शुरुआत रविवार दोपहर उस समय ब्रैम्पटन में हिंदू मंदिर में हुई, जब सिख फॉर जस्टिस नाम के एक समूह के सदस्यों ने भारतीय वाणिज्य दूतावास के अधिकारियों के दौरे के दौरान विरोध प्रदर्शन किया. पील पुलिस ने कहा कि इसके बाद अधिकारियों को वहां से सुरक्षित निकाल दिया गया.
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रविवार की घटना की कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने निंदा की और कहा कि प्रत्येक कनाडाई को अपने धर्म का स्वतंत्र और सुरक्षित रूप से पालन करने का अधिकार है. ट्रूडो ने समुदाय की रक्षा करने और इस घटना की जांच करने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया के लिए स्थानीय अधिकारियों को धन्यवाद दिया.
भारत ने भी हमले की निंदा करते हुए उम्मीद जताई कि हिंसा में शामिल लोगों पर मुकदमा चलाया जाएगा. विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि भारत कनाडा में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता में है.