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'बस दरवाजा खुला है, असली काम..', चंद्रयान-3 पर क्यों बोले पहले कनाडाई अंतरिक्ष यात्री

Chandrayaan 3: भारत का मून मिशन योजना के मुताबिक काम कर रहा है. बुधवार को चंद्रयान-3 का लैंडर सफलतापूर्वक चांद की सतह पर लैंड कर गया और अब उसके रोवर प्रज्ञान ने भी काम करना शुरू कर दिया है. हालांकि, कनाडा के पहले अंतरिक्ष यात्री का कहना है कि असली काम तो अब शुरू होगा.

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विक्रम लैंडर चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग में सफल रहा है (Photo- Reuters)
विक्रम लैंडर चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग में सफल रहा है (Photo- Reuters)

भारत के चंद्रयान-3 के सफलतापू्र्वक चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग को लेकर दुनियाभर के अंतरिक्ष वैज्ञानिक उत्साहित हैं. कनाडा के पहले अंतरिक्ष यात्री क्रिस हेडफील्ड को भी भारत के इस मून मिशन से काफी उम्मीदें हैं. उनका कहना है कि भारत के मून मिशन से चांद पर पानी की मौजूदगी के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की संभावना है. उन्होंने कहा कि चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग एक मुश्किल काम था लेकिन असली काम अब शुरू होता है.

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भारत ने अपने विक्रम लैंडर को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में उतारा है और अब लैंडर के अंदर मौजूद प्रज्ञान रोवर ने बाहर निकलकर चंद्रमा पर अपना काम शुरू कर दिया है. अब अगले 14 दिनों तक प्रज्ञान के जरिए चंद्रमा की नई जानकारियां सामने आएंगी.

हालांकि, कनाडाई अंतरिक्ष यात्री हैडफील्ड का कहना है कि ये केवल प्रारंभिक चीजें थीं. उन्होंने एनडीटीवी से बातचीत में कहा, 'चांद पर हम जो कुछ भी खोजने की कोशिश कर सकते हैं, उसके लिए बस एक सुरक्षित दरवाजा खुला है...अब असली काम शुरू होता है.'

चांद की सतह पर पानी की खोज

साल 2009 में भारत के चंद्रयान-1 में लगे नासा के एक उपकरण ने पता लगाया था कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव में हवा में पानी के अणु मौजूद हैं. इस खोज ने वैज्ञानिकों के बीच चांद के दक्षिणी ध्रुव को लेकर जिज्ञासा को बढ़ा दिया था. भारत के मून मिशन का एक बड़ा उद्देश्य चांद की सतह पर पानी के बर्फ का पता लगाना है. इससे न केवल पीने का पानी तैयार किया जा सकता है बल्कि भविष्य के मून मिशन के लिए चंद्रमा की सतह पर ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.

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इस संबंध में हेडफील्ड कहते हैं, 'चंद्रयान -3 और विक्रम लैंडर दक्षिण में, 70 डिग्री दक्षिण में उतरे हैं. इसे आप ऐसे पता लगा सकते हैं कि पृथ्वी पर यह स्थान अंटार्कटिका के तट पर रहा होगा. यह चंद्रमा पर वैसी जगह में उतरा है जहां छाया रहती है और पानी स्थायी तौर पर रह सकता है. हम चंद्रमा के इस हिस्से पर कभी नहीं गए... इसलिए खोज की संभावना बहुत अधिक है.'

उन्होंने आगे कहा, 'हर एक मिशन हमारी जानकारी बढ़ाता है... यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत, भारतीय लोग और इसरो आगे क्या करते हैं.'

भारत का अगला स्पेस मिशन

हेडफील्ड अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के कमांडर भी रह चुके हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत का अगला बड़ा लक्ष्य एक अंतरिक्ष स्टेशन का निर्माण होना चाहिए तो उन्होंने कहा कि यह देश की प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है.

उन्होंने कहा, 'भारत का लक्ष्य एक स्पेसक्राफ्ट बनाना और अपने नागरिकों को अंतरिक्ष में भेजना हो सकता है.

वहीं, चंद्रयान-3 की लैंडिंग के बाद इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने कहा कि भारत का अगला लक्ष्य गगनयान है. इसके तहत भारत मनुष्य को अंतरिक्ष में भेजेगा. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'हमारा लक्ष्य सितंबर या अक्टूबर के पहले सप्ताह में इस पर काम शुरू करने का है.'

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प्रज्ञान रोवर की बात करें तो, अगले 14 दिनों तक वह चंद्रमा की सतह पर जानकारी जमा करेगा. चंद्रमा पर एक दिन पृथ्वी पर 14 दिनों के बराबर होता है. विक्रम लैंडर पर सौर पैनल लगे हैं जो सूर्य की ऊर्जा को बिजली में बदलते हैं जिससे प्रज्ञान काम कर रहा है. जैसे ही चंद्रमा पर रात की शुरुआत होगी, रोवर को ऊर्जा मिलनी बंद हो जाएगी और संभावना है कि वो काम करना बंद कर देगा. 

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