जापान और भारत ने सोमवार को अपनी पहली एयर कॉम्बैट एक्सरसाइज शुरू कर दी है. दोनों देशों के बीच यह इस तरह का पहला संयुक्त लड़ाकू सैन्याभ्यास है. लेकिन चीन को इससे मिर्ची लग गई है. चीन का कहना है कि इस सैन्याभ्यास से बीजिंग के खिलाफ जापान और भारत की बढ़ रही सैन्य महत्वकांक्षाओं का पता चला है.
चीन के सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और जापान ने अमेरिका के उकसावे में यह संयुक्त सैन्याभ्यास शुरू किया है.
रिपोर्ट में एनालिस्ट्स के हवाले से बताया गया है कि जापान और भारत का यह संयुक्त सैन्याभ्यास दोनों देशों की दीर्घकालीन और लगातार बढ़ रही सैन्य महत्वकांक्षाओं को दर्शाता है.
बीजिंग के एक मिलिट्री एक्सपर्ट वेइ डोंग्सू ने कहा कि भारत सैन्य उपकरणों की खरीद पर खर्च कर हिंद महासागार क्षेत्र के बाहर अपनी सैन्य क्षमताओं को दिखाकर एक प्रमुख देश के रूप में अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहता है.
जापान के पीछे की उसकी मंशा
वेई ने कहा कि दूसरी तरफ जापान ने अपनी धरती पर भारतीय लड़ाकू विमानों का स्वागत किया है ताकि वह बदले में भविष्य में अपने विमान भी भारत भेज सके. इससे जापान को दुनिया के अन्य हिस्सों में अपनी सेना की गतिविधियों के विस्तार में मदद मिलेगी.
रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिका अपनी इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटेजी में जापान और भारत को लुभा रहा है ताकि चीन का प्रभुत्व कम कर सके. जापान, ताइवान मामले में दखल करने की योजना बना रहा है जबकि भारत, चीन के साथ सीमा विवादों में शामिल है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि संयुक्त सैन्याभ्यास के बावजूद अगर जापान या भारत में से किसी के भी साथ संघर्ष की स्थिति पैदा होती है तो इनमें से किसी भी देश के पास युद्ध को लेकर रणनीतिक इच्छाशक्ति नहीं है और ना ही उनके पास पर्याप्त क्षमता है. लेकिन चीन को चौकस और किसी भी तरह की विपरीत परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए.
एनालिस्ट का कहना है कि इस संयुक्त सैन्याभ्यास से जापान वायुसेना को भारतीय वायुसेना से व्यापक अनुभव मिल सकता है, विशेष रूप से चीन के संदर्भ में.
रिपोर्ट में कहा गया कि इस संयुक्त सैन्याभ्यास में एसयू-30एमकेआई लड़ाकू विमान भी हिस्सा ले रहे हैं.
बता दें कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) एसयू-30एमकेकेके ऑपरेट करते हैं. इसके अलावा एसयू-30एमके2, एसयू-35, द जे-11, द जे-15 और जे-16 लड़ाकू विमान ऑपरेट करते हैं. ये सभी लड़ाकू विमान हैं और रूस के एसयू-27 और भारत के एसयू-30एमकेआई की तरह है.
बता दें क Veer Guardian-23 सैन्याभ्यास में भारत के एसयू-30एमकेआई मल्टीरोट लड़ाकू विमान, दो सी-17 ग्लोबलमास्टर ट्रांसपोर्ट प्लेन, एक Il-78 एरियल टैंकर और लगभग 150 जवान हिस्सा ले रहे हैं. जापान वायुसेना की तरफ से सैन्याभ्यास में चार एफ-2एस और चार एफ-15 मल्टीरोल लड़ाकू विमानों ने हिस्सा लिया है.
बता दें कि 16 जनवरी से शुरू यह सैन्याभ्यास 26 जनवरी तक जारी रहेगा. यह सैन्याभ्यास जापान के इबारकी प्रांत में हयाकुरी और इरुमा एयर बेस पर हो रहा है. इस ड्रिल का उद्देश्य जापान और भारत के बीच गहराते रक्षा और सुरक्षा संबंधों को और गहरा करना है.