
भारत-चीन के राजनयिक रिश्तों के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है कि चीन ने भारत में अपने राजदूत का पद लगातार 10 महीने खाली रखा हो. पर्यवेक्षकों का कहना है कि आगामी जी-20 शिखर सम्मेलन को देखते हुए चीन का यह कदम 'असामान्य' है. ऐसी संभावना है कि आने वाले हफ्तों में पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच मुलाकात हो सकती है. बावजूद इसके चीन का भारत में अपना राजदूत नियुक्त नहीं करना कई सवाल पैदा कर रहा है.
कुछ पर्यवेक्षकों का यह भी कहना है कि राजदूत नियुक्त करने में रिकॉर्ड देरी कर चीन यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि भारत के साथ उसके संबंध सामान्य नहीं है.
सुन वेइदोंग भारत में चीन के पिछले राजदूत थे जिन्हें अक्टूबर 2022 में चीन ने अपना उप विदेश मंत्री नियुक्त किया था. इसके बाद से ही भारत में चीनी राजदूत का पद खाली पड़ा है.
चीनी राजदूत का पद भारत में चीनी राजनयिकों के दस सबसे प्रतिष्ठित पदों में से एक होता है क्योंकि राजदूत का दर्जा उप विदेश मंत्री के बराबर का होता है. इतना प्रतिष्ठित पद अब तक इतने लंबे समय के लिए खाली नहीं रहा है. बल्कि चीन इससे पहले भारत में अपने राजदूत को खाली पद को भरने के लिए आतुर दिखता था.
इसका एक उदाहरण तब दिखा था जब सितंबर 2014 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आने वाले थे. उस दौरान भारत में चीनी राजदूत के खाली पद को भरने के लिए दोनों देशों ने रिकॉर्ड कम समय में कागजी काम पूरा कर लिया था ताकि शी के भारत आने से पहले भारत में चीनी राजदूत ली युचेंग की नियुक्ति हो जाए. ली से पहले भारत में चीन के राजदूत वेई वेई थे जिन्हें चीन ने नियुक्ति के दो साल बाद अचानक वापस बुला लिया था.
जी-20 शिखर सम्मेलन और चीनी राजदूत का नियुक्त न किया जाना
भारत की मेजबानी में जी-20 शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष नई दिल्ली आने वाले हैं बावजूद इसके संगठन के अहम सदस्य चीन ने अब तक भारत में अपने राजदूत को लेकर कोई नाम नहीं सुझाया है. द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के तनावपूर्ण रिश्ते पीएम मोदी और शी जिनपिंग का संभावित बैठक से एक महत्वपूर्ण मोड़ लेने वाले हैं. ऐसे में भारत में चीनी राजदूत का पद खाली रहना कई सवाल खड़े करता है.
पीएम मोदी शी जिनपिंग की संभावित बैठक
ऐसी उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग 22-24 अगस्त को दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. शी 9-10 सितंबर के बीच नई दिल्ली में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भी भारत आ सकते हैं. इस बीच दोनों के बीच वार्ता की संभावना बन सकती है क्योंकि दोनों पक्षों ने ही अपने नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक से इनकार नहीं किया है.
दोनों नेताओं के बीच नवंबर 2019 के बाद से द्विपक्षीय वार्ता नहीं हुई है. नवंबर 2019 में ब्राजील में आयोजित शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच बैठक हुई थी. वहीं, नवंबर 2022 में इंडोनेशिया के बाली में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन में जब दोनों नेता मिले थे तब उन्होंने संबंधों को स्थिर करने की आवश्यकता पर चर्चा की थी.
साल 2020 से चीन के साथ रिश्तों में है तनाव
अप्रैल 2020 में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन के अतिक्रमण को लेकर दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प की खबरें सामने आई थीं जिससे द्विपक्षीय रिश्तों में भारी तनाव आ गया. सीमा पर तनाव को कम करने के लिए भारत-चीन के अधिकारियों के बीच कई दौर की बैठके हो चुकी है.
भारत कहता रहा है कि जब तक चीन सीमा पर तनाव को कम करने के लिए कदम नहीं उठाता जब तक दोनों देशों के रिश्ते सामान्य नहीं हो सकते. हालांकि, दोनों ही देशों की सेनाएं टकराव के पांच जगहों से पीछे हट चुकी है. इनमें से कुछ जगहों पर बफर जोन बनाए गए हैं.
भारत ने अनसुलझे सीमा मुद्दों के बीच चीन के साथ अपने रिश्तों को 'असामान्य' बताया है वहीं, चीनी अधिकारियों ने अपने हालिया बयानों में ऐसा दिखाने की कोशिश की है कि दोनों देशों के रिश्ते सामान्य हो रहे हैं. अधिकारियों ने भारत से कहा है कि वो रिश्तों में सीमा के मुद्दे को एक 'उचित' स्थान पर रखे.
कौन हो सकते हैं भारत में चीन के नए राजदूत
यह भी कहा जा रहा है कि चीन इतने प्रतिष्ठित पद के लिए किसी बेहतरीन व्यक्ति की तलाश कर रहा है इसलिए उसे राजदूत नियुक्त करने में देरी हो रही है. चीन भारत में जिन लोगों को अपना राजनयिक नियुक्त कर सकता है उनमें एक नाम हुआंग जिलियन का है. जिलियन दिसंबर 2019 से फिलिपिंस के राजदूत हैं और जल्द ही उनका कार्यकाल खत्म होने वाला है.
भारत के बारे में समझ रखने वाले चीन के एक और वरिष्ठ राजनयिक हैं, जिओ कियान. कियान ऑस्ट्रेलिया में चीन के राजदूत के तौर पर काम कर रहे हैं. हालांकि, इनके नाम को लेकर संशय ज्यादा है क्योंकि जनवरी 2022 में ही उन्होंने अपना वर्तमान पद संभाला था.
हालांकि, राजदूत पद पर नियुक्ति के लिए जरूरी नहीं है कि राजनयिक को भारत के बारे में जानकारी हो. शी जिनपिंग नियुक्ति में उन अधिकारियों को ज्यादा प्राथमिकता देते हैं जिनके बारे में वो जानते हैं.
सहायक विदेश मंत्री हुआ चुनयिंग जो अभी चीन के सूचना विभाग के प्रमुख हैं, माना जा रहा है कि जल्द ही उनकी नियुक्ति किसी प्रमुख देश के राजदूत के रूप में हो सकती है.
चीन के विदेश मंत्रालय में अस्थिरता
चीन का विदेश मंत्रालय पिछले दिनों चीन के विदेश मंत्री किन गांग को पद से हटाने को लेकर सुर्खियों में था. किन सात महीनों के अपने कार्यकाल के बाद अचानक से गायब हो गए थे. गांग को पद से क्यों हटाया गया है, इसे लेकर चीन ने कोई कारण नहीं बताया.
किन गांग की जगह अब पूर्व विदेश मंत्री वांग यी को मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है. उन्हें किन गांग के गायब होने के बाद से मंत्रालय में मचे उथल-पुथल को शांत करने की भी जिम्मेदारी दी गई है.
वांग यी चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की कार्यकारी समिति पोलित ब्यूरो के सदस्य हैं और वो कम्यूनिस्ट पार्टी के विदेश मामलों के आयोग के भी प्रमुख हैं. पिछले महीने उन्होंने जोहांसबर्ग में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से और जकार्ता में विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की थी.