इससे पहले चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस अभियान की शुरुआत की थी. उन्होंने अभियान की शुरुआत करते हुए कहा था कि भोजन की बर्बादी परेशान करने वाली है.
चीनी राष्ट्रपति ने कहा, यह बेहद जरूरी है कि भोजन बर्बादी रोकने के संबंध में सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाई जाए, कम खर्च करने वाली आदतें अपनायी जाएं और एक ऐसे सामाजिक वातावरण को बढ़ावा दिया जाए जहां बर्बादी को बेहद शर्मनाक माना जाए.
सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स ने गुरुवार को इस संबंध में बताया कि चीनी राष्ट्रपति के पिछले अभियान का मकसद अधिकारियों के महंगे भोज पर रोक लगाना था, जबकि दूसरे संस्करण में लोगों से भोजन की बर्बादी रोकने की अपील की गई है.
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वहीं खाद्य संकट मामले को लेकर समाचार पत्र ने सफाई देते हुए कहा कि शुरू में इस पहल से कुछ मीडिया घरानों द्वारा ऐसी अटकलों को हवा दी गयी थी कि क्या चीन में खाद्य संकट है? विशेषज्ञों का कहना है कि पूरी दुनिया, वास्तव में भोजन की कमी का सामना कर रही है.
उन्होंने कहा कि चीन के लिए, खाद्य सुरक्षा को असली खतरा महामारी या बाढ़ से नहीं बल्कि भोजन की बर्बादी से है.
बता दें, साल 2012 में सत्ता संभालने के बाद से शी जिनपिंग ने अपनी छवि बेहतर बनाने के कई प्रयास किए हैं. जिसके तहत सेना में शराब के साथ महंगे भोजों पर प्रतिबंध लगाना भी शामिल है. इतना ही नहीं सरकारी भोजों के दौरान भोजन की बर्बादी से बचने और बचे हुए खाने के उपयोग का निर्देश दिया गया था.
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हालांकि अधिकारियों का कहना है कि वक्त जैसे-जैसे बीतता गया, पुरानी प्रथा फिर से प्रभावी हो गईं. चीन के खाद्यान्न संबंधी विभाग के उप निदेशक वू जिदान के अनुसार, देश में 32.6 अरब अमेरिकी डॉलर के भोजन की बर्बादी होती है.