अफगानिस्तान पर तालिबान को कब्जा जमाए हुए छह दिन बीत चुके हैं. राजधानी काबुल को कब्जाते ही पूरे देश में हिंसक घटनाएं शुरू हो गई हैं. तालिबानी लड़ाकों से बचते हुए लोग अपनी जान बचाने के लिए जल्द-से-जल्द अफगानिस्तान छोड़ देने के लिए एयरपोर्ट की ओर रुख कर रहे हैं. हालांकि, इन सब से बेफिक्र तालिबान का 'दोस्त' चीन उससे नजदीकी बढ़ाने में लगा हुआ है. तालिबान के समर्थन में कई तरह के बयान देने के बाद अब चीन ने अफगानिस्तान में रह रहे अपने नागरिकों के लिए एडइवाजरी जारी की है. चीन ने नागरिकों से इस्लामी रीति-रिवाजों को अपनाने के लिए कहा है.
अफगानिस्तान में चीनी दूतावास ने शनिवार को वहां के चीनी नागरिकों से इस्लामी रीति-रिवाजों को मानने के लिए कहा है और उसी के अनुसार कपड़े पहनने और सार्वजनिक स्थानों में डाइनिंग की भी बात कही है. चीन ने इन रिवाजों का सख्ती से पालन करने का आग्रह किया है. वहीं, दूतावास ने चीनी नागरिकों से काबुल एयरपोर्ट और अराजक स्थलों से दूरी बनाने के लिए कहा है. वहीं, अफगानिस्तान में अमेरिकी दूतावास ने भी काबुल एयरपोर्ट के बाहर 'संभावित सुरक्षा खतरों' की चेतावनी जारी की है. दूतावास ने कहा है कि हम अमेरिकी नागरिकों को एयरपोर्ट की यात्रा से बचने और की सलाह देते हैं.
चीन-पाक दिखा चुके हैं सकारात्मक नजरिया
तालिबान के कब्जा जमाने के बाद से ही उसके प्रति चीन और पाकिस्तान का नजरिया सकारात्मक रहा है. बीते दिनों चीन ने साफ किया था कि वह तालिबान के साथ बातचीत कर रहा है और तालिबान अब अधिक स्पष्ट और तर्कसंगत दिखाई दे रहा है. चीन ने कहा था कि उसे उम्मीद है कि तालिबान अपने किए गए वादों को पूरा करेगा, जिसमें महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा भी शामिल है.
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने उम्मीद जताई थी कि स्थिति पूरी तरह से साफ नहीं हुई है, लेकिन यह माना जा सकता है अफगान तालिबान अतीत के इतिहास को नहीं दोहराएगा और अब वह अपने पिछले शासन की तुलना में स्पष्ट और तर्कसंगत हैं. इसके बाद, तालिबान की ओर से भी चीन का समर्थन किया गया था. कट्टर संगठन के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने कहा कि चीन ने अफगानिस्तान में शांति और सुलह को बढ़ावा देने में रचनात्मक भूमिका निभाई है और देश के पुनर्निमाण में योगदान देने के लिए उसका स्वागत है. इसके साथ ही तालिबान के प्रवक्ता ने चीन को बड़ा और शक्तिशाली देश भी बताया था.
सरकार बनाने के अंतिम फेज में है तालिबान
वहीं, काबुल पर कब्जा करने के 6 दिन बाद अब तालिबान अफगानिस्तान में अपनी सरकार बनाने के अंतिम फेज में है. तालिबान का अब्दुल गनी बरादर काबुल पहुंच चुका है और सरकार के गठन को आखिरी रंग रूप दिया जा रहा है. सूत्रों के अनुसार, सरकार के गठन में तालिबान के प्रमुख हैबतुल्लाह अखुंदजादा से सरकार की दिशा और दशा तय करने के लिए कंधार में संपर्क साधा जा रहा है.
सरकार के गठन में जहां अमेरिका की पैनी नजर है, वहीं सऊदी अरब और कतर जैसे देश अफगानिस्तान की नई सरकार को लेकर पहले ही तालिबान से सलाह-मशविरा कर चुके हैं. इसके अलावा, पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी भी रविवार को काबुल जा सकते हैं. सूत्रों के अनुसार, सरकार का मुख्य चेहरा अब्दुल गनी बरादर ही होगा, जो नई सरकार में राष्ट्रपति या रईस कहलाएगा. उसके साथ-साथ मुल्ला उमर का बेटा मोहम्मद याकूब और सिराजुद्दीन हक्कानी का भाई अब्दुल हकीम हक्कानी को भी बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है.