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पाकिस्तान में इमरान खान के जाने और शहबाज शरीफ के आने से क्यों खुश है चीनी मीडिया?

चीन के ग्लोबल टाइम्स ने पाकिस्तान में सत्ता परिवर्तन को लेकर एक रिपोर्ट छापी है. अखबार का कहना है कि शहबाज शरीफ के सत्ता में आने से पाकिस्तान-चीन के संबंध पहले से बेहतर होंगे. अखबार ने ये भी कहा है कि इमरान खान और पाकिस्तानी सेना के संबंध बेहतर नहीं थे. इमरान की सत्ता जाने का एक बड़ा कारण ये भी है.

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शाहबाज शरीफ पाकिस्तान के अगले पीएम बनने वाले हैं (Photo- Reuters)
शाहबाज शरीफ पाकिस्तान के अगले पीएम बनने वाले हैं (Photo- Reuters)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • शहबाज शरीफ बनने वाले हैं पाकिस्तान के नए पीएम
  • चीनी मीडिया ने जताई उम्मीदें
  • कहा- चीन-पाकिस्तान संबंध और बेहतर होंगे

पाकिस्तान में शनिवार देर रात इमरान खान की सरकार गिर गई. उनके प्रतिद्वंद्वी शहबाज शरीफ का पाकिस्तान का अगला प्रधानमंत्री बनना तय माना जा रहा है. पाकिस्तान की सियासत में इस बदलाव से चीन का आधिकारिक मीडिया काफी खुश नजर आ रहा है. चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र माने जाने वाले ग्लोबल टाइम्स ने शहबाज शरीफ के प्रधानमंत्री बनने की खबरों पर लिखा है कि इससे चीन-पाकिस्तान के रिश्ते इमरान खान सरकार की अपेक्षा और बेहतर हो सकते हैं.

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शहबाज शरीफ पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के छोटे भाई हैं. पाकिस्तान का नया प्रधानमंत्री चुनने के लिए पाकिस्तान की संसद का सत्र 2 बजे से शुरू होगा. ग्लोबल टाइम्स ने भी लिखा है कि शहबाज शरीफ का पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनना तय है.

ग्लोबल टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा, 'चीनी और पाकिस्तानी विश्लेषकों का मानना ​​​​है कि पाकिस्तान में राजनीतिक परिवर्तन से चीन-पाकिस्तान के संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि पाकिस्तान में सभी दलों और लोगों में द्विपक्षीय संबंधों को सुरक्षित रखने और उसे आगे बढ़ाने में संयुक्त सहमति है.'

ग्लोबल टाइम्स ने आगे लिखा कि पाकिस्तान की पारंपरिक दलों के शासन के वक्त पाकिस्तान-चीन के संबंध बेहतर थे. रिपोर्ट में लिखा गया, 'इमरान खान के संभावित उत्तराधिकारी शरीफ परिवार से हैं. ये परिवार लंबे समय से चीन-पाकिस्तान रिश्तों को बढ़ावा देता आया है. शहबाज शरीफ के आने से दोनों देशों को संबंध इमरान खान शासन के मुकाबले और भी बेहतर हो सकते हैं.'

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चीन ने पाकिस्तान में अपना 60 अरब डॉलर का चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC)नवाज शरीफ सरकार के समय ही शुरू किया था. इमरान खान जब विपक्ष में थे तब वो CPEC के बड़े आलोचक थे. चीन को इस बात से आपत्ति थी. हालांकि, साल 2018 में इमरान खान ने पद संभालने के बाद इस परियोजना का समर्थन किया था.

ग्लोबल टाइम्स ने इमरान खान की सरकार गिरने के पीछे के कारणों का विश्लेषण भी किया है. शिन्हुआ विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय रणनीति संस्थान में अनुसंधान विभाग के निदेशक कियान फेंग के हवाले से ग्लोबल टाइम्स ने लिखा, 'पाकिस्तान में राजनीतिक दलों का आपसी संघर्ष, अर्थव्यवस्था और बेरोजगारी जैसे मुद्दों के कारण हालिया सत्ता परिवर्तन हुआ है.'

कियान का कहना है कि पाकिस्तान की सरकार COVID-19 महामारी से उपजी गंभीर स्थिति को ठीक से संभालने में विफल रही. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की मौजूदा आंतरिक समस्याओं का चीन संबंधों से कोई लेना-देना नहीं है इसलिए पाकिस्तान की सत्ता परिवर्तन का दोनों देशों के संबंधों पर कोई असर नहीं होगा.'

कियान ने ग्लोबल टाइम्स से कहा, 'खान एक नए उभरते हुए राजनीतिक दल से हैं. और जब पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) या पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) जैसे पारंपरिक राजनीतिक दल सत्ता में लौटते हैं, तो चीन-पाकिस्तान सहयोग और भी बेहतर हो सकता है क्योंकि इन पारंपरिक दलों के संबंध चीन के साथ बहुत घनिष्ठ रहे हैं.'

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ग्लोबल टाइम्स ने अपने लेख में लिखा कि पाकिस्तान की शक्तिशाली सेना के साथ भी इमरान खान के संबंध ठीक नहीं थे और उनकी सत्ता जाने के पीछे एक कारण ये भी है.

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा, 'कुछ लोगों का कहना है कि पाकिस्तानी सेना को इमरान खान का कूटनीतिक रुख पसंद नहीं है. सेना का मानना है कि इससे पाकिस्तान की तटस्थता प्रभावित हुई है और दुनिया की महाशक्तियों के साथ अनावश्यक टकराव हुआ है. पाकिस्तान की सेना के रिश्ते अमेरिका से अच्छे रहे हैं.'

कियान ने कहा, 'ये एक और कारण है कि इमरान खान को हटा दिया गया था. लेकिन हमें ये भी याद रखने की जरूरत है कि पाकिस्तानी सेना भी चीन के साथ संबंधों को बहुत महत्व देती है.' 

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