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दूसरों को धमकाने वाला चीन अब रूस-यूक्रेन में 'दोस्ती' करवाएगा ! क्या है जिनपिंग का 12 प्वाइंट का पीस प्लान

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग तीन दिन के रूस दौरे पर हैं. उनके इस दौरे का मकसद रूस और यूक्रेन में चल रही जंग का समाधान करना है. चीन ने बीते महीने 12 प्वॉइंट का पीस प्लान जारी किया था. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी कह चुके हैं कि वो इस पर चर्चा करेंगे. ऐसे में समझना जरूरी है कि चीन का ये पीस प्लान क्या है? और जिनपिंग ऐसा क्यों करना चाहते हैं?

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यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन. (फाइल फोटो-AP/PTI)
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन. (फाइल फोटो-AP/PTI)

भारतीय सरजमीं में जबरन घुसपैठ और ताइवान को युद्ध की धमकी देने वाला चीन अब 'शांति' की बात कर रहा है. 

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दरअसल, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग तीन के दिन के दौरे पर मॉस्को में हैं. सोमवार को उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की. दोनों के बीच करीब साढ़े चार घंटे तक बातचीत हुई. बैठक का एजेंडा 'यूक्रेन' था. 

दोनों के बीच आज फिर मुलाकात होनी है. इस मीटिंग में एक बार फिर उसी शांति समझौते पर चर्चा हो सकती है, जिसे चीन ने बनाया है. चीन ने पिछले महीने 12 प्वॉइंट का 'पीस प्लान' तैयार किया था. 

मॉस्को के लिए निकलने से पहले जिनपिंग ने कहा था, यूक्रेन जंग को खत्म करने के लिए उनका पीस प्लान सभी पक्षों की चिंताओं को दूर करता है. 

न्यूज एजेंसी के मुताबिक, रूस के राष्ट्रपति भवन (क्रेमलिन) ने बताया कि पुतिन और जिनपिंग के बीच पीस प्लान पर भी चर्चा हुई. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने बताया कि दोनों नेताओं ने यूक्रेन के साथ युद्धविराम के लिए बनाए चीन के पीस प्लान पर चर्चा की. हालांकि, उन्होंने इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी. राष्ट्रपति पुतिन ने भी कहा कि उन्होंने चीन के प्लान को अच्छे से देखा है और वो इस पर जिनपिंग के साथ चर्चा करेंगे.

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रूस और यूक्रेन की जंग को तकरीबन 13 महीने हो चुके हैं. और जंग अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है. रूस के राष्ट्रपति पुतिन झुकने को तैयार नहीं हैं, तो यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की भी जिद पर अड़े हैं. ऐसे में अब दोनों देशों में शांति समझौता करवाने के लिए चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग आगे आए हैं.

चीन के हौंसले इस समय इसलिए भी बुलंद है क्योंकि वो हाल ही में सऊदी अरब और ईरान की दोस्ती करवाने में कामयाब हुआ है. सात साल से सऊदी अरब और ईरान के रिश्तों में खटास थी, लेकिन चीन की मध्यस्थता के बाद दोनों देशों के बीच अब फिर से राजनयिक संबंध स्थापित हो गए हैं.

सऊदी अरब और ईरान के बाद चीन अब रूस और यूक्रेन में भी पहले जैसी दोस्ती करवाने की कोशिश कर रहा है. रूस और यूक्रेन की जंग को एक साल पूरा होने पर चीन ने 12 प्वॉइंट का 'पीस प्लान' पेश किया था.

पुतिन और जिनपिंग 10 साल में 40 से ज्यादा बार मिल चुके हैं. (फाइल फोटो)

क्या है वो पीस प्लान?

1. सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान करनाः अंतरराष्ट्रीय कानून का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए. सभी देशों की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता को बरकरार रखा जाना चाहिए. सभी देश- बड़े या छोटे, मजबूत या कमजोर, अमीर या गरीब... अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समान सदस्य हैं. सभी देशों को अंतरराष्ट्रीय संबंधों को नियंत्रित करने वाले बुनियादी मानदंडों को बनाए रखना चाहिए, जबकि डबल स्टैंडर्ड को खारिज किया जाना चाहिए.

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2. कोल्ड वॉर की मानसिकता से निकलेंः किसी देश की सुरक्षा दूसरे की कीमत पर नहीं होनी चाहिए. सेना को बढ़ाकर एक क्षेत्र की सुरक्षा हासिल नहीं की जानी चाहिए. सभी देशों के सुरक्षा हितों और चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए. जटिल समस्या का कोई सरल समाधान नहीं है. सभी पक्षों को दूसरों की सुरक्षा की कीमत पर अपनी सुरक्षा की तलाश का विरोध करना चाहिए. सैन्य टकराव को रोकना चाहिए और शांति और स्थिरता के लिए मिलकर काम करना चाहिए.

3. दुश्मनी को रोकनाः संघर्ष और युद्ध से किसी का भला नहीं होता. सभी को संयम बरतना चाहिए. आग की लपटों और बढ़ते तनाव से बचना चाहिए. संकट को और बिगड़ने या नियंत्रण से बाहर होने से रोकना चाहिए. सभी पक्षों को जल्द से जल्द सीधी बातचीत फिर से शुरू करने में रूस और यूक्रेन का समर्थन करना चाहिए, ताकि तनाव को धीरे-धीरे कम किया जा सके और आखिरकार एक व्यापक युद्धविराम तक पहुंचा जा सके.

4. शांति वार्ता फिर से शुरू करनाः बातचीत ही यूक्रेन संकट एकमात्र समाधान है. इस संकट के शांतिपूर्ण समाधान के लिए सभी प्रयासों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. इस संघर्ष में शामिल पक्षों को जल्द से जल्द राजनीतिक समाधान के लिए अपने दरवाजे खोलना चाहिए. चीन भी इसमें रचनात्मक भूमिका निभाता रहेगा.

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5. मानवीय संकट का समाधानः नागरिकों की सुरक्षा को प्रभावी ढंग से संरक्षित किया जाना चाहिए. संघर्ष के इलाकों से नागरिकों को निकालने के लिए ह्यूमन कॉरिडोर बनाए जाने चाहिए. बड़े पैमाने पर मानवीय संकट को रोकने के लिए मानवीय सहायता बढ़ाने, मानवीय स्थितियों में सुधार करने और बगैर रोक-टोक के मानवीय पहुंच मुहैया कराने की जरूरत है. मानवीय सहायता पहुंचाने की भूमिका में संयुक्त राष्ट्र का समर्थन किया जाना चाहिए.

6. नागरिकों और युद्धबंदियों की सुरक्षाः संघर्ष में शामिल देशों को अंतरारष्ट्रीय कानून का कड़ाई से पालन करना चाहिए. नागरिकों और नागरिक सुविधाओं पर हमला करने से बचना चाहिए. महिलाओं, बच्चों और संघर्ष से पीड़ितों की रक्षा करनी चाहिए और युद्धबंदियों के मूल अधिकारों का सम्मान करना चाहिए. चीन रूस और यूक्रेन के बीच युद्धबंदियों के आदान-प्रदान का समर्थन करता है.

तस्वीर यूक्रेन जंग शुरू होने से पहले की है. तब पुतिन चीन दौरे पर गए थे. (फाइल फोटो-AP/PTI)

7. न्यूक्लियर पावर प्लांट को सुरक्षित रखनाः चीन न्यूक्लियर पावर प्लांट या दूसरी न्यूक्लियर फैसिलिटीज पर हमलों का विरोध करता है. और सभी पक्षों से परमाणु सुरक्षा पर कन्वेंशन सहित अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने और मानव निर्मित परमाणु दुर्घटनाओं से बचने का आह्वान करता है. चीन परमाणु सुविधाओं की सुरक्षा में भूमिका निभाने में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी का समर्थन करता है.

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8. रणनीतिक जोखिमों को कम करनाः परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए और न ही परमाणु युद्ध लड़े जाने चाहिए. परमाणु हथियारों के उपयोग का विरोध किया जाना चाहिए. परमाणु प्रसार को रोका जाना चाहिए और परमाणु संकट से बचा जाना चाहिए. चीन किसी भी देश की ओर से किसी भी परिस्थिति में रासायनिक और जैविक हथियारों के विकास और उपयोग का विरोध करता है.

9. अनाजों का आसानी से निर्यातः सभी पक्षों को रूस, तुर्की, यूक्रेन और संयुक्त राष्ट्र के हस्ताक्षर किए गए 'ब्लैक सी ग्रेन इनिशिएटिव' को प्रभावी ढंग से लागू करने की जरूरत है. चीन ने ग्लोबल फूड सिक्योरिटी की पहल की है जो ग्लोबल फूड क्राइसिस का समाधान करती है.

10. एकतरफा प्रतिबंधों को रोकनाः एकतरफा प्रतिबंध और दबाव से समस्या का समाधान नहीं हो सकता, बल्कि इससे और नई समस्या पैदा हो सकती है. संयुक्त राष्ट्र ने जो एकतरफा प्रतिबंध लगाए हैं, चीन उसका विरोध करता है. देशों के खिलाफ एकतरफा प्रतिबंधों का दुरुपयोग बंद होना चाहिए, ताकि यूक्रेन संकट को कम करने में भूमिका निभाई जा सके. साथ ही विकासशील देशों के लिए अपनी अर्थव्यवस्था को विकसित करने और अपने लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए स्थितियां बनाई जा सकें.

11. इंडस्ट्रियल और सप्लाई चेन को स्थिर रखनाः सभी पक्षों को ईमानदारी से मौजूदा वर्ल्ड इकोनॉमिक सिस्टम को बनाए रखना चाहिए और वर्ल्ड इकोनॉमी को अपनी राजनीतिक मकसदों के लिए एक उपकरण या हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का विरोध करना चाहिए. 

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12. रिकंस्ट्रक्शन को बढ़ावा देनाः अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संघर्ष के बाद रिकंस्ट्रक्शन का समर्थन करने के लिए उपाय करने की जरूरत है. चीन इसमें मदद करने और भूमिका निभाने के लिए तैयार है.

पुतिन के खिलाफ इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट ने हाल ही में अरेस्ट वारंट जारी किया है. (फाइल फोटो-AP/PTI)

पर चीन क्यों 'शांति' कराना चाहता है?

- सऊदी अरब और ईरान के बीच दोस्ती कराने के बाद चीन अब रूस और यूक्रेन की दोस्ती कराना चाहता है. एक्सपर्ट का मानना है कि इस पीस प्लान के जरिए चीन खुद को 'जिम्मेदार महान शक्ति' के रूप में दिखाने की कोशिश कर रहा है.

- हॉन्गकॉन्ग स्थित सिटी यूनिवर्सिटी में लॉ प्रोफेसर वांग जिआंग्यु ने न्यूज एजेंसी से कहा, 'जिनपिंग वैश्विक मंच पर एक ऐसे राजनेता के रूप में दिखना चाहते हैं, जिसका रूतबा कम से कम अमेरिकी नेता के बराबर हो.'

- इतना ही नहीं, अगर चीन की वजह दोनों देशों के बीच जंग रूक जाती है तो इससे जिनपिंग को अपनी छवि सुधारने का मौका भी मिलेगा. जिनपिंग ने कभी भी यूक्रेन पर रूसी हमले की निंदा नहीं की है, उल्टा रूस के साथ उसके संबंध और गहरे हुए हैं. ऐसे में अगर दोनों के बीच जंग रुकवाने में चीन का हाथ होता है, तो जिनपिंग की छवि सुधर सकती है.

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- इतना ही नहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का ये पीस प्लान उसके लिए कम लागत में ज्यादा रिटर्न देने वाला है. 

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की भी जिद पर अड़े हैं. (फाइल फोटो- AP/PTI)

क्या यूक्रेन इसे मानेगा?

- यूक्रेन कह तो चुका है कि इस जंग को खत्म करने के लिए चीन को रूस पर दबाव बनाना चाहिए. जिनपिंग के मॉस्को दौरे से पहले चीन के विदेश मंत्री किन गांग ने यूक्रेनी विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा से फोन पर बात की थी. दोनों के बीच पीस प्लान पर ही चर्चा हुई थी.  

- माना जा रहा है कि अपने पीस प्लान के लिए जिनपिंग यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से भी चर्चा करना चाहते हैं. हालांकि, यूक्रेन भी इस पीस प्लान को मानेगा, इसे लेकर थोड़ा संदेह भी जताया जा रहा है. वो इसलिए क्योंकि यूक्रेन अमेरिका और यूरोपीय देशों के ज्यादा करीब है, जो चीन के विरोधी हैं. और यूक्रेन की सहमति के बिना ये शांति समझौता हो नहीं सकता.

लेकिन नहीं माना तो क्या होगा?

- क्या होगा अगर शांति समझौता अमल में नहीं आया और रूस-यूक्रेन की जंग में से कोई एक जीत गया? अगर रूस और यूक्रेन में कोई एक भी जीतता है तो इसके भी गंभीर नतीजे हो सकते हैं.

- बीजिंग स्थित एक विशेषज्ञ एइनर तांगेन ने न्यूज एजेंसी को बताया कि अगर इस युद्ध में रूस जीतता है तो उसे यूक्रेन के पश्चिमी क्षेत्रों में मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा, जिससे उसके संसाधनों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा और पुतिन को भी खुद के देश में आलोचनाओं का सामना करना पड़ेगा.

- तांगेन ने बताया कि अगर इस जंग में यूक्रेन जीत जाता है तो फिर परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का खतरा बढ़ जाएगा. इससे ऐसे हालत बनेंगे, जिसके बारे में किसी ने सोचा भी नहीं होगा.

 

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