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क्या कोरोना पर बेसर चीनी वैक्सीन? पहली बार 'ड्रैगन' अपने नागरिकों को लगाएगा विदेशी टीका, जर्मनी ने भेजी खेप

चीन इस समय सबसे बड़ी कोरोना की लहर का सामना कर रहा है. दावा किया जा रहा है कि चीन में आने वाले कुछ महीनों में कोरोना से 80 करोड़ लोग संक्रमित हो सकते हैं. हैरानी की बात यह है कि बड़े पैमाने पर कोरोना की वैक्सीन लगाने के बाद भी लोग संक्रमित हो रहे हैं. ऐसे में चीन अब अपने नागरिकों को कोरोना की विदेशी वैक्सीन लगाने जा रहा है.

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चीन में अगले तीन महीने में आ सकती हैं कोरोना की तीन लहरें (फाइल फोटो)
चीन में अगले तीन महीने में आ सकती हैं कोरोना की तीन लहरें (फाइल फोटो)

चीन में ओमिक्रॉन का सबवेरिएंट BF.7 कहर बरपा रहा है. यहां जल्द ही कोरोना की कई लहरें आने वाली हैं. दावा किया जा रहा है कि यहां करीब 80 करोड़ लोग संक्रमित हो सकते हैं. इस बीच चीन ने कोरोना से मुकाबला करने के लिए पहली बार अपने नागरिकों पर विदेशी वैक्सीन की डोज देने का फैसला किया है. 

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जर्मन सरकार के एक प्रवक्ता ने बुधवार को बताया कि बर्लिन ने बायोएनटेक (22UAy.DE) COVID-19 टीकों की अपनी पहली खेप चीन भेज दी है. सबसे पहले यह वैक्सीन चीन में रह रहे जर्मन प्रवासियों को दी जाएगी. 

चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, अब तक 60 साल से ऊपर की 87% आबादी पूरी तरह वैक्सीनेट हो चुकी है, लेकिन 80 साल से ज्यादा उम्र के सिर्फ 66.4% बुजुर्गों को ही वैक्सीन लगी है. अनुमान लगाया जा रहा है कि राजधानी बीजिंग की 70 फीसदी आबादी इस वायरस की चपेट में आ चुकी है.

तीन महीने में तीन लहरों की आशंका

चीन के महामारी विशेषज्ञ वू जुन्यो ने अगले तीन महीने में तीन लहरों के आने की आशंका जताई है. उन्होंने दावा किया कि चीन अभी पहली लहर का सामना कर रहा है और इसका पीक मिड-जनवरी में आ सकता है. 

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उन्होंने कहा कि 21 जनवरी से चीन का लूनार न्यू ईयर के दौरान लोग ट्रैवल करेंगे, जिस कारण दूसरी लहर शुरू होगी. जनवरी के आखिर से दूसरी लहर शुरू हो सकती है जो मिड-फरवरी तक चलेगी. 

वहीं तीसरी लहर फरवरी के आखिर से शुरू हो सकती है. हॉलीडे के बाद लोग फिर से ट्रैवल करेंगे और इस कारण तीसरी लहर शुरू हो सकती है. तीसरी लहर फरवरी के आखिर से मिड-मार्च तक चल सकती है.

उन्होंने यह भी कहा कि तीन लहरें तो आ सकती हैं, लेकिन इस दौरान संक्रमण के मामलों में कमी आने की आशंका कम है. उनका दावा है कि लहरों के बीच में भी संक्रमण बढ़ता रहेगा.

ये दो वायरस चीन में बरसा रहे कहर

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि चीन के शहरों में कोरोना संक्रमण बढ़ने की वजह ओमिक्रॉन है. उनका कहना है कि ओमिक्रॉन के दो सब-वैरिएंट्स BA.5.2 और BF.7 तेजी से फैल रहे हैं. राजधानी बीजिंग BF.7 की चपेट में है. WHO ने BF.7 को सबसे तेजी से फैलने वाला वायरस बताया है. इस वैरिएंट की वजह से बीजिंग में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है, क्योंकि हजारों लोग फीवर क्लीनिक के बाहर खड़े हैं, जिन्हें तुरंत इलाज की जरूरत है.

21 लाख तक हो सकती हैं मौतें

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लंदन की ग्लोबल हेल्थ इंटेलिजेंस कंपनी एयरफिनिटी ने कहा कि चीन में जीरो कोविड पॉलिसी खत्म होने के बाद 21 लाख मौतें हो सकती हैं. एयरफिनिटी ने बताया कि चीन में कम वैक्सीनेशन और एंटीबॉडीज में कमी के चलते ये मौतें होंगी. हालांकि एनपीआर की रिपोर्ट के मुताबिक चीन में कोरोना से मरने वालों की संख्या 5 लाख हो सकती है.

सिरदर्द की दवा का कोटा फिक्स

कोरोना के बढ़ते मामलों के बाद चीन में बुखार, सिरदर्द और बदन दर्द को दूर में काम आने वाली आईबुप्रोफेन (ibuprofen) की मामूली गोली भी नहीं मिल रही है. चीन में ऐसे हालात हो गए कि अब Ibuprofen टैबलेट का कोटा फिक्स कर दिया गया है. एक व्यक्ति दवा दुकान में एक निश्चित सीमा से ज्यादा आईबुप्रोफेन के टैबलेट नहीं खरीद सकता है.

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स के अनुसार पूर्वी चीन के जियांग्सू राज्य की राजधानी नानजिंग में आईबुप्रोफेन की किल्लत दूर करने के लिए स्थानीय प्रशासन रोजाना 20 लाख गोलियां मार्केट में उतारने जा रहा है. ये दवा सोमवार से मिलनी शुरू हो गई है. लेकिन आईबुप्रोफेन टैबलेट की किल्लत को इसी बात से समझा जा सकता है कि यहां एक ग्राहक को इस दवा के 6 टैबलेट ही दिए जाएंगे.  

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