बांग्लादेश में चल रहे राजनीतिक संकट और असमंजस की स्थिति में जनता के मन में कई सवाल खड़े हो रहे हैं. सवाल है कि आखिरकार मुल्क के हालात सामान्य कब होंगे. आजतक लगातार ग्राउंड जीरो से रिपोर्ट कर रहा है. ढाका में लोगों की जिंदगी सामान्य होने की ओर बढ़ रही है लेकिन रफ्तार सुस्त है. पिछले 48 घंटे में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले की घटना भी सुनाई नहीं दी है, लेकिन 5 तारीख के बाद मिले जख्मों पर अभी तक मरहम भी नहीं लगा है.
वहीं बांग्लादेश के मुसलमान के मन में भी आशंका है की कहानी लोकतंत्र से चलने वाला उनका देश कट्टरपंथियों के दबाव में बांग्ला बोलने वाले देश की पहचान मतकर एक इस्लामिक देश ना बन जाए. ढाका के रहने वाले इस्लाम मोहम्मद ने आजतक से बातचीत करते हुए बताया कि बांग्लादेश की पहचान बांग्ला लोगों की है जहां हिंदू और मुसलमान साथ हैं, लेकिन कुछ लोग चाहते हैं कि यहां इस्लामिक देश जैसी व्यवस्था हो जाए लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे.
नियाज भी ढाका में कारोबार चलाते हैं और उन्हें भी लगता है कुछ कट्टरपंथियों की वजह से बांग्लादेश की छवि खराब हुई है, जिन्होंने आंदोलन की आड़ में हिंदुओं पर हमले किए और उन्हें निशाना बनाया. नियाज कहते हैं की बहुत सारे हिंदू हमारे साथ रहते हैं और इस मुश्किल में हम उनकी हिफाजत भी कर रहे हैं और जिन लोगों ने उनके साथ बुरा किया वह हमारे बीच के लोग नहीं हैं. ढाका के सबसे वीआईपी इलाके में राष्ट्रपति भवन से महज़ कुछ दूरी पर ही बांग्लादेश अवामी लीग पार्टी के हेड क्वार्टर को भी प्रदर्शनकारियों ने 5 अगस्त को सबसे पहले निशाना बनाया था.
आक्रोश भले ही शांत हो गया है, लेकिन हिंसा और आगजनी के निशान आज भी ताजा हैं. पार्टी के समर्थक करीम उल हक ने आजतक को बताया कि उस दिन हुडदंगियों ने न सिर्फ हिंसा की ओर दफ्तर को तोड़ा बल्कि लाखों रुपये का सामान भी लूट कर ले गए. पार्टी की मुखिया शेख हसीना के कमरे से लेकर के पार्टी के मीटिंग हॉल बैठक और बिल्डिंग के तमाम हिस्सों को या तो जला दिया गया है या तोड़फोड़ दिया गया है.
इसी स्थिति के बीच बांग्लादेश के सड़कों से पुलिस नदारद है. शहर के बीचों-बीच पुलिस हेड क्वार्टर भी वीरान है जिसकी हिफाजत अब बांग्लादेश की सेना कर रही है. प्रदर्शन के दौरान पुलिस कर्मियों पर पत्थर बाजी हुई तो पुलिस हेडक्वार्टर को भी निशाना बनाया गया जिसके निशान ताजा है. टूटे-फूटे वीरान सुनसान पड़े हेड क्वार्टर के बाहर रविवार को कुछ पुलिसकर्मी प्रदर्शन करने आए थे जो अपनी नौकरी पर फिर से जाना चाहते हैं.
इन पुलिस कर्मियों में से एक करीम ने आजतक को बताया कि प्रदर्शन कार्यों पर कड़ी कार्यवाही करने का आदेश शेख हसीना की सरकार और सरकार में पुलिस विभाग में बैठ बड़े अधिकारियों का था. करीम ने कहा कि पुलिस कर्मियों ने अपने अधिकारियों का आदेश माना था और इस आदेश के चलते आज देश की जनता पुलिसकर्मियों को खोज रही है जिसकी वजह से तमाम पुलिस कर्मी या तो अंडरग्राउंड है या तो छुपे हुए हैं. आपको यह भी बता दें कि पूरे बांग्लादेश में कई इलाकों में पुलिस स्टेशनों को जला दिया गया था.
इसी वीआईपी इलाके के आसपास कई सारे टेलीविजन न्यूज़ चैनल के हेड क्वार्टर भी हैं, जो प्रदर्शन के दौरान आग की चपेट में आ गए. इस आंदोलन के दौरान उन मुसलमानों को भी निशाना बनाया गया जिन्होंने हिंदुओं को शरण दी थी. फेनी जिले के रहने वाले सैफुल इस्लाम पटवारी ने बताया की हिंसा के दौरान कई हिंदुओं को उन्होंने अपने घर में शरण दी थी जिसके बाद, गांव में ही रहने वाले कुछ उपद्रवी तत्वों ने उनकी गाड़ी जला दी घर में तोड़फोड़ की और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया. सैफुल फिलहाल अपना गांव छोड़कर ढाका आ गए हैं और उनके परिवार भी अब अकेले रह रहा है तो वहीं जिन हिंदुओं को उन्होंने अपने घर में शरण दी थी वह भी गांव छोड़कर दूसरे सुरक्षित इलाकों की ओर चले गए हैं.
बांग्लादेश की संसद भी वीरान है और संसद के बाहर तोड़फोड़ के निशान ताजा हैं. फिलहाल बांग्लादेश की सेवा और नेवी की एक टुकड़ी संसद भवन की सुरक्षा कर रही है तो वहीं इस प्रदर्शन के दौरान शामिल रहे छात्र संगठनों के कार्यकर्ता देश का झंडा सर पर बढ़े संसद के बाहर शैक्षिक रूप से सुरक्षा व्यवस्था में जुटे हुए हैं ताकि फिर से लोग संसद भवन के भीतर न जा सकें और फिर वह तस्वीर दुनिया के सामने ना आए जिसे बांग्लादेश के लोकतंत्र को शर्मिंदा किया था.
आवामी लीग पार्टी के नेताओं के साथ करीबी रिश्ते रखने वाले पत्रकारों को भी बांग्लादेश में धमकियां मिल रही है. अवामी लीग कर करने वाले पत्रकार जाहिद ने बताया कि ऐसे कई सारे पत्रकार हैं जिन्हें धमकी मिल रही है और सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ अभद्र लिखा जा रहा है. वहीं अवामी लीग पार्टी के कई नेता भी भूमिगत हो गए हैं, जिनके बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आ रही है.
इसी स्थिति में अंडरग्राउंड रहने वाले अवामी लीग के नेता ने नाम और पहचान छुपाने की तर्ज पर आज तक से कहा कि बीएनपी और दूसरी विपक्षी पार्टियों ने ही इस आंदोलन को सुलगाया था और शेख हसीना एक बार फिर बांग्लादेश लौटेंगी. अवामी लीग कैसे नेता ने कहा कि मौजूदा स्थिति में उनके परिवार के लिए जिंदगी पहले की तरह उनके लिए सामान्य नहीं है इसलिए उनके जैसे कई नेता यहां वहां चुप रहे हैं क्योंकि उनकी जान पर खतरा है. बांग्लादेश की कमान फिलहाल एक अंतरिम सरकार के हाथ में है लेकिन देश की जिम्मेदारी सेना और युवा छात्रों ने संभाल रखी है. बांग्लादेश के लोगों को भी अनिश्चित के बादल दिखाई दे रहे हैं लेकिन उम्मीद भी है कि जल्दी सब ठीक हो जाएगा.