अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के तमाम देशों के लिए टैरिफ का ऐलान कर दिया है. ट्रंप ने इसे डिस्काउंटेड रेसिप्रोकल टैरिफ का नाम दिया है. टैरिफ की घोषणा करते हुए ट्रंप ने कहा यह मुक्ति दिवस है, जिसका अमेरिका लंबे समय से इंतजार कर रहा था. ट्रंप ने भारत पर 26 फीसदी टैरिफ लगाया है. ट्रंप ने अपने संबोधन में पीएम नरेंद्र मोदी के अमेरिका के दौरे का भी जिक्र किया.
भारत को लेकर ट्रंप ने क्या कहा?
अमेरिका ने भारत पर 26 फीसदी डिस्काउंटेड रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, 'भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल में ही अमेरिका आए थे. वह मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं. लेकिन, इस दौरे के दौरान मैंने प्रधानमंत्री मोदी को कहा कि आप हमारे साथ सही व्यवहार नहीं कर रहे हैं. भारत हमेशा अमेरिका से 52 फीसदी टैरिफ वसूलता है. इसलिए हम उनसे आधा 26 फीसदी टैरिफ लेंगे'.
टैरिफ का क्या असर पड़ेगा?
भारत डिस्काउंटेड रेसिप्रोकल टैरिफ से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में से एक है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, कुछ भारतीय निर्यातों को उच्च आयात शुल्क का सामना करना पड़ सकता है.
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SBI की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत को इस टैरिफ से बहुत अधिक नुकसान नहीं होगा. भारत के निर्यात में 3-3.5% तक गिरावट हो सकती है. निर्माण और सेवा क्षेत्र में बढ़ते निर्यात से असर कम होगा. यूरोप-मध्य पूर्व-अमेरिका के जरिए नए व्यापार मार्ग तैयार किए जा रहे हैं. भारत ने अपने निर्यात मिश्रण को विविध बनाया है.
डिस्काउंटेड रेसिप्रोकल टैरिफ की घोषणा के पहले वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल इस महीने के शुरुआत में वाशिंगटन गए थे. जहां उन्होंने द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर चर्चा की, जिसमें इन शुल्कों से छूट मांगी गई थी.
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एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस टैरिफ का सबसे बुरा असर कपड़ा उद्योग, परिधान (Apparel Sector) और ज्वेलरी सेक्टर पर हो सकता है. 2023-24 में भारत से लगभग 36 अरब डॉलर (करीब 3 लाख करोड़ रुपये) के कपड़ा निर्यात में अमेरिका की 28% की भागीदारी रही, जो लगभग 10 अरब डॉलर (करीब 85,600 करोड़ रुपये) है. साल दर साल, इस क्षेत्र में अमेरिका के साथ भारतीय व्यापार में बढ़ोतरी देखी गई है. 2016-17 और 2017-18 में अमेरिका का कपड़ा उद्योग में कुल निर्यात का हिस्सा 21% था, जो 2019-20 में 25% और 2022-23 में 29% तक पहुंच गया.
दोनों देश वर्ष के अंत तक एक व्यापार समझौता करने का लक्ष्य बना रहे हैं, और 2030 तक 500 बिलियन अमेरिकी डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लॉन्ग टर्म लक्ष्य रखा गया है.
भारत एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था है जिसकी बिजनेस पॉलिसी लगातार विकसित हो रही हैं. डिस्काउंटेड रेसिप्रोकल टैरिफ भारत को अपनी व्यापारिक नीतियों को बैलेंस करने में मदद कर सकता है. इस सिस्टम के माध्यम से भारत उन देशों पर शुल्क लगा सकता है जो भारतीय निर्यात पर उच्च टैरिफ लगाते हैं. इससे भारतीय उत्पादों की कॉम्पिटिटिव पावर बढ़ेगी और स्थानीय इंडस्ट्री को समर्थन मिलेगा. बढ़ते शुल्क के कारण आयात किए गए वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे उपभोक्ताओं पर बोझ पड़ सकता है.