अमेरिका की एक अदालत ने 2024 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए डोनाल्ड ट्रंप को अयोग्य घोषित कर दिया है. इसे रिपब्लिकन पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है. ऐसे में भारतीय मूल के अमेरिकी दावेदार ट्रंप के समर्थन में उतर आए हैं. राष्ट्रपति चुनाव के लिए रिपब्लिकन पार्टी के दावेदारों में शामिल निक्की हेली और विवेक रामास्वामी ने इस फेसले का विरोध किया है.
यह फैसला अमेरिका में कैपिटल हिल हिंसा में डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों की भूमिका को देखते हुए कोलोराडो सुप्रीम कोर्ट ने दिया है. ट्रंप (77) को अयोग्य ठहराने का यह फैसला संविधान के 14वें संशोधन पर आधारित हैं, जिसमें कहा गया है कि अमेरिकी संविधान को आधार बनाकर शपथ लेने वाले अधिकारियों को भविष्य में किसी भी तरह के संवैधानिक पद पर आसीन होने से प्रतिबंधित किया जाता है, जिनकी उपद्रव में भूमिका रही है.
बता दें कि मौजूदा समय में ट्रंप 2024 चुनाव की दौड़ में रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के प्रमुख दावेदार हैं. अदालत के इस फैसले पर निक्की हेली ने कहा कि हम आखिरी चीज यही चाहते हैं कि जज फैसला करें कि राष्ट्रपति चुनाव कौन लड़ता है या कौन नहीं लड़ सकता. मुझे नहीं लगता कि ट्रंप को राष्ट्रपति बनने की जरूरत है. मुझे राष्ट्रपति बनना है. यही देश के लिए सही होगा. लेकिन मैं उन्हें सही तरीके से हराऊंगा. हम नहीं चाहते कि ट्रंप को राष्ट्रपति की दौड़ से जज बाहर करें, हम उन्हें हराकर इस दौड़ से बाहर करेंगे. हम चाहते हैं कि मतदाता ये फैसला करें.
हेली ने कहा कि हम सही तरीके से यह मुकाबला जीतेंगे. हमें इसके लिए जो करना होगा, करेंगे लेकिन विडंबना ये है कि जज हमें बता रहे हैं कि कौन चुनाव लड़ेगा और कौन नहीं.
विवेक रामास्वामी क्या बोले?
इस बीच रामास्वामी ने कहा कि जब तक 2024 राष्ट्रपति चुनाव के लिए ट्रंप की अयोग्यता बहाल नहीं की जाती. वह कोलोराडो रिपब्लिकन प्राइमरी के चुनाव से अपना नामांकन वापस ले लेंगे. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि जब तक ट्रंप पर लगी रोक हटाई नहीं जाती, वह कोलोराडो जीओपी प्राइमरी बैलेट से हट जाएंगे.
बता दें कि राष्ट्रपति चुनाव में हार के बाद ट्रंप के समर्थकों ने चुनाव में धोखाधड़ी का आरोप लगाया था. खुद ट्रंप ने भी धोखेबाजी से उन्हें हराने के आरोप लगाए थे. इसके बाद ट्रंप समर्थकों ने कैपिटल हिल का घेराव कर अंदर घुसकर हमला कर दिया था. यह इतिहास में अपनी तरह का पहला मामला था, जब अमेरिकी संसद में गोलीबारी और तोड़फोड़ करने के बाद कई दफ्तरों पर कब्जा कर लिया गया था. इस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी.