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तुर्की-इजरायल के बीच तनाव चरम पर, एर्दोगन ने किए सभी संबंध खत्म

तुर्की और इजरायल के संबंधों में पिछले साल न्यूयॉर्क में एर्दोगन और नेतन्याहू के बीच बैठक के बाद से गिरावट आई है, जो दोनों देशों के बीच सुलह का प्रतीक माना गया था. लेकिन 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इजरायल पर हमले और उसके बाद गाजा पर इजरायल की जवाबी कार्रवाई के बाद, जिसमें 43,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए, तुर्की ने नेतन्याहू सरकार की कड़ी आलोचना की है.

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तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान
तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान

तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने बुधवार को घोषणा की कि तुर्की ने इजरायल के साथ सभी संबंध तोड़ दिए हैं. यह बयान उन्होंने सऊदी अरब और अजरबैजान के दौरे के बाद अपने विमान में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया. एर्दोगन ने कहा, “तुर्की गणराज्य की सरकार, मेरे नेतृत्व में, इजरायल के साथ किसी भी तरह का संबंध जारी नहीं रखेगी और हम अपने इस रुख पर दृढ़ रहेंगे.”

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तुर्की ने बुला लिया था अपना राजदूत
हालांकि तुर्की ने मई में इजरायल पर व्यापारिक प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन अब भी तुर्की के राजनयिक मिशन तेल अवीव में खुले और संचालित हैं. पिछले साल तुर्की ने अपने राजदूत को भी वापस बुला लिया था, जबकि इजरायल ने सुरक्षा कारणों से अंकारा में अपना दूतावास खाली कर दिया.

एर्दोगन ने यह भी कहा कि तुर्की इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को गाजा में किए गए कृत्यों के लिए जवाबदेह ठहराने के लिए हर संभव कदम उठाएगा. तुर्की ने इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में इजरायल के खिलाफ चल रहे जनसंहार मामले में हस्तक्षेप किया है और इजरायल पर हथियार प्रतिबंध की भी वकालत की है.

नवंबर में तुर्की ने संयुक्त राष्ट्र में इजरायल को हथियारों और गोला-बारूद की आपूर्ति रोकने के लिए एक पहल शुरू की, जिसमें 52 देशों और दो अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने समर्थन दिया है. एर्दोगन ने कहा कि उन्होंने इस पहल को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष और महासचिव के समक्ष प्रस्तुत किया है, और रियाद में आयोजित एक शिखर सम्मेलन में अरब लीग के सभी सदस्यों को इस पत्र पर हस्ताक्षर करने का आमंत्रण भी दिया गया.

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तुर्की-इजरायल संबंधों में गिरावट

तुर्की और इजरायल के संबंधों में पिछले साल न्यूयॉर्क में एर्दोगन और नेतन्याहू के बीच बैठक के बाद से गिरावट आई है, जो दोनों देशों के बीच सुलह का प्रतीक माना गया था. लेकिन 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इजरायल पर हमले और उसके बाद गाजा पर इजरायल की जवाबी कार्रवाई के बाद, जिसमें 43,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए, तुर्की ने नेतन्याहू सरकार की कड़ी आलोचना की है.

तुर्की में हालिया स्थानीय चुनावों में एर्दोगन की न्याय और विकास पार्टी (AKP) को कमजोर प्रतिक्रिया के कारण आलोचना का सामना करना पड़ा, जिसके बाद तुर्की ने इजरायल पर कानूनी और व्यापारिक प्रतिबंधों को और सख्त किया.

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