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'20 मिनट लेट होती तो मेरी और बहन की हत्या हो जाती...' शेख हसीना ने शेयर किया इमोशनल वीडियो

बांग्लादेश से भागने के बाद से भारत में रह रही हसीना ने कहा, 'मैं और मेरी बहन शेख रेहाना जीवित रहने में कामयाब रहे. अगर हम 20-25 मिनट लेट हो जाते तो हमारी हत्या कर दी जाती.'

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बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना.
बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना.

बांग्लादेश में हालात सामान्य होने का नाम नहीं ले रहे हैं. इसी बीच, पूर्व पीएम शेख हसीना ने एक बड़ा दावा किया है. एक इमोशनल वीडियो में शेख हसीना ने कहा कि पिछले साल 5 अगस्त को छात्रों के नेतृत्व वाले हिंसक विरोध प्रदर्शन के बीच ढाका से भागने से कुछ क्षण पहले उनकी और उनकी बहन की हत्या की कोशिश की गई थी. 

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अपनी अवामी लीग पार्टी द्वारा फेसबुक पर पोस्ट किए गए एक इमोशनल वीडियो में हसीना ने कहा कि यह केवल ऊपरवाले की कृपा थी कि वह अपने राजनीतिक करियर में कई हत्या के प्रयासों से बच गईं. बांग्लादेश से भागने के बाद से भारत में रह रही हसीना ने कहा, 'मैं और मेरी बहन शेख रेहाना जीवित रहने में कामयाब रहे. अगर हम 20-25 मिनट लेट हो जाते तो हमारी हत्या कर दी जाती.'

भारत ने बढ़ाई वीजा अवधि

हाल ही में खबर आई थी कि भारत सरकार ने शेख हसीना की वीजा अवधि बढ़ा दी है, जिसके बाद से भारत में उनके प्रवास को लेकर फिलहाल किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी. बांग्लादेश से भागकर शेख हसीना भारत के हिंडन एयरबेस पहुंची थीं, जहां से कथित तौर पर उन्हें दिल्ली में किसी सेफहाउस में रिलोकेट कर दिया गया है. उधर, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मुहम्मद यूनुस ने शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर 23 दिसंबर भारत सरकार से अनुरोध किया था.

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यह भी पढ़ें: 'मुजीबियत को दफ्न करने की कसम', 'हसीना की पार्टी का खात्मा'! बांग्लादेश में तैयार हो रहा है जुलाई विद्रोह का आधिकारिक दस्तावेज

यूनुस कई बार शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर चुके हैं. शेख हसीना के खिलाफ बांग्लादेश में कई आपराधिक मुकदमे भी दर्ज किए गए हैं और अंतर्राष्ट्रीय अदालत में उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया है. 

मालूम हो कि बांग्लादेश में इसी साल जनवरी में आम चुनाव हुए थे. इन चुनाव में शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग ने बड़ी जीत हासिल की थी. आवामी लीग ने संसद की 300 में से 224 सीटें जीती थीं. शेख हसीना साल 2009 से बांग्लादेश की प्रधानमंत्री थीं. वो सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर रहने वालीं पहली महिला थीं.

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