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बांग्लादेश में इस्कॉन के खिलाफ कट्टरपंथियों का प्रदर्शन, मंदिर ने हिंदुओं पर हमलों का किया था विरोध

इस्कॉन द्वारा आठ सूत्री मांग के लिए आम हिंदुओं के साथ एकजुटता व्यक्त करने के बाद देश भर के इस्लामी संगठनों ने इस्कॉन पर देशव्यापी प्रतिबंध लगाने की मांग की और इसे भारतीय 'उग्रवादी' संगठन घोषित किया. शुक्रवार दोपहर जुम्मा की नमाज के बाद चटगांव में अंदरकिला जामा मस्जिद के सामने विरोध रैली निकाली गई.

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बांग्लादेश में इस्कॉन मंदिर के खिलाफ सड़कों पर उतरा कट्टरपंथी संगठन
बांग्लादेश में इस्कॉन मंदिर के खिलाफ सड़कों पर उतरा कट्टरपंथी संगठन

बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद से हिंदुओं पर कट्टरपंथी संगठनों के हमले जारी हैं. वहीं इन हमलों के विरोध में हिंदुओं के साथ एकजुटता दिखाने पर अब कट्टरपंथी समूह इस्कॉन मंदिर को भ निशाना बना रहे हैं. इस क्रम में शुक्रवार को इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन हिफाजत-ए-इस्लाम ने बांग्लादेश के चटगांव में इस्कॉन पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया.

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शुक्रवार दोपहर जुम्मा की नमाज के बाद चटगांव में अंदरकिला जामा मस्जिद के सामने विरोध रैली निकाली गई. हिफाजत-ए-इस्लाम समूह के मुस्लिम कट्टरपंथियों ने भारत विरोधी और इस्कॉन विरोधी नारे लगाए. दरअसल, इस्कॉन द्वारा आठ सूत्री मांग के लिए आम हिंदुओं के साथ एकजुटता व्यक्त करने के बाद देश भर के इस्लामी संगठनों ने इस्कॉन पर देशव्यापी प्रतिबंध लगाने की मांग की और इसे भारतीय 'उग्रवादी' संगठन घोषित किया.

अंदरकिला इलाके में एक विरोध रैली में हिफाजत ए इस्लाम के नेताओं ने इस्कॉन और भारतीयों को धमकी दी.

बता दें कि 5 अगस्त को सत्ता परिवर्तन के बाद से ही बेंगलुरु में इस्लामी कट्टरपंथी खुलेआम घूम रहे हैं. इन समूहों ने डॉ युनुस प्रशासन के तहत भाग लेने वाले अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार किए हैं.

भारत ने कट्टरपंथियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की

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बांग्लादेश के चटगांव में भड़काऊ सोशल मीडिया पोस्ट के बाद तनाव की खबरों के बीच भारत ने गुरुवार को ढाका से कट्टरपंथी तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करने और देश के हिंदू समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने चटगांव में हिंदू समुदाय के सदस्यों पर कथित हमले की निंदा की. उन्होंने कहा कि तनाव सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट का नतीजा था. हमने सोशल मीडिया पर कई वीडियो प्रसारित होते देखे हैं. यह निंदनीय है. अल्पसंख्यकों को सुरक्षा प्रदान करना बांग्लादेश की विशेष जिम्मेदारी है.

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