दो दिन के G-20 सम्मेलन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत आ गए हैं. इस सम्मेलन के दौरान पीएम द्वारा दुनिया के कई बड़े नेताओं से मिला गया, अंतरराष्ट्रीय मंच पर कई मुद्दों पर विस्तार से बात की गई और पूरी दुनिया को एक बड़ा संदेश देने का भी प्रयास हुआ. पीएम मोदी ने इस सम्मेलन में डिजिटल क्रांति पर जोर दिया तो वहीं दूसरी तरफ रूस-यूक्रेन युद्ध पर भी भारत के स्टैंड को स्पष्ट करने का काम किया.
डिजिटल क्रांति का जिक्र
डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन वाले सेशन में प्रधानमंत्री मोदी ने पूरी दुनिया के सामने एक महत्वकांक्षी लक्ष्य रखा. उन्होंने जोर देकर कहा कि आने वाले दस साल में इस स्तर पर डिजिटल क्रांति करनी होगी कि कोई भी शख्स बदलती टेक्नोलॉजी के लाभ से वंचित ना रह जाए. पीएम ने इच्छा जाहिर की कि इस काम के लिए दुनिया के सभी बड़े देशों को साथ आना होगा जिससे टेक्नोलॉजी सिर्फ कुछ लोगों तक सीमित ना रह जाए और सभी इसका खुलकर इस्तेमाल कर सकें.
भारत की अगले साल मेजबानी
समिट में प्रधानमंत्री मोदी ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भी स्पष्ट स्टैंड लिया. उन्होंने साफ कहा कि आज का दौर युद्ध का नहीं है और बातचीत के जरिए शांति स्थापित होनी चाहिए. बड़ी बात ये रही कि भारत ने जी 20 समिट में भी अपने स्टैंड को बरकरार रखा और न्यूट्रल रहने का फैसला किया. ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों ने रूस और व्लादिमीर पुतिन पर सीधा निशाना साधने का काम किया था. पीएम ने एक ट्वीट कर इस बात पर भी खुशी जाहिर की कि अगले साल भारत जी 20 समिट की मेजबानी करने वाला है. उन्होंने कहा कि हमारा एजेंडा One Earth, One Family, One Future के सपने को साकार करने का होगा.
पीएम मोदी ने क्या कहा?
वैसे जब इंडोनेशिया ने G-20 की अध्यक्षता आधिकारिक तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंप थी, तब उन्होंने कहा था कि इस समूह की अध्यक्षता स्वीकार करना भारत के हर नागरिक के लिए गर्व की बात है. हम G-20 के हर सदस्य देश के प्रयासों के साथ इसे वैश्विक कल्याण के लिए लाभाकरी बनाएंगे. प्रधानमंत्री मोदी ने G-20 सदस्य देशों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत यह जिम्मा ऐसे समय पर उठा रहा है, जब विश्व जियो पॉलिटिकल तनाव, आर्थिक मंदी, खाद्यान्नों और ऊर्जा की बढ़ रही कीमतों और कोरोना के दीर्घकालीन दुष्प्रभावों से एक-साथ जूझ रहा है. ऐसे समय में विश्व G-20 की ओर आशा की नजर से देखता है.