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'भारत के साथ दोगलापन क्यों?', G20 कवरेज को लेकर रूसी मीडिया ने पश्चिमी अखबारों को लताड़ा

भारत जी-20 को लेकर विश्व के केंद्र में है. इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी काफी कवरेज देखने को मिल रही है. हालांकि, भारत को लेकर कुछ नकारात्मक खबरें भी चल रही हैं जिसे लेकर रूस के सरकारी ब्रॉडकास्टर ने पश्चिमी मीडिया को लताड़ लगाई है.

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भारत पहली बार जी20 की मेजबानी कर रहा है
भारत पहली बार जी20 की मेजबानी कर रहा है

आज पूरी दुनिया की निगाहें भारत पर हैं क्योंकि भारत पहली बार दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के संगठन जी20 की मेजबानी कर रहा है. 9-10 सितबंर के बीच आयोजित हो रहे शिखर सम्मेलन में दुनिया के तमाम बड़े नेता शामिल हो रहे हैं.  जी20 आयोजन के लिए भारत ने शानदार तैयारी की है जिसकी चर्चा भारत ही नहीं बल्कि दुनिया की बाकी मीडिया में भी हो रही है. लेकिन इसी बीच पश्चिमी मीडिया में कुछ ऐसी खबरें भी प्रकाशित हो रही हैं जिसमें आयोजन के मद्देनजर दिल्ली के सौंदर्यीकरण के लिए कुछ इलाकों में झुग्गियों को गिराने को मुद्दा बनाया गया है. इसे लेकर रूस की सरकारी ब्रॉडकास्टर रसिया टीवी (आरटी) ने पश्चिमी मीडिया को लताड़ लगाई है.

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'पश्चिमी मीडिया ने नकारात्मक खबरों को दी प्राथमिकता'

आरटी ने अपने एक ऑपिनियन लेख में कहा है कि भारत शानदार तरीके से जी20 शिखर सम्मेलन का आयोजन कर रहा है लेकिन पश्चिमी मीडिया की खबरों में इस आयोजन को लेकर केवल नकारात्मक खबरें ही चल रही हैं.

आरटी ने लिखा, 'पश्चिमी पत्रकारों ने महज गरीबों और वंचितों पर फोकस रखा और इस पर रिपोर्ट किया है कि कैसे भारतीय अधिकारियों ने जी-20 शिखर सम्मेलन से पहले गरीब बस्तियों को हटाने करने के लिए सौंदर्यीकरण अभियान चलाया, यह इस बात का प्रमाण है कि गैर-पश्चिमी देशों के बारे में कुछ भी लिख देना कितना आसान है. उन्होंने अपनी कवरेज को केवल नकारात्मक कहानियों तक ही सीमित रखा है.'

रूसी मीडिया ने आगे लिखा कि इस साल भारत के सभी 28 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेशों के 60 शहरों में जी-20 की 220 बैठकें हो चुकी हैं जिसे भारत ने सफलतापूर्वक संपन्न किया है. बेशक, इस आयोजन में कुछ खामियां थीं, जैसा कि अधिकांश देशों की बैठकों में होता है. लेकिन भारत के आयोजन को ह्यूमन सेंट्रिक रखा गया है जिसमें बड़े समूहों ने हिस्सा लिया है और इसके लिए भारत की सराहना भी हुई है. भारत में बीजेपी की विपक्षी आम आदमी पार्टी ने भी इस आयोजन के लिए केंद्र सरकार की तारीफ की है.

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'पश्चिमी मीडिया ग्लोबल साउथ को अजनबियों की तरह देखता है'

आरटी ने लिखा कि पश्चिमी मीडिया ग्लोबल साउथ, जिसका मुखिया भारत है, के देशों को परिचित अजनबियों की तरह देखता है जिसका उदाहरण जी20 की कवरेज में देखने को मिल रहा है.

आरटी ने पश्चिमी मीडिया को पश्चिमी देशों की हकीकत बताते हुए आगे लिखा, 'पश्चिम के अधिकांश अमीर देशों में भी लाखों गरीब हैं और एक कुलीन अमीर वर्ग है. वहां के देशों में आय असमानता रिकॉर्ड ऊंचाई पर है. क्या मीडिया को इस टाइपकास्टिंग से अधिक पाठक मिलते हैं या यह उनकी औपनिवेशिक मानसिकता का उदाहरण है?'

पीएम मोदी पर रिपोर्ट के लिए रूसी मीडिया ने वाशिंगटन पोस्ट को लताड़ा 

रूसी ब्रॉडकास्टर ने अमेरिका के प्रमुख अखबार वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट का जिक्र करते हुए लिखा, 'वाशिंगटन पोस्ट ने अपने एक लेख में लिखा कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक कार्यक्रम जी20 को अपने रिब्रांडिंग के लिए इस्तेमाल किया है. लेख में कहा गया- ''देश भर में बिलबोर्ड पर प्रधानमंत्री का चेहरा चिपका दिया गया है. इसका संदेश सरल है: दुनिया के शीर्ष नेताओं की मेजबानी करके, भारत एक विश्व शक्ति के रूप में उभरा है, और मोदी ही वो व्यक्ति हैं जो देश को वहां तक ले गए. लेकिन सच्चाई थोड़ी अलग है: जी20 की अध्यक्षता हर सदस्य देश को मिलती है जैसे इंडोनेशिया को पिछले साल मिली थी.''

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वाशिंगटन पोस्ट के लेख के संबंध में आरटी ने आगे लिखा, 'दुनिया भर के नेता ऐसे आयोजनों का उपयोग खुद को दूसरे देशों के नेताओं के सामने अच्छे ढंग के प्रदर्शित करने और अपने वोटर्स को आकर्षित करने के लिए करते हैं. और भारत तो साल 2000 से ही एक अभियान चला रहा है- अतुल्य भारत. विश्व भर के नेता इस तरह के वैश्विक सम्मेलनों अथवा किसी प्राकृतिक त्रासदी के वक्त लाइमलाइट में आते हैं. तो फिर भारतीय नेता के मामले में इतनी नाराजगी क्यों?'

भारत के साथ पश्चिमी मीडिया का यह दोगलापन क्यों?

रूसी ब्रॉडकास्टर ने पश्चिमी को आईना दिखाते हुए आगे लिखा कि जिस तरह से भारत में अमीरी के बीच गरीबी की समस्या है, अमेरिका के सिलिकन वैली (कैलिफोर्निया) में लोगों के पास घर नहीं है, अमेरिका के बड़े शहरों में बड़े पैमाने पर ड्रग्स की समस्या है जिससे जुड़े वीडियो सामने आते रहते हैं. यूरोप के अधिकांश शहर प्रवासियों और बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहे हैं.

अपने लेख में अंत में तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए आरटी ने लिखा, 'ऐसे समय में जब पश्चिम के कामगार, डॉक्टर्स से लेकर हॉलीवुड लेखकों तक, कामकाज का शोषण वाली स्थिति और कम वेतन को लेकर नाराज हैं, पश्चिमी मीडिया का केवल विकासशील दुनिया के नेताओं की गरीबी और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर फोकस करना कट्टर दोगलापन है.'

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बाइडेन-मोदी मुलाकात के बाद अमेरिकी पत्रकार ने उठाया झुग्गियों का मुद्दा

शुक्रवार शाम को जो बाइडेन और पीएम मोदी की द्विपक्षीय वार्ता के बाद एक अमेरिकी पत्रकार ने व्हाइट हाउस प्रवक्ता से अपना पहला ही सवाल भारत में झुग्गियों को हटाए जाने पर पूछ लिया.

प्रेस ब्रीफिंग में पत्रकार ने व्हाइट हाउस के प्रवक्ता से पूछा, 'बाइडेन-मोदी के बीच मुलाकात के संबंध में सबसे पहले मैं ये जानना चाहता हूं कि क्या बातचीत में झुग्गियों पर बुलडोजर चलाए जाने को लेकर बात हुई? क्या राष्ट्रपति बाइडेन ने पूछा कि सुनिए...लोकतांत्रिक सरकारें ऐसा बर्ताव नहीं करती हैं.'

पत्रकार के इस सवाल पर व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने कहा, 'मैं कहना चाहता हूं कि लोकतांत्रित शासन की पद्धति भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों का एक पहलू है. पीएम मोदी और राष्ट्रपति बाइडेन दोनों ही यह बात कहते रहे हैं तो इसका मतलब है कि हर तरह का मुद्दा उनके बातचीत के एजेंडे में है.'

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