
G-7 समिट के आखिरी दिन दुनिया की आर्थिक महाशक्तियों का कई बड़े मामलों पर जोर रहा. गरीब देशों को वैक्सीन, चीन को सबक, कोरोना महामारी, मानवाधिकार और बाजार समेत कई अहम मसलों पर G-7 के देशों ने चर्चा की. आइए जानते हैं G-7 समिट में क्या कुछ खास रहा, साथ ही अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस समेत दूसरे देशों ने कौन सी बड़ी बातें कहीं और देश-दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?
G-7 देशों ने हर ओर से चीन को घेरा
कोरोना वायरस महामारी को लेकर ब्रिटेन में हुए जी-7 समिट के दौरान सदस्य देशों ने वायरस की उत्पत्ति का पता लगाने के लिए नई स्टडी की मांग की. जी-7 देशों ने मांग की है कि WHO एक्सपर्ट्स से कोरोना की उत्पत्ति का पता लगाने के लिए एक पारदर्शी जांच फिर से कराए. ब्रिटेन ने कोरोना के वुहान लैब से वायरस के फैलने की आशंका को लेकर जांच की मांग की है.
समिट में चीन पर लग रहे मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों पर भी बयान जारी किया गया. रविवार को जी-7 द्वारा जारी बयान में कहा गया कि चीन को शिनजियांग और हांगकांग में मानवाधिकारों का सम्मान करना चाहिए.
चीन के खिलाफ एकजुट होते देश?
G-7 समिट में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने चीन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया. बाइडेन ने कहा कि अमेरिका चीन के साथ सीधे तौर पर निपटेगा. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी 'कुछ हद' तक बाइडेन का समर्थन किया. बताया गया कि सभी देशों ने बाइडेन का कई मुद्दों पर साथ तो दिया लेकिन चीन को लेकर कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी.
हालांकि, बाइडेन ने यह भी कहा कि जैसा कि मैंने खुद शी जिनपिंग से कहा था, हम संघर्ष की तलाश में नहीं हैं. जहां सहयोग की जरूरत होगी वहां सहयोग करेंगे. जहां हम असहमत होंगे, वहां मैं इसे स्पष्ट रूप से बता दूंगा.
खासकर जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल और इटली के प्रधानमंत्री मारियो व दूसरे नेताओं को चिंता थी कि बाइडेन के बयान को चीन को उकसाने के तौर पर न ले लिया जाए. हालांकि, जी-7 के नेताओं ने यह जरूर कहा है कि वे चीन के बाजार को चुनौती देने के लिए मिलकर काम करेंगे.
चीन ने किया पलटवार
जी-7 समिट पर निशाना साधते हुए चीन ने कहा कि वे दिन बीत गए जब वैश्विक निर्णय देशों के एक 'छोटे समूह' द्वारा लिए जाते थे. चीन ने जी-7 में कोविड की उत्पत्ति, मानवाधिकारों के उल्लंघन आदि पर उसकी आलोचना के जवाब में ये बयान दिया है. हालांकि, चीन सरकार की ओर से ये कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं थी, बल्कि उसके सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने ये टिप्पणी की.
गरीब देशों को वैक्सीन की 1 बिलियन से अधिक डोज
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने जी-7 समिट के समापन कहा कि जी-7 देशों ने अगले साल के अंत तक दुनिया के सबसे गरीब देशों के लिए COVID-19 वैक्सीन की 1 बिलियन से अधिक खुराक देने का वादा किया है.
जॉनसन ने ब्रिटेन द्वारा विकसित ऑक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की विशेष भूमिका पर प्रकाश डाला, जिसे सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा कोविशील्ड के रूप में भी तैयार किया जा रहा है.
जलवायु एजेंडे पर ध्यान केंद्रित
अंत में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने जी-7 समिट के जलवायु एजेंडे पर ध्यान केंद्रित किया, जो रविवार को चर्चा के अंतिम दिन पर हावी रहा. उन्होंने कहा कि इस साल के अंत में ब्रिटेन COP26 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा, जो जलवायु परिवर्तन से लड़ने पर वैश्विक कार्रवाई को प्रेरित करेगा और हमारे बच्चों और पोते-पोतियों के लिए एक स्वस्थ ग्रह का निर्माण करेगा. G-7 देशों का वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में 20 प्रतिशत का योगदान है और हम स्पष्ट हैं कि कार्रवाई हमारे साथ शुरू होनी है.
कोरोना पर हुई बात
G-7 की बैठक में कोरोना के खिलाफ जंग को लेकर साझी रणनीति पर भी बात हुई. भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक इस चुनौती का सामना करने में भारत की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होगी. कई देशों ने वैक्सीन उत्पादन में भारी वृद्धि करने की जो रणनीति बनाने का फैसला किया है, उसे पूरा करने में भारत को अहम रोल अदा करना होगा. भारत वो रोल अदा भी कर रहा है. दुनिया की बड़ी आबादी को वैक्सीन देने का काम भारत के बिना पूरा नहीं हो सकता.
जलवायु एजेंडे पर भारत ने क्या कहा?
वहीं जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर पीएम मोदी ने कहा कि इस चैलेंज का एकजुट होकर मुकाबला करना होगा. भारत जी-20 का एकमात्र ऐसा देश है, जिसने पेरिस क्लाइमेट समिट से जुड़े अपने सभी वादे पूरे किए हैं.
इसके साथ ही पीएम मोदी ने कोरोना संबंधी टेक्नोलॉजी के लिए TRIPS छूट के लिए समर्थन मांगा. साउथ अफ्रीका ने इसका जोरदार ढंग से समर्थन भी किया. ऑस्ट्रेलियाई पीएम स्कॉट मॉरिसन ने भी TRIPS छूट के लिए अपना मजबूत समर्थन व्यक्त किया. इन देशों का मानना है कि TRIPS छूट ग्लोबल वैक्सीनेशन प्लान के लिए बहुत जरूरी है. इसीलिए भारत और साउथ अफ्रीका ने वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (डबल्यूटीओ) को इसका प्रस्ताव भी भेजा है.
G-7 में कौन से देश हैं शामिल..
आपको बता दें कि 7 सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था वाले देशों से मिलकर बने इस समूह में अमेरिका, फ्रांस, कनाडा, ब्रिटेन, जापान, इटली और जर्मनी शामिल हैं. इन 7 देशों के समूह को G-7 ग्रुप कहा जाता है. इस ग्रुप का उद्देश्य मानवाधिकारों की रक्षा, कानून और लगातार विकास लक्ष्य है. इस बार जी-7 के अध्यक्ष के नाते ब्रिटेन ने भारत, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और दक्षिण अफ्रीका को आमंत्रित किया है.