ये किस्सा 2016 का है... जापान के मशहूर एनिमेटर और फिल्ममेकर हयाओ मियाजाकी (Hayao Miyazaki) अपने Studio Ghibli में कुछ डेवलपर्स के साथ बैठे हैं. उन्हें पता चलता है आने वाले समय में AI इतना ताकतवार होने जा रहा है कि वह पलक झपकते ही इंसानों की तरह एनिमेशन तैयार कर सकता है. इस पर मियाजाकी कंधे उचकाकर कहते हैं- अगर ऐसा होगा तो हमें इंसानों की जरूरत ही नहीं होगी. फिर तो दुनिया का अंत नजदीक है.
जापानी एनिमेशन कंपनी Studio Ghibli के फाउंडर मियाजाकी का नौ साल पुराना ये बयान अब फिर से वायरल हो रहा है. ChatGPT और Grok जैसे AI टूल्स किसी भी तस्वीर को मियाजाकी के Ghibli स्टाइल आर्ट में कंवर्ट कर रहे हैं. मियाजाकी की मानवीय संवेदनाओं वाली वही Ghibli आर्ट जिन्हें वह हाथ से तैयार करते हैं और इसमें सालों की मेहनत लगती है. AI उन्हें चंद सेकंड्स में तैयार कर रहा है. इससे मौलिकता को लेकर एक नए तरह का विवाद भी खड़ा हो गया है.
यूं तो मियाजाकी किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. 84 साल का यह बुजुर्ग जापान का मशहूर एनिमेटर और फिल्ममेकर है. ऐसे समय में जब वेस्टर्न वर्ल्ड में वॉल्ट डिज्नी ‘The Lion King’, ‘अलादीन’, ‘ब्यूटी एंड द बीस्ट’ और पिक्सार एनिमेशन स्टूडियो ‘फाइंडिंग निमो’ और ‘टॉय स्टोरी’ जैसी एनिमेशन फिल्में बनाकर एनिमेशन में एकछत्र दबदबा बनाए हुए थे. 1985 में जापान के हयाओ मियाजाकी, इसाओ ताकाहाता और तोशियो सुजुकी ने Studio Ghibli को खड़ा किया.
उस समय जहां वॉल्ट डिज्नी, पिक्सार और ‘The Minions’ बनाने वाले इल्यूमिनेशन इंटरटेनमेंट स्टूडियो 2डी और 3डी एनिमेशन के साथ-साथ CGI का सहारा ले रहे थे. मियाजाकी हैंड ड्राउन एनिमेशन यानी हाथ से एनिमेशन बनाकर अपनी सशक्त मौजूदगी दर्ज करा रहे थे.
AI की मौजूदगी के बीच मियाजाकी को आज भी इसलिए याद किया जाता है क्योंकि उन्होंने एनिमेशन की दुनिया में ऐसी उपलब्धियां हासिल की हैं, जो समय के साथ-साथ और लोकप्रिय हुई हैं.
उनकी एनिमेटेड फिल्मों के हर फ्रेम को हाथ से इतनी बारीकी से तैयार किया जाता था, जो एक पल के लिए भी देखने वाले को स्क्रीन से नजरें हटाने नहीं देता था. उनकी कहानियों में Magical Realism यानी जादुई यथार्थवाद और वास्तविक दुनिया का अद्भुत कॉम्बिनेशन देखने को मिलता है. उनका एनिमेशन सिर्फ फैंटेसी तक सीमित नहीं होता बल्कि अक्सर आम जिंदगी में नजरअंदाज कर दी गई भावनाओं और जिंदगी के बेहद साधारण अनुभवों को बड़ी खूबसूरती से पर्दे पर दिखाता है.
मियाजाकी की एनिमेशन फिल्मों की खासियत ये थी कि इन्हें हाथ से तैयार किया जाता था. उनकी हर एनिमेशन फिल्म को तैयार करने में सालों की मेहनत लगती थी. जिस एनिमेशन को आज AI की मदद से चंद सेकंड में तैयार कर लिया जाता है. उन्हें तैयार करने में मियाजाकी और उनकी टीम को लंबा समय लगता था.
आप यहां ऊपर जो एनिमेटेड GIF देख रहे हैं. यह मियाजाकी की 2013 में रिलीज हुई एनिमेशन फिल्म 'The Wind Rises' का एक दृश्य है. इस 4 सेकंड के दृश्य में एक भीड़ नजर आ रही है, जिसे तैयार करने में एक साल और तीन महीने का समय लगा था. यह दृश्य फिल्म में भूकंप के दौरान फिल्माया गया है, जहां लोग भीड़भाड़ वाले चौराहे से गुजर रहे हैं. इस दृश्य की खासियत ये है कि भीड़ में हरेक किरदार को हाथ से ड्रॉ किया गया है. इसमें हर किरदार के अपने अलग-अलग हावभाव और मूवमेंट हैं. इसे तैयार करने में मियाजाकी ने CGI का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया बल्कि पारंपरिक तौर पर इन्हें हाथ से तैयार किया.
मियाजाकी का पूरा जोर अपनी एनिमेटेड फिल्मों को ज्यादा से ज्यादा रियलिस्टिक बनाने पर रहता था ताकि दर्शक खुद को उससे रिलेट कर सके. मियाजाकी की हर एनिमेटेड फिल्म में मानवीय संवेदनाओं और फैंटसी का अद्भुत कॉम्बिनेशन है. 2001 में रिलीज हुई Spirited Away को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ एनिमेटेड फिल्मों में से एक माना जाता है. 2004 में रिलीज हुई Howl’s Moving Castle जादू और रोमांस और युद्ध के प्रभावों को दर्शाती है, जिसे दुनियाभर में सराहा गया. इससे पहले 1997 की Princess Mononoke और 1988 की My Neighbor Totoro प्रकृति के साथ मानवीय तालमेल और इंसानी संघर्षों को बड़ी संजीदगी से पेश करती हैं.
यूं तो एनिमेशन की शुरुआत प्राचीन काल से मानी जाती है. प्राचीन मिस्र की दीवारों पर चित्रकला और गुफा चित्रों में गति को दर्शाने के लिए इसके इस्तेमाल के संकेत मिलते हैं. लेकिन आधुनिक एनिमेशन की शुरुआत 20वीं सदी में हुई. जब 1906 में अमेरिकी कार्टूनिस्ट जे. स्टुअर्ट ब्लैकटन ने Humorous Phases of Funny Faces फिल्म बनाई. इसे पहली एनिमेटेड फिल्म माना जाता है. इसे चॉकबोर्ड पर चित्र बनाकर फिल्माया गया था. इसके दो साल बाद 1908 में Fantasmagorie ने पूरी तरह से हाथ से ड्रॉ कर 700 चित्रों को तैयार कर पहली पारंपरिक एनिमेटेड फिल्म बनाई थी. 1913 में अर्ल हर्ड और जॉन ब्रे ने सेल एनिमेशन तकनीक विकसित की, जिसमें सेल्यूलॉइड पर चित्र बनाए जाते थे. इससे बैकग्राउंड को बार-बार तैयार करने की जरूरत खत्म हुई और एनिमेशन आसान हो गया. बाद में वॉल्ट डिज्नी ने इस तकनीक को बेहद लोकप्रिय बनाया.
मियाजाकी की फिल्म Spirited Away ने 2003 में जब बेस्ट एनिमेशन का ऑस्कर जीता तब मियाजाकी ने इराक पर अमेरिकी हमले का विरोध करते हुए ऑस्कर्स समारोह का बहिष्कार कर दिया था. इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा था कि मैं ऐसे देश का दौरा करना नहीं चाहता था, जो इराक पर बम बरसा रहा हो.
मियाजाकी का एक बेहद मशहूर कथन है- AI lacks Humanity यानी AI में भावनाओं की कमी है. एक बार कुछ जापानी डेवलपर्स ने मियाजाकी को एक AI जेनरेटेड एनिमेशन दिखाया था, जिसे देखने के बाद मियाजाकी को काफी दुख पहुंचा था. इस दौरान उन्होंने जो कहा, वह कला के प्रति उनके सम्मान को साफगोई से उजागर करता है. मियाजाकी ने कहा कि मैंने अपनी पूरी जिंदगी इंसानी जज्बातों को ध्यान में रखकर फिल्में बनाई हैं. लेकिन जिसने भी इसे (AI) तैयार किया है, उसे अंदाजा ही नहीं है कि पीड़ा क्या होती है. यह सब देखकर बेहद निराशा हुई है और मुझे लगता है कि यह जिंदगी का अपमान है.
मियाजाकी कहते हैं कि अगर AI को ज्यादा बढ़ावा दिया गया तो असल कलाकारों की जरूरत खत्म हो जाएगी. वह कहते हैं कि अगर हम मशीनों को कहानियां बनाने देंगे तो हम अपनी कला और आत्मा को खो देंगे. उनका मानना है कि Tech Can't Replace Artists यानी तकनीक हमारी जगह नहीं ले सकते. कला का मकसद भावनाओं का विस्तार करना है.
शायद यही कारण रहा कि Studio Ghibli ने कभी भी AI या फिर CGI का इस्तेमाल नहीं किया. वह हमेशा कहते रहे हैं कि तकनीक को इंसानों की मदद करनी चाहिए ना कि उनकी जगह लेनी चाहिए.
AI Ghibli ट्रेंड आजकल चर्चा में है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर Studio Ghibli की एनिमेशन शैली की कॉपी की जा रही है. इससे कॉपीराइट उल्लंघन और कला की मौलिकता पर भी गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि AI जेनरेटेड एनिमेशन न केवल मूल कलाकारों के अधिकारों का उल्लंघन है बल्कि कला की भावनात्मक गहराई को भी कम करता है.
मियाजाकी ने एक दफा एक इंटरव्यू में कहा था कि हमने इस स्टूडियो का नाम Studio Ghibli इसलिए रखा था क्योंकि मेरा हवाई जहाजों से विशेष लगाव रहा है. सेकंड वर्ल्ड वॉर में इस्तेमाल किए गए एक इटैलियन वॉरप्लेन Caproni Ca.309 Ghibli के नाम पर एनिमेशन स्टूडियो का नाम Ghibli रखा गया.
Ghibli मूल रूप से अरबी भाषा का शब्द है, जिसका मतलब रेगिस्तान की गर्म हवा से है. मियाजाकी कहते हैं कि उनकी फिल्में जापान की एनिमेशन इंडस्ट्री में नई और ताजा हवा की तरह थी. साफ है कि वह एनिमेशन इंडस्ट्री में नया बदलाव लाना चाहते थे. यही सोचकर इसका नाम Studio Ghibli रखा.
मियाजाकी के साथ मिलकर Ghibli की नींव रखने वाले तातोहारो का कहना है कि AI खुद कोई आर्टिस्ट नहीं है बल्कि यह इंसानों की बनाई चीजों की कॉपी करता है. जब कोई चीज बहुत सस्ते में उपलब्ध हो जाती है तो उसकी कद्र अमूमन कम हो जाती है. अगर AI हर मिनट लाखों आर्टवर्क बना सकता है तो असली कलाकारों की मेहनत को भी कम आंका जाता है. मशीनें कभी भी इंसानी दिमाग की तरह जीवन में गहराई नहीं ला सकती.
मियाजाकी कला और परफेक्शन के दीवाने थे. उनका व्यक्तित्व एक जिद्दी परफेक्शनिस्ट का रहा है. ऐसे समय में जब उनके प्रतिद्वंदी एनिमेशन के लिए कंप्यूटर्स और नई तकनीक का सहारा ले रहे थे, मियाजाकी अपने एनिमेशन फिल्म के फ्रेम्स खुद ही हाथ से डिजाइन करते थे. कंप्यूटर से बनाए गए एनिमेशन उन्हें रास नहीं आते थे. ऐसा नहीं था कि वह तकनीक से नफरत करते हैं बल्कि उनका मानना है कि फिल्मों में जंगलों, पहाड़ों और प्रकृति को जिस खूबसूरती से हाथ से दर्शाया जा सकता है, तकनीक उतनी संजीदगी से ऐसा नहीं कर सकती. वह अपने हाथों से एनिमेशन में भाव भरने में यकीन रखते हैं और कहते हैं कि जब तक जीऊंगा, हाथ से कहानियां रचता रहूंगा...