भारत ने गुरुवार को अपनी दूसरी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी INS Arighaat लॉन्च कर दी है. पनडुब्बी को स्ट्रैटेजिक फोर्सेस कमांड में शामिल किया गया है. भारतीय नौसेना में परमाणु पनडुब्बी के शामिल होने से चीन का सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स चिढ़ गया है. ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि परमाणु हथियारों का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के लिए नहीं होना चाहिए.
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा, 'चीनी विशेषज्ञों ने कहा कि भारत को इस शक्ति का इस्तेमाल जिम्मेदारी से करना चाहिए और शांति-स्थिरता में योगदान देना चाहिए, न कि इसका इस्तेमाल अपनी ताकत दिखाने के लिए करना चाहिए.'
आईएनएस अरिघात को विशाखापत्तनम स्थित शिपबिल्डिंग सेंटर में बनाया गया जिसका डिस्प्लेसमेंट 6000 टन है. 750 किमी रेंज वाली पनडु्ब्बी बैलेस्टिक मिसाइल K-15 से लैस है और अब यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में लंबी दूरी की गश्ती के लिए तैयार है. पनडुब्बी की लंबाई करीब 113 मीटर है और इसका बीम 11 मीटर, ड्राफ्ट 9.5 मीटर है. अरिघात पानी के अंदर 980 से 1400 फीट की गहराई तक जा सकती है.
दूसरी परमाणु पनडुब्बी के भारतीय नौसेना में शामिल होने से इंडो-पैसिफिक, जहां चीन निरंतर अपना प्रभाव बढ़ा रहा है, में भारत को रणनीतिक बढ़त मिल सकती है. चीन के साथ चल रहे तनाव के बीच भारतीय नौसेना को परमाणु पनडुब्बी से और अधिक मजबूत मिल सकती है.
'परमाणु ब्लैकमेलिंग के लिए...'
ग्लोबल टाइम्स ने बीजिंग स्थित एक सैन्य विशेषज्ञ के हवाले से लिखा, 'भारत के पास परमाणु संचालित बैलेस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों की संख्या बढ़ रही है लेकिन साथ ही शक्ति के साथ उसे इस्तेमाल करने की जिम्मेदारी भी आती है.'
ग्लोबल टाइम्स ने विशेषज्ञ के हवाले से आगे लिखा, 'जब तक परमाणु हथियार हैं, उनका इस्तेमाल शांति और स्थिरता की रक्षा के लिए किया जाना चाहिए, न कि ताकत बढ़ाने या परमाणु ब्लैकमेलिंग के लिए.'
और किन देशों के पास है परमाणु पनडुब्बी?
इस तरह की पनडुब्बी दुनिया में केवल अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस और रूस के पास ही है. चीन के पास भी इससे उन्नत किस्म की क्षमता मौजूद है.
आईएनएस अरिघात के अंदर न्यूक्लियर रिएक्टर लगा है जिससे सतह पर पनडुब्बी को 28 KM/hr और पानी के अंदर 44 KM/hr की स्पीड मिलेगी. खबर है कि भारत इसी क्रम में तीसरी परमाणु पनडुब्बी बनाने की तैयारी में है.