इस्लामिक देश सऊदी अरब के मक्का में हर साल लाखों की संख्या में मुसलमान हज के लिए जाते हैं. पिछले साल भीषण गर्मी की वजह से 1,300 हाजियों की मौत हो गई थी जिसे लेकर सऊदी अरब को काफी आलोचना झेलनी पड़ी थी कि उसने गर्मी से बचने के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं किए. इस साल का हज भी पिछले साल की ही तरह जून में होने वाला है जिसे लेकर सऊदी अरब की चिंताएं अभी से बढ़ गई है. एक्सपर्ट्स भी सलाह दे रहे हैं कि सऊदी अधिकारियों को आधुनिक तरीके से हज की तैयारियां करनी चाहिए ताकि हाजियों को गर्मी से बचाया जा सके.
विश्लेषकों का कहना है कि पिछले साल की हालत को देखते हुए अधिकारी अभी से सतर्क हैं और इस साल हज में ऐसा होने से रोकने के लिए इंतजाम कर रहे हैं.
पिछले जून में मक्का में तापमान 51.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था और हज के लिए 18 लाख हाजी मक्का शहर पहुंचे थे. सऊदी अधिकारियों ने कहा था कि हज के दौरान रजिस्टर की गई मौतों में से 83% के पास आधिकारिक हज परमिट नहीं थे. आधिकारिक हज परमिट न होने की वजह से वो हाजियों के लिए बनाई गई सुविधाओं का इस्तेमाल नहीं कर पाए जिसमें एसी टेंट भी शामिल था.
शुक्रवार को कोपरनिकस जलवायु परिवर्तन सेवा ने कहा कि साल 2024 अब तक का सबसे गर्म साल था. उस साल जून में मक्का से ढेरों तस्वीरें आईं जिसमें हाजी गर्मी से बेहाल दिख रहे थे.
सऊदी अरब के किंग अब्दुल्ला इंटरनेशनल मेडिकल रिसर्च सेंटर के अब्दर्रजाक बूचामा ने कहा कि हज अभी पांच महीने दूर है जिसे देखते हुए सरकार ने अभी हज की विस्तृत तैयारियां नहीं की है. हालांकि, अधिकारी नहीं चाहेंगे कि पिछले साल वाली तबाही फिर से दोहराई जाए.
सऊदी सरकार के साथ तीन दशक तक गर्मी से होने वाली मौतों को रोकने पर काम कर चुके बूचामा ने समाचार एजेंसी एएफपी से बात करते हुए कहा, 'मुझे लगता है कि जो सबसे पहला काम वो करेंगे, वो होगा अवैध हाजियों को रोकने का काम. मैं समझता हूं कि उन्हें सबक मिल गया है. अब यह देखना होगा कि वो गर्मी से होने वाली मौतों को रोकने के लिए क्या कदम उठाते हैं.'
बूचामा ने कहा कि गर्मी के असर को कम करने के लिए कई कदम उठाए जा सकते हैं जैसे हीट स्ट्रेस का पता लगाने के लिए सेंसर का इस्तेमाल करना जिसे इंसान के शरीर पर पहनाकर चेक किया जा सके कि उसे हीट स्ट्रेस है या नहीं. वो कहते हैं कि हालांकि, इनमें काफी वक्त लग सकता है और संभवतः जून तक ये शुरू नहीं होंगे.
खुले में पांच से छह दिनों तक चलती है हज यात्रा
हज इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है. इस्लाम में आर्थिक और शारीरिक रूप से सक्षम मुसलमानों के लिए हज अनिवार्य बताया गया है. हज इस्लामिक कैलेंडर के 12वें महीने धू अल-हिज्जा में मनाया जाता है. इस्लामिक कैलेंडर चंद्रमा से संचालित होता है इसलिए हज की तिथियां हर साल बदलती रहती हैं और साल के किसी भी महीने में हज पड़ सकता है.
हज यात्रा पांच से छह दिनों तक चलती है और इस दौरान हाजियों को ज्यादातर खुले में रहना पड़ता है. पिछले कुछ सालों में यहां कई दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हो चुकी हैं जिनमें 2015 में मीना शहर में शैतान को पत्थर मारने की रस्म के दौरान हुई भगदड़ भी शामिल है. भगदड़ में 2,300 लोगों की जान चली गई थी.
चैथम हाउस थिंक टैंक के एसोसिएट फेलो करीम एल्गेंडी ने कहा कि सऊदी अरब पूर्व में हज को लेकर जो तैयारियां करता था, वो इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार और भीड़ नियंत्रण के उपायों पर केंद्रित थीं.
एल्गेंडी कहते हैं, 'लेकिन पिछले साल के पैटर्न को देखते हुए हम उम्मीद करते हैं कि सऊदी अधिकारी 2025 के हज के लिए गर्मी से लड़ने के आधुनिक उपायों पर काम करेंगे साथ ही हाजियों की संख्या पर भी शिकंजा कसेंगे.'
हज के लिए हर देश का एक कोटा निर्धारित होता है और लॉटरी सिस्टम के जरिए उस देश के लोगों को हज परमिट मिलता है. लेकिन जिन लोगों को हज का आधिकारिक परमिट मिल जाता है, उनमें से भी कई लोग हज परमिट की भारी लागत की वजह से बिना परमिट के ही हज यात्रा करने के लिए निकल जाते हैं. हालांकि, उनके पकड़े जाने पर गिरफ्तारी और निर्वासन का खतरा बना रहता है.
2019 में सऊदी अरब के वास्तविक शासक क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) की सरकार ने सामान्य टूरिज्म वीजा जारी किया था. इसके बाद जिन हाजियों को हज का परमिट नहीं मिलता, वो इसी वीजा के जरिए सऊदी पहुंचने लगे. बिना परमिट हज के लिए पहुंचने वालों की बढ़ती संख्या से भी हज के दौरान मक्का में भीड़ बढ़ जाती है.
बर्मिंघम यूनिवर्सिटी में सऊदी राजनीति के विशेषज्ञ उमर करीम ने कहा कि मक्का में एंट्री के रास्तों को बंद करना बहुत मुश्किल है जिसका अर्थ है कि इस साल भी बड़ी संख्या में बिना परमिट के लोग हज करने मक्का पहुंचेंगे.
उन्होंने कहा कि सऊदी अधिकारियों को न केवल परमिट वाले हाजियों के लिए बल्कि अतिरिक्त हाजियों के लिए भी व्यवस्था करने की जरूरत है. खासकर उनके लिए एसी और इमर्जेंसी स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था की जानी चाहिए.
पिछले साल हुई थी तैयारियां, बावजूद इसके नहीं रुकी मौतें
पिछले साल हज के दौरान गर्मी से हाजियों के बचाव के लिए सऊदी अरब की सरकार ने काफी तैयारियां की थीं. मक्का के ग्रैंड मस्जिद स्थित काबा के चारों तरफ एसी लगाई गई थी जिससे उसकी परिक्रमा कर रहे हाजियों को ठंडक मिलती रहे. सफा और मारवा की पहाड़ियों तक पहुंचने के लिए मस्जिद परिसर के अंदर एक रास्ता तैयार किया गया था जो बाहरी तापमान के मुकाबले ठंडा था.
सऊदी अधिकारियों ने 2023 में ही उन सड़कों को एक सफेद ठंडक देने वाली सामग्री से ढक दिया था जिस पर चलकर हाजियों को धार्मिक स्थानों की तरफ जाना था. अधिकारियों का कहना था कि इससे सड़क पर बिछा अलकतरा गर्म नहीं होता और उसका तापमान 20% तक कम हो जाता है जिससे उस पर चलने से गर्मी नहीं लगती. लेकिन ये सभी उपाय नाकाफी साबित हुए और बड़ी संख्या में लोग मारे गए.
हाजियों की सुविधा के लिए वॉलंटियर्स जगह-जगह पानी और छाते भी बांटते हैं. बूचामा कहते हैं, 'अत्यधिक गर्मी से बचाव के लिए एयर कंडीशनिंग ही एकमात्र प्रभावी उपाय है. इसलिए सऊदी अधिकारियों को हाजियों के बीच मोबाइल कूलिंग यूनिट तैनात करना चाहिए जिन्हें जरूरत के हिसाब से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सके. पानी पीने से शरीर हाइड्रेट होता है लेकिन यह काफी नहीं है. गर्मी से बचने के लिए और उपाय करने होंगे.'
जर्नल जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स की तरफ से प्रकाशित 2019 के एक शोध में कहा गया कि जलवायु परिवर्तन और हज के समय में बदलाव के कारण, हाजियों को 2047 से 2052 तक और 2079 से 2086 तक भीषण गर्मी का सामना करना पड़ेगा और यह बेहद खतरनाक होने वाला है.