पाकिस्तान अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है. उसका खजाना लगातार खाली होता जा रहा है. लेकिन फिर भी भारत को लेकर उसकी कड़वाहट कम होने का नाम नहीं ले रही. ऐसे में पाकिस्तान की विदेश राज्यमंत्री हिना रब्बानी खार ने कहा है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के साथ खराब संबंधों की वजह से कारोबार की कोई संभावना नजर नहीं आती.
पाकिस्तान की माली हालत के मद्देनजर भारत से संबंध सुधरने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार से पड़ोसी मुल्क को थोड़ी राहत मिल सकती थी.
खार ने पॉलिटिको को दिए इंटरव्यू में कहा कि वह दोनों देशों के बीच संबंधों को बहाल करने के लिए व्यापार शुरू करने की समर्थक थीं लेकिन भारत में एक हिंदू राष्ट्रवादी सरकार के साथ काम करना असंभव है.
भारत की हिंदू राष्ट्रवादी सरकार के साथ कारोबार नहीं
भारत के साथ कारोबार शुरू करने के सवाल पर खार ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि भारत की आक्रामक सरकार के साथ कारोबार शुरू करने की कोई गुंजाइश है. भारत में जो पार्टी और जो लोग सत्ता में हैं, उनकी समस्याओं को सुलझाने की कोई इच्छा नहीं है बल्कि इसके बजाए वे समस्याओं को बढ़ाना चाहते हैं.
भारत के साथ कारोबार शुरू करने के सवाल पर खार ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि भारत की आक्रामक सरकार के साथ कारोबार शुरू करने की कोई गुंजाइश है. भारत में जो पार्टी और जो लोग सत्ता में हैं, उनकी समस्याओं को सुलझाने की कोई इच्छा नहीं है बल्कि इसके बजाए वे समस्याओं को बढ़ाना चाहते हैं.
उन्होंने कहा कि भारत की हिंदू राष्ट्रवादी सरकार हिंदुओं और मुस्लिमों के नाम पर देश का विभाजन कर रही है. इस वजह से उनके साथ कारोबार शुरू करने की कोई संभावना नहीं है. भारत अगर अपने रुख को बदलता है तो उनका देश पाकिस्तान बातचीत को फिर से शुरू करने के लिए तैयार है.
इससे पहले भारत की वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार अप्रैल-दिसंबर 2022 के बीच 1.35 अरब डॉलर तक पहुंच गया था.
बता दें कि भारत और पाकिस्तान के रिश्ते 1947 से ही तनावपूर्ण रहे हैं. लेकिन इसी बीच पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो बीते मई महीने में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक में शिरकत करने भारत आए थे.
कैसे रहे हैं दोनों देशों के रिश्ते?
1947 में दोनों देशों के आजाद होने के बाद से ही रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं. दोनों देश अब तक तीन युद्ध लड़ चुके हैं. इनमें से दो युद्ध कश्मीर के लिए हुए हैं.
भारत और पाकिस्तान के रिश्ते काफी तल्ख भरे रहे हैं. आखिरी बार 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए पाकिस्तान के तब के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भारत आए थे. उनके बाद से किसी भी पाकिस्तानी नेता ने भारत का दौरा नहीं किया है.
हालांकि, इसके बाद 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नवाज शरीफ की नातिन मेहरुन्निसा की शादी में शामिल होने पाकिस्तान पहुंचे थे. उसी दिन नवाज शरीफ का जन्मदिन भी था. प्रधानमंत्री मोदी का ये दौरा अचानक हुआ था.
2016 में उरी हमला और फिर 2019 में पुलवामा हमले के बाद रिश्ते और बिगड़ गए. पुलवामा हमले के बाद दोनों देशों के बीच जंग जैसे हालात बन गए थे. अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री माइस पॉम्पियो ने दावा किया था कि इस हमले के बाद भारत और पाकिस्तान परमाणु युद्ध के करीब आ गए थे.