यूनाइटेड किंगडम में इस समय कई चीजें एक साथ चल रही हैं. आने वाले कुछ दिनों में किंग चार्ल्स की ताजपोशी होनी है. सारा देश उसकी तैयारियों में व्यस्त है. इस बीच संसद के निचले सदन में अवैध प्रवासियों को रोकने के लिए बिल पास हो चुका. अब इसपर हाउस ऑफ लॉर्ड्स में बात होगी.
माना जा रहा है कि अगर बिल यहां भी पास हो गया, तो नावों के जरिए इंग्लिश चैनल पार करने वालों को दोहरी मुसीबत झेलनी होगी. वे जान जोखिम में डालकर छोटी बोट्स पर बैठकर ब्रिटेन पहुंचेंगे तो लेकिन वहां उन्हें टिकने नहीं दिया जाएगा, बल्कि तुरंत किसी 'सेफ थर्ड कंट्री' भेज दिया जाएगा.
बोट से आने वालों पर क्यों है एतराज?
बीते कुछ सालों में अल्बानिया, अफगानिस्तान और सीरिया से आने वाले ऐसे लोग बढ़े जो सड़क या हवाई रास्ते की बजाए पानी के रास्ते आ रहे हैं. ब्रिटेन इसे मुश्किल मान रहा है. दरअसल ये एक गैरकानूनी तरीका है, जिसमें ट्रैफिकर कुछ पैसे लेकर लोगों को अवैध तरीके से ब्रिटेन या मनचाहे देश पहुंचा देते हैं. अवैध इसलिए कि नावों से आ रहे लगभग 98% लोगों के पास पासपोर्ट नहीं होता. वे बिना किसी पहचान के यूके पहुंच जाते हैं.
होम ऑफिस के इमिग्रेशन इन्फोर्समेंट विभाग का कहना है कि केवल 2 प्रतिशत लोग ही पहचान-पत्र के साथ होते हैं. ऐसे में अगर वे आतंकी हैं, या किसी भी गलत इरादे के साथ पहुंचे तो जांच बहुत मुश्किल हो जाती है.
पेट्रोलिंग के नहीं थे पक्के इंतजाम
पहले ब्रिटेन के पास हवाई और सड़क रास्ते से आने वालों की जांच के लिए तो पूरे इंतजाम थे, लेकिन पानी के रास्ते आने वालों के लिए ऐसा कुछ नहीं था. ये समझने के बाद तस्कर ज्यादा से ज्यादा लोगों को बोट्स के जरिए ब्रिटेन में घुसाने लगे. यही देखते हुए यूके ने बाद में चैनल ट्रैकिंग सिस्टम बनाया. इसके बाद भी अवैध प्रवासी पुलिस को चकमा देते हुए भीतर आते रहे. यहां तक कि ये ब्रिटेन में बड़ी समस्या बनने लगी.
प्रधानमंत्री पद की रेस में शामिल होने से पहले सुनक ने स्टॉप द बोट्स कैंपेन को हवा दी. यही वादा अब बिल के रूप में संसद में दिख रहा है.
विवाद किस बात पर है?
ये पक्का है कि अपने देश में तनाव झेलते लोग ब्रिटेन या किसी सेफ देश की तरफ आएंगे ही. उन्हें अपने देश तक पहुंचने से नहीं रोका जा सकेगा, लेकिन देश के भीतर आने से रोका जाएगा. तो क्या उनकी बोट वापस इंग्लिश चैनल से लौटा दी जाएगी? नहीं. उन्हें यहां से एक सेंटर पर रखा जाएगा और फिर रवांडा भेज दिया जाएगा. बता दें कि ब्रिटेन ने रवांडा के साथ एग्रीमेंट किया है. माइग्रेशन एंड इकनॉमिक डेवलपमेंट पार्टनरशिप के तहत हुए करार में बोट्स से आए लोग रवांडा भेज दिए जाएंगे, जहां वे अपनी जिंदगी नए सिरे से शुरू कर सकें. कम से कम ब्रिटेन का यही कहना है. इसमें सिर्फ उन्हें ही छूट मिलेगी, जो तुरंत हवाई यात्रा करने की हालत में न हों.
बता दें कि साल 2022 में यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स ने ब्रिटेन में हो रही इस सुगबुगाहट को गलत बताया था. उसका कहना था रवांडा अपने-आप में अस्थिर देश है. ऐसे में एक देश की मुश्किल से बचकर भागे लोगों को दूसरी मुश्किल में डालना ठीक नहीं. लेकिन संसद में बिल बनने के बाद वो इसमें कोई अड़ंगा नहीं डाल सकेगा.
शरणार्थियों पर क्या है इंटरनेशनल कानून?
1951 रिफ्यूजी कन्वेंशन एक अंतरराष्ट्रीय कानून है, जो दुनियाभर में शरणार्थिकों के हक पर काम करता है. इस कन्वेंशन में साफ कहा गया है कि रिफ्यूजियों को किसी भी हाल में उस देश वापस नहीं लौटाना चाहिए, जहां से वे भागकर आए हों. ये आमतौर पर युद्ध-प्रभावित देश होते हैं.
किन्हें मिलती है शरण
ब्रिटिश नेशनेलिटी एंड बॉर्डर्स एक्ट के मुताबिक प्राथमिकता में उन्हीं लोगों को शरण मिल सकती है, जो वैध ढंग से आए हों और यूरोपियन देश से हों. साथ ही आतंक प्रभावित हों. इसके बाद कई दूसरी श्रेणियां हैं. लेकिन फिलहाल आ रहे ज्यादातर लोग युद्ध में घिरे देशों से हैं. ब्रिटेन उन्हें वापस भगाकर खुद को क्रूर नहीं दिखा सकता. यही वजह है कि उसने रवांडा के साथ ऐसा करार किया जिससे वहां आए अवैध लोग रवांडा डिपोर्ट हो जाएं.
पांच सालों के लिए हुआ एग्रीमेंट
यूनाइटेड किंगडम और रवांडा के बीच अप्रैल 2022 में इस असाइलम पॉलिसी पर एग्रीमेंट हुआ. पांच सालों के लिए हुए एग्रीमेंट के बदले यूके ने अफ्रीकी देश को लगभग 120 मिलियन पाउंड दिए हैं. ये राशि बढ़ भी सकती है. इन पैसों का बड़ा हिस्सा रवांडा की सरकार ब्रिटेन से आए घुसपैठियों के रहने-खाने-कमाने पर खर्च करेगी. साथ ही कुछ हिस्सा अपने देश के वेलफेयर में लगाएगी.
इस करार को दोनों ही देश मौलिक और बढ़िया प्रयोग कह रहे हैं, लेकिन मानवाधिकार संस्थाएं थर्ड वर्ल्ड कंट्रीज में हालातों को लेकर खास खुश नहीं. वे लगातार यही दलील दे रही हैं कि घुसपैठियों के लिए ये स्थिति- 'आसमान से गिरे, खजूर में अटके' की तरह न हो जाए.
बोट्स पर भी रहेगी नजर
छोटी बोटों के आने पर रोक लगाने के लिए यूके ने फ्रांस के साथ भी करार किया है. इसमें वो फ्रांस को तीन सालों के दौरान 5 सौ मिलियन पाउंड देगा ताकि फ्रेंच पुलिस अधिकारी पेट्रोलिंग बढ़ा दें और इंग्लिश चैनल से आने वालों पर रोक लग सके. इसे स्मॉल बोट्स कमांड सेंटर कहा जा रहा है.