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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका और मिस्र की 5 दिवसीय राजकीय यात्रा के बाद रविवार को स्वदेश वापस लौट आए हैं. राष्ट्रपति जो बाइडेन के निमंत्रण पर अमेरिका की हाई-प्रोफाइल यात्रा के बाद पीएम मोदी शनिवार को दो दिवसीय यात्रा पर मिस्र पहुंचे थे. यहां प्रधानमंत्री मुस्तफा मैडबौली ने एयरपोर्ट पर उनका जोरदार स्वागत किया था. 1997 के बाद यह पहला मौका था जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने मिस्र की द्विपक्षीय यात्रा की है.
दरअसल, पीएम मोदी ने 20 जून को अपनी पांच दिवसीय यात्रा शुरू की थी. उन्होंने 21-24 जून तक अमेरिका का दौरा किया. उनकी अमेरिका यात्रा न्यूयॉर्क से शुरू हुई, जहां उन्होंने 21 जून को 9वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एक ऐतिहासिक कार्यक्रम का नेतृत्व किया. यह पहली बार था जब पीएम मोदी अमेरिका के राजकीय दौरे पर गए हैं.
मोदी से पहले 2009 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह अमेरिका के राजकीय दौरे पर गए थे. अब तक अमेरिका तीन बार भारतीय नेताओं को स्टेट विजिट के लिए आमंत्रित कर चुका है. पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णनन पहले भारतीय नेता थे, जो जिन्हें 1963 में 3 से 5 जून तक राजकीय दौरे पर थे.
मिस्र की यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी के साथ बातचीत की. उन्हें अरब देश के सर्वोच्च सम्मान 'ऑर्डर ऑफ द नाइल' से भी सम्मानित किया गया. इसी के साथ मिस्र पीएम मोदी को राजकीय सम्मान देने वाले 13वां देश बन गया है.
मिस्र के राष्ट्रपति के साथ इन मुद्दों पर हुई बातचीत
पीएम मोदी ने रविवार को राष्ट्रपति अल-सिसी के साथ बातचीत की. इस दौरान व्यापार और निवेश, ऊर्जा संबंधों और लोगों के बीच संबंधों में सुधार पर ध्यान देने के साथ दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की गई. दोनों देशों ने अपने रिश्ते को 'रणनीतिक साझेदारी' तक बढ़ाया.
मिस्र की ऐतिहासिक मस्जिद का किया दौरा
इससे पहले पीएम मोदी ने मिस्र की ऐतिहासिक 11वीं सदी की अल-हकीम मस्जिद का दौरा किया, जिसे दाऊदी बोहरा समुदाय की मदद से बहाल किया गया था. उन्होंने काहिरा में हेलियोपोलिस राष्ट्रमंडल युद्ध कब्रिस्तान का भी दौरा किया और प्रथम विश्व युद्ध के दौरान मिस्र और अदन में अपने जीवन का बलिदान देने वाले 4,300 से अधिक बहादुर भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने गीज़ा में पिरामिडों का भी दौरा किया.
मिस्र में भारतीय समुदाय के लोगों से की मुलाकात
शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी ने मिस्र के ग्रैंड मुफ्ती शॉकी इब्राहिम अब्देल-करीम अल्लम से मुलाकात की और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने और उग्रवाद और कट्टरपंथ का मुकाबला करने से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की. बाद में शाम को उन्होंने मिस्र में भारतीय समुदाय के सदस्यों से मुलाकात की, जिन्होंने उनकी भरपूर प्रशंसा की और उन्हें 'भारत का नायक' बताया.
पीएम मोदी ने मिस्र में प्रमुख हस्तियों से भी मुलाकात की, जिनमें मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीकी क्षेत्र में काम करने वाली सबसे बड़ी मिस्र की कंपनियों में से एक के सीईओ हसन अल्लम और प्रसिद्ध लेखक और पेट्रोलियम रणनीतिकार तारेक हेग्गी शामिल थे.
मिस्र के साथ 4 समझौतों पर हुए हस्ताक्षर
भारत के विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने बताया कि मिस्र और भारत के बीच चार ज्ञापनों और समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिनमें दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी पर सबसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक समझौता शामिल है. समझौते के अलावा, भारत और मिस्र ने कृषि और संबद्ध क्षेत्रों पर भी समझौते पर हस्ताक्षर किए.
अमेरिका में हुआ भव्य स्वागत
अमेरिका की यात्रा के दौरान वाशिंगटन डीसी में राष्ट्रपति बाइडेन द्वारा व्हाइट हाउस में उनका रेड-कार्पेट स्वागत किया गया. दोनों नेताओं ने एक ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन आयोजित किया, जिसके बाद मोदी ने कांग्रेस को संबोधित किया और उनके सम्मान में व्हाइट हाउस में बाइडेन द्वारा राजकीय डिनर का आयोजन किया गया. इस यात्रा में रक्षा, अंतरिक्ष और व्यापार जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कई प्रमुख सौदे हुए.
अमेरिकी कांग्रेस की संयुक्त बैठक को किया संबोधित
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति बाइडेन ने सैन्य विमानों और अमेरिकी ड्रोन सौदे को शक्ति देने के लिए भारत में संयुक्त रूप से जेट इंजन का उत्पादन करने के लिए "ऐतिहासिक" समझौते की सराहना की. पीएम ने गुरुवार को अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित किया. इसके साथ ही वह दो बार संबोधित करने वाले पहले भारतीय नेता बन गए हैं. अमेरिकी कांग्रेस की संयुक्त बैठक में उनका पहला संबोधन 2016 में हुआ था.
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने आतंकवाद के प्रायोजक देशों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सहित बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार पर भी ज़ोर दिया और अमेरिका के साथ भारत के संबंधों के बारे में खुलकर बात की.
कमला हैरिस और ब्लिंकन ने लंच की मेजबानी की
शुक्रवार को अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के साथ विदेश विभाग में भारतीय नेता के लिए राजकीय लंच की मेजबानी की. मोदी ने व्हाइट हाउस में अमेरिका और भारत के शीर्ष सीईओ से भी मुलाकात की. इस दौरान कमला हैरिस ने भारत को याद किया तो वहीं पीएम मोदी ने कमला हैरिस और ब्लिंकन की खातिरदारी की खूब सराहना की.
क्या होती है राजकीय यात्रा?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राजकीय दौरे को हाई रैंकिंग वाला दौरा कहा जाता है. अमेरिका में इसका न्योता खुद अमेरिकी राष्ट्रपति की कलम से लिखा जाता है. जैसा कि इस बार राष्ट्रपति जो बाइडेन ने प्रधानमंत्री मोदी को स्टेट विजिट पर बुलाया है. भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन और उनकी पत्नी जिल बाइडेन के बुलावे पर अमेरिका गए हैं.
कितनी तरह के होते हैं दौरे?
अमेरिकी विदेश विभाग की गाइडलाइंस के मुताबिक, अमेरिका में पांच तरह के दौरे होते हैं. इन्हें 'राजकीय यात्रा', 'आधिकारिक यात्रा', 'आधिकारिक कार्य यात्रा', 'कार्य यात्रा' और 'निजी यात्रा' में बांटा गया है.
1. राजकीय दौराः इसमें अमेरिका के राष्ट्रपति खुद किसी देश के प्रमुख यानी हेड ऑफ स्टेट को आमंत्रित करते हैं. स्टेट विजिट पर आने वाले नेता ब्लेयर हाउस में रुकते हैं. उनके लिए व्हाइट हाउस में स्टेट डिनर का आयोजन भी किया जाता है.
2. आधिकारिक यात्राः स्टेट विजिट के बाद आधिकारिक यात्रा दूसरी हाई रैंकिंग यात्रा है. इस यात्रा पर आने वाले मेहमान को 19 तोपों की सलामी दी जाती है. अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ उनकी बैठक भी होती है.
3. आधिकारिक कार्य यात्राः किसी देश के नेता या मुखिया को इस यात्रा पर बुलाया जाता है. अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ बैठक भी होती है. व्हाइट हाउस में लंच भी होता है. डिनर भी हो सकता है. आने और जाने पर कोई खास कार्यक्रम नहीं होता.
4. कार्य यात्राः इस यात्रा में व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ बैठक जरूर होती है. लेकिन किसी तरह का लंच या डिनर नहीं होता. गिफ्ट्स भी नहीं दिए जाते. और न ही राष्ट्रपति की पति या पत्नी इसमें शामिल होती हैं.
5. निजी यात्राः इसमें किसी देश के मुखिया, नेता, विदेश मंत्री, मंत्री या कोई भी सरकारी अफसर आ सकता है. इसके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति की अनुमति की जरूरत नहीं होती. निजी यात्रा कितने भी समय के लिए हो सकती है.