पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के चांसलर पद के लिए अपनी दावेदारी पेश की है. एक साल से ज़्यादा समय से जेल में बंद इमरान अक्टूबर में ऑक्सफोर्ड चुनाव में हिस्सा लेंगे. इमरान और पाकिस्तानी राजनीति के लिए उनके आवेदन का क्या मतलब है? क्या यह सिर्फ दुनिया भर का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश है या पाकिस्तान की शक्तिशाली सेना को इमरान की ओर से दिया जा रहा कुछ संकेत?
जेल में बंद तन्हां इमरान खान इन दिनों जेल की दीवारों को घूरने से कहीं कुछ ज़्यादा कर रहे हैं. उन्होंने ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के चांसलर बनने के लिए आवेदन किया है. एक साल से जेल में बंद इमरान खान का ऑक्सफ़ोर्ड के टॉप पोस्ट के लिए चुनाव लड़ने का आश्चर्यजनक कदम दुनिया का ध्यान आकर्षित करने का एक प्रयास हो सकता है. इधर उनकी पार्टी उनके जेल जाने के एक साल पूरा होने पर पाकिस्तान में रैलियां आयोजित कर रही है. क्या यह पाकिस्तान की शक्तिशाली सेना के लिए एक संकेत है कि इमरान खान ने पाकिस्तानी राजनीति से नाता तोड़ लिया है और क्रिकेट और राजनीति के बाद अब वे अपने तीसरे करियर में दिलचस्पी रखते हैं.
इमरान के सलाहकार सैयद जुल्फी बुखारी ने बताया है कि उन्होंने अक्टूबर में होने वाले चुनाव में भाग लेने के लिए आवेदन दिया है. उन्होंने ये आवेदन ऐसे समय में किया है जब चांसलर पद के लिए चुनाव और नामांकन ऑनलाइन हो गए हैं.
बता दें कि पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री अगर सफल रहते हैं तो वे पूर्व कंजर्वेटिव मंत्री क्रिस पैटन की जगह लेंगे. पैटन, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के चांसलर हैं, जिन्होंने फरवरी में घोषणा की थी कि वह अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं.
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पाकिस्तान की राजनीति में इमरान का सफर "नया पाकिस्तान" के वादे से शुरू हुआ. अब वे जेल में जिंदगी गुजार रहे हैं और उन पर कई आरोप लगे हैं. हालांकि उनके समर्थकों का कहना है कि ये सब एक राजनीतिक साजिश का हिस्सा है.
इमरान खान: ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के चांसलर!
इमरान के सलाहकार बुखारी ने न्यूज एजेंसी एएफपी को बताया है कि चांसलर का पद औपचारिक होता है, लेकिन ये अत्यंत प्रतिष्ठा और महत्व वाला है और इमरान खान ऑक्सफोर्ड से निकलने वाले बड़े और लोकप्रिय नामों में से एक हैं, उन्हें चांसलर के रूप में देखना शानदार होगा.
लेकिन इस प्रतिष्ठित ब्रिटिश विश्वविद्यालय में जाना इमरान खान के लिए पाकिस्तान की राजनीति से दूरी भी साबित हो सकती है.
अगर इमरान खान चांसलर बनते हैं तो क्या वे पाकिस्तान की राजनीति को अलविदा कह देंगे? क्या ये कदम पाकिस्तान की राजनीति से उनका सेफ एग्जिट प्लान साबित होगा? बता दें कि इमरान इस वक्त पाकिस्तान में कई गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं, और मौजूदा परिस्थिति में इन मामलों से बरी होने के कम ही आसार दिख रहे हैं. ऐसे में अगर इमरान चाहें तो पाकिस्तान की सरकार से डील करके सेफ एग्जिट प्लान के तहत ऑक्सफोर्ड जैसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी के चांसलर बन सकते हैं. हालांकि इसकी पहली ही शर्त है कि वे चांसलर पद का चुनाव जीतें.
इमरान ने चांसलर पद के लिए अप्लाई करके पाकिस्तान की सेना को संकेत दिया है कि वे उस दौर से आगे निकलना चाहते हैं जब बतौर पीएम उनकी पाकिस्तान आर्मी से बुरी तरह से ठन गई थी. फिर पाकिस्तान के दो पावर केंद्रों के बीच हालात इतने बिगड़े कि पाक आर्मी इमरान खान के पूरी तरह खिलाफ हो गई.
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गौरतलब है कि इमरान खान जब क्रिकेट के सितारे थे तब उनकी जीवनशैली प्लेबॉय जैसी थी और वे नियमित रूप से ब्रिटेन की गॉसिप पत्रिकाओं का टॉपिक बनते थे.
बाद में उन्होंने सामाजिक कार्यों और राजनीति की ओर रुख किया और 2018 से 2022 तक वे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे. लेकिन सेना से टकराव, विपक्ष का उभार के बाद उन्हें जेल जाना पड़ा. उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ को पाकिस्तान की मौजूदा सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया है. और वे पिछले एक वर्ष से जेल में हैं. इमरान खान ने अपने खिलाफ सारे आरोपों को साजिश करार दिया है.
बता दें कि चांसलर का पद इमरान के लिए नया नहीं है. इमरान 2005 से 2014 तक आठ साल तक ब्रैडफोर्ड विश्वविद्यालय के चांसलर रह चुके हैं.
क्या इमरान खान ब्रिटेन में सफल हो पाएंगे?
इमरान खान ऑक्सफोर्ड से स्नातक हैं, जहां उन्होंने 1970 के दशक में ऑक्सफोर्ड के केबल कॉलेज (Keble College) में राजनीति, दर्शन और अर्थशास्त्र का अध्ययन किया था. बता दें कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएट और उसमें भी नेता बन चुके पूर्व छात्रों की चांसलर पद पर चुनाव लड़ने का मौका दिया जाता है. इमरान इस अहर्ता को पूरी करते हैं.
इमरान के सलाहकार बुखारी ने कहा, "अगर वह चांसलर बनते हैं, तो वह एशियाई मूल के पहले व्यक्ति होंगे. यह सिर्फ पाकिस्तान के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया और बाकी दुनिया के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी."
चांसलर पद के लिए मतदान 28 अक्टूबर को होगा. लेकिन इसमें सिर्फ ऑक्सफोर्ड स्नातक और यूनिवर्सिटी के सदस्य ही मतदान कर सकेंगे.
चांसलर पद के लिए इमरान का मुकाबला किससे?
जहां तक उनकी जीत की संभावनाओं का सवाल है तो इस चुनाव में उनके प्रतिद्वंद् ताकतवर है. उनका मुकाबला होने वाला है ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और बोरिस जॉनसन से. इमरान खान के लिए यह आसान नहीं होने वाला है. यह देखना दिलचस्प होगा कि अगर वे जीत जाते हैं तो क्या होता है. क्या यह उनके लिए पाकिस्तान की उथल-पुथल भरी राजनीति से बाहर निकलने का रास्ता होगा, और क्या वे अपने करोड़ों समर्थकों को छोड़कर अपने करियर के नए विकल्प को चुनना पसंद करेंगे?