भारत-चीन सीमा पर शांति बनाए रखने और संबंधों में स्थिरता के लिए कदम उठाने पर सहमत हो गए हैं. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई बातचीत में 6 अहम मुद्दों पर सहमति बनी. जिनमें सीमाओं पर शांति बनाए रखने, कैलाश मानसरोवर यात्रा और संबंधों के स्वस्थ एवं स्थिर विकास को बढ़ावा देने के लिए आगे भी कदम उठाना प्रमुखता से शामिल हैं.
चीन के विदेश मंत्रालय ने बताया कि पांच वर्षों के अंतराल के बाद हुई पहली बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने सीमा मुद्दों पर दोनों देशों के बीच निकले समाधान का सकारात्मक मूल्यांकन किया तथा दोहराया कि कार्यान्वयन कार्य जारी रहना चाहिए. दोनों पदाधिकारियों का मानना था कि सीमा मुद्दे को द्विपक्षीय संबंधों की पूरी स्थिति को देखते हुए उचित तरीके से संभाला जाना चाहिए, ताकि संबंधों के विकास पर इसका असर न पड़े.
दोनों देशों ने सकारात्मक कदम उठाने पर दिया जोर
दोनों पक्षों ने 2005 में सीमा मुद्दे के समाधान के लिए दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों द्वारा सहमत राजनीतिक दिशानिर्देशों के अनुसार सीमा मुद्दे का निष्पक्ष, उचित और स्वीकार्य समाधान तलाशने की बात दोहराई. साथ ही इस प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए सकारात्मक कदम उठाने की अपनी प्रतिबद्धता पर जोर दिया.
चीन की ओर से एक बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने सीमा की स्थिति का आकलन किया और सीमा क्षेत्र में प्रबंधन और नियंत्रण नियमों को और अधिक मजबूत करने पर सहमति जताई. इसमें विश्वास बहाली के उपायों को मजबूत करने तथा सीमा पर स्थायी शांति और स्थिरता हासिल करने पर भी सहमति बनी.
दोनों देश इन मुद्दों पर हुए सहमत
चीन की ओर से कहा गया कि दोनों देश सीमा पार आदान-प्रदान और सहयोग को मजबूत करने तथा तिब्बत, चीन में भारतीय तीर्थयात्रियों की यात्रा फिर से शुरू करने, सीमा पार नदी सहयोग और नाथूला सीमा व्यापार को बढ़ावा देने पर सहमत हुए. चीन के विदेश मंत्रालय के बयान के मुताबिक दोनों पक्षों ने विशेष प्रतिनिधियों के तंत्र को और मजबूत करने, कूटनीतिक और सैन्य बातचीत समन्वय और सहयोग को बढ़ाने की बात दोहराई और इसपर सहमत हुए. इसके अलावा, दोनों पक्षों ने साझा चिंता वाले द्विपक्षीय, अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर व्यापक और गहन विचार किए.
चीन की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, पिछले 70 वर्षों में चीन-भारत संबंधों के उतार-चढ़ाव पर नजर डालें तो दोनों पक्षों द्वारा कायम रखे गए सबसे मूल्यवान अनुभव द्विपक्षीय संबंधों पर दोनों देशों के नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन का पालन करना, एक-दूसरे के बारे में सही समझ स्थापित करना और बातचीत के माध्यम से मतभेदों को ठीक से संभालना है.
वांग ने जोर देकर कहा कि विशेष प्रतिनिधि बैठक दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी आम सहमति को लागू करने के लिए समय पर किया गया प्रभावशाली उपाय है. 'यह कड़ी मेहनत से हासिल किया गया है और यह संजोकर रखने लायक है.'
विज्ञप्ति में कहा गया कि दोनों पक्षों को द्विपक्षीय संबंधों में सीमा मुद्दे को ‘उचित स्थान’ पर रखना चाहिए, सीमावर्ती क्षेत्रों में संयुक्त रूप से शांति बनाए रखना चाहिए और चीन-भारत संबंधों को यथाशीघ्र स्वस्थ और स्थिर विकास के रास्ते पर लौटने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए. डोभाल ने वार्ता के बाद चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से मुलाकात की.