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यूरोपीय यूनियन की सख्ती पर भारत ने जताई चिंता, उठाएगा ये कदम!

यूरोपीय यूनियन और भारत के बीच ट्रेड को लेकर जारी विवाद थम नहीं रहा है. ईयू ने पिछले महीने ही एक प्रस्ताव की मंजूरी दी है, जिसके तहत अगर भारत यूरोपीय समूह में शामिल देशों को स्टील या सीमेंट जैसे उच्च कार्बन वाले सामान का निर्यात करता है, तो उसे टैक्स देना होगा. केंद्र की मोदी सरकार ने इस पर चिंता जाहिर की है.

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो- रॉयटर्स)
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो- रॉयटर्स)

पर्यावरण संरक्षण के नाम पर यूरोपीय यूनियन की ओर से कार्बन टैक्स लगाए जाने की घोषणा पर भारत ने चिंता जाहिर की है. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र की मोदी सरकार यूरोपीय यूनियन के एकतरफा फैसले के खिलाफ खिलाफ विश्व व्यापार संगठन (WTO) में शिकायत दर्ज कराने की योजना बना रही है. 

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पिछले महीने ही यूरोपीय यूनियन ने कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म की (CBAM) पहल के तहत जनवरी 2026 से ज्यादा कार्बन उत्सर्जित करने वाले सामानों के आयात पर टैक्स लगाने की योजना को मंजूरी दी है. ईयू का यह मैकेनिज्म दुनिया में अपनी तरह का पहला कार्बन टैक्स मैकेनिज्म है. CBAM के तहत अगर कोई भी देश ईयू के 27 सदस्य देशों में से किसी भी देश को ज्यादा कार्बन उत्सर्जन वाले सामान का निर्यात करता है, तो उससे कार्बन टैक्स वसूला जाएगा. यह टैक्स 20 से 25 प्रतिशत है. 

ईयू के इस फैसले का भारत पर कितना असर?

ईयू का यह प्रस्ताव भारत के लिए इसलिए चिंताजनक है क्योंकि उच्च कार्बन वाली वस्तुओं में स्टील, सीमेंट, एल्यूमीनियम, उर्वरक, बिजली और हाइड्रोजन से संबंधित प्रोडक्ट शामिल हैं. जबकि भारत इन्हीं उत्पादों का सबसे ज्यादा निर्यात करता है. इस मैकेनिज्म के तहत ग्रीनहाउस गैसों के जीरो उत्सर्जन लक्ष्य को 2050 तक पूरा करना है. जो भारत के लक्षित वर्ष 2070 से पहले है.

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मामले से जुड़े एक उच्च अधिकारी का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण के नाम पर यूरोपीय यूनियन CBAM के माध्यम से हमारे व्यापार में बाधा डाल रहा है, जो न केवल भारतीय निर्यात को बल्कि कई अन्य विकासशील देशों को भी प्रभावित करेगा. अधिकारी ने यह भी कहा कि सरकार ईयू के इस फैसले के खिलाफ डब्ल्यूटीओ में शिकायत दर्ज कराने की योजना बना रही है. इस शिकायत में सरकार भारतीय निर्यातकों, खासकर छोटी कंपनियों के लिए राहत की मांग करेगी. 

वहीं, एक अन्य अधिकारी ने कहा कि ईयू के इस कार्बन टैक्स मैकेनिज्म को भारत भेदभावपूर्ण और व्यापार में रुकावट के तौर पर देखता है. WTO में भारत इस मैकेनिज्म की वैधता पर भी सवाल उठाएगा क्योंकि भारत पहले से ही संयुक्त राष्ट्र जलवायु समझौते में दिए गए प्रोटोकॉल का पालन कर रहा है. 

फेडेरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट के डायरेक्टर जनरल अजय सहाय के मुताबिक, वर्तमान में भारत लगभग 8 अरब डॉलर का स्टील, लौह अयस्क और एल्यूमीनियम यूरोपियन यूनियन को निर्यात करता है. 

मैकेनिज्म का उद्देश्य व्यापार को बढ़ावा देना होता हैः वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल

मंगलवार को ब्रसेल्स में आयोजित इंडिया-ईयू ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी की बैठक में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि CBAM मैकेनिज्म को यूरोपीय यूनियन ने प्रस्तावित किया है. हम इस पर विचार कर रहे हैं. मैं यह मानता हूं कि व्यापार से जुड़े किसी भी मैकेनिज्म का उद्देश्य व्यापार में रुकावट पैदा नहीं करना होता है बल्कि व्यापार को आगे बढ़ाना होता है. इसका हल निकालने के लिए हमारे पास काफी समय है. हम इसका हल निकालने के लिए मिलकर काम करेंगे.

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सरकार ने बुलाई बैठक

प्रस्ताव की मंजूरी के बाद पिछले सप्ताह ही सरकार ने उद्योग से जुड़े अधिकारियों के साथ बैठक की. बैठक में शामिल अधिकारियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर इस बात की पुष्टि की है कि भारत सरकार इस मुद्दे को विश्व व्यापार संगठन में उठाएगी. हालांकि, वाणिज्य मंत्रालय और इस्पात से जुड़ी कंपनियों ने अभी तक इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं की है. 

भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच व्यापार उच्चतम स्तर पर

वित्तीय वर्ष 2022 में भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच व्यापार उच्चतम स्तर पर रहा. यूरोपियन कमीशन के वेबसाइट पर मौजूद आंकड़े के मुताबिक, 2022 में भारत और ईयू के बीच 120 अरब यूरो का रिकॉर्ड व्यापार हुआ है. जबकि 2021 में भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच सिर्फ 40 अरब यूरो का व्यापार हुआ था.

इसमें से 17 बिलियन यूरो का व्यापार डिजिटल प्रोडक्ट और सेवाओं में हुआ है. यूरोपीय यूनियन भारत का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है. जबकि भारत ईयू का दसवां सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है. 2022 में भारत ने कुल व्यापार का लगभग 11 प्रतिशत व्यापार यूरोपीय यूनियन के साथ किया है. वहीं, ईयू ने कुल व्यापार का लगभग 2 प्रतिशत व्यापार भारत के साथ किया है. 

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