अफगानिस्तान में फंसे भारतीयों को वतन वापस लाने के लिए केंद्र सरकार की कोशिशें तेज हो गई हैं. तालिबान के कब्जे के बाद बड़ी संख्या में अफगानिस्तान में रह रहे भारतीय वापस आना चाहते हैं और इसलिए काबुल एयरपोर्ट पहुंच रहे हैं. इन सबके बीच, भारत को रोजाना दो फ्लाइट्स को उड़ाने की इजाजत मिल गई है. यह जानकारी सरकार के शीर्ष सूत्र ने शनिवार को आजतक/इंडिया टुडे को दी.
भारत के लिए ये दो फ्लाइट्स रोजाना अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से उड़ान भरेंगी. इसके जरिए से जो लोग अपने देश वापस लौटना चाहते हैं, वे आ सकते हैं. अमेरिकी सेना ने भारत को रोज दो फ्लाइट्स उड़ाने की अनुमति दी है. मालूम हो कि अमेरिका बड़े स्तर पर काबुल एयरपोर्ट से अपने नागरिकों को वापस लाने में लगा हुआ है. इसके लिए, काबुल एयरपोर्ट पर पांच हजार से ज्यादा अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं.
वर्तमान समय में अफगानिस्तान से अमेरिका और नाटो की सेनाओं द्वारा रोजाना 25 फ्लाइट्स उड़ान भर रही हैं. अमेरिका का मुख्य फोकस अफगानिस्तान से अपने नागरिकों और अफगानिस्तान के लोगों, जोकि देश छोड़ना चाहते हैं, को बचाने पर है. सेना के विमान के जरिए से लोगों को काबुल एयरपोर्ट से निकाला जा रहा है.
काबुल पर 15 अगस्त को तालिबान द्वारा कब्जा जमाए जाने के समय कई देशों के नागरिक वहां फंस गए थे. इसमें से भारत के भी बड़ी संख्या में नागरिक हैं. कुछ लोगों को विमान के जरिए से पिछले दिनों देश लाया गया था, जिसके बाद अब भी कई नागरिक बचे हुए हैं. भारत दुशांबे, ताजिकिस्तान और कतर मार्ग से नागरिकों को निकाल रहा है. एयर इंडिया का एक विमान लगभग 90 यात्रियों के साथ जल्द ही भारत आ सकता है.
केंद्र सरकार अफगानिस्तान में तालिबान की हर हरकत पर नजर बनाए हुए है. भीड़भाड़ वाले काबुल एयरपोर्ट के परिसर में भारतीय नागरिकों के प्रवेश को सुचारू रूप से करने और उन्हें विमान में चढ़ने की अनुमति दिलवाने के लिए सरकार जमीन पर अधिकारियों के साथ काम कर रही है.
तालिबान को यूरोपीय यूनियन की मान्यता नहीं
वहीं, जब तालिबान की ओर चीन और पाकिस्तान ने नरम रुख अपना रखा है, तो इस बीच यूरोपीय यूनियन ने अपना नजरिया साफ कर दिया है. यूरोपीय यूनियन ने शनिवार को कहा है कि उसने अब तक तालिबान को मान्यता नहीं दी है. यूरोपीय यूनियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने शनिवार को कहा, ''न तो यूरोपीय यूनियन ने तालिबान को मान्यता दी है और न तो कोई राजनीति चर्चा कर रहा है.''
इससे पहले, ब्रिटेन ने शुक्रवार को कहा था कि यदि जरूरत पड़ती है तो तालिबान के साथ काम करेंगे. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा, ''अफगानिस्तान में कोई स्थायी समाधान निकले, इसके लिए हर स्तर पर कोशिशें जारी रहेंगी. जरूरत पड़ती है तो फिर तालिबान के साथ काम भी करेंगे.''