विश्व व्यापार संगठन (WTO) में सौर ऊर्जा नीतियों को लेकर अमेरिका पर भारत ने पलटवार किया है. मामले में भारत ने अमेरिका के कानूनी दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. साथ ही WTO में अपने सौर ऊर्जा उद्योग के पक्ष में नई दलील दी है. दरअसल, पिछले महीने अमेरिका ने मामले को लेकर भारत के खिलाफ नए सिरे से मुकदमेबाजी शुरू की थी. WTO में अमेरिका ने दलील दी थी कि भारत सौर ऊर्जा पर विश्व व्यापार संगठन के फैसले का पालन करने में विफल रहा है.
अमेरिका का कहना था कि मामले में भारत की नीतियां सोलर सेल्स और मोड्यूल्स के विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ हैं. इससे विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के साथ भेदभाव हो रहा है. सोमवार को WTO ने एक बायन जारी कर कहा कि भारत ने विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुसार अपनी नीतियों में बदलाव कर दिया है. भारत ने कहा कि मामले में अमेरिका का दावा पूरी तरह से निराधार है. भारत ने जोर देकर कहा कि मामले को लेकर अमेरिका की शिकायत वैध नहीं हैं.
इस मामले में अमेरिका WTO की सही कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया का पालन करने में विफल रहा है. मामले में उसने व्यापार प्रतिबंध के किसी खास स्तर को शामिल करने का लोप किया है. भारत ने कहा कि सौर ऊर्जा की नीतियों को लेकर अमेरिका का यह दावा गंभीर पूर्वाग्रह का नतीजा है. भारत ने कहा कि अगर मामले में कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरीके से पालन किया जाएगा, तो वह सही साबित होगा. लिहाजा 19 दिसंबर 2017 को अमेरिका की शिकायत को सिरे से खारिज करता है.
नवीनीकरण ऊर्जा एक ऐसा क्षेत्र बन गया है, जिसमें प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई है. दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं इस सेक्टर पर अपना प्रभुत्व कायम करने के लिए संघर्ष कर रही हैं. भारत ने साल 2011 में राष्ट्रीय सौर ऊर्जा कार्यक्रम की शुरुआत की थी. इसका मकसद बिना किसी प्रदूषण के एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश में ऊर्जा की कमी को दूर करना था.
अमेरिका ने साल 2013 में मामले में WTO में शिकायत की थी. उसका कहना था कि भारत में अमेरिका के सौर निर्यात में 90 प्रतिशत की गिरावट आई है. इसके बाद WTO में अमेरिका ने यह केस जीत लिया था. WTO के जजों ने कहा था कि भारत ने स्वदेशी सेल्स और मॉड्यूल्स इस्तेमाल कर ट्रेड रूल्स तोड़े हैं. अब मामले में भारत के कदम से न सिर्फ अमेरिका बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धाओं से भारतीय सौर ऊर्जा उद्योग को संरक्षण मिलेगा. पिछले हफ्ते WTO में भारत ने कहा कि वह घरेलू सौर ऊर्जा उद्योग की याचिका के बाद सोलर सेल्स, मोड्यूल्स और पैनल्स पर अस्थायी ट्रैफिक लगाने जा रहा है.