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शहबाज शरीफ की पीएम मोदी से अपील के बाद भारत ने पाकिस्तान को दिया न्योता, क्या आएगा जवाब

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने हाल ही में पीएम मोदी से बातचीत की अपील की थी. वहीं, बुधवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर की ओर से इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग के माध्यम से पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी को भारत आने का निमंत्रण भेजा है. यह बैठक मई के पहले सप्ताह में गोवा में होगी.

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भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो (फोटो- रॉयटर्स)
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो (फोटो- रॉयटर्स)

गंभीर आर्थिक संकट झेल रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने हाल ही में पीएम मोदी से बातचीत की अपील की थी. पाकिस्तान की तरफ से रिश्ते सुधारने की लगातार अपील के बीच बुधवार को भारत ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक में पाकिस्तान को भी शामिल होने के लिए निमंत्रण दिया है. यह बैठक मई के पहले सप्ताह में गोवा में होगी.

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विदेश मंत्री एस जयशंकर की ओर से इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग के माध्यम से पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी को एससीओ की बैठक के लिए भारत आने का निमंत्रण भेजा गया है. हालांकि, अभी पाकिस्तान की तरफ से ये पुष्टि नहीं की गई है कि विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो इस बैठक में हिस्सा लेंगे या नहीं.

पाकिस्तानी अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, एससीओ में चीन और रूस मौजूद हैं और इस फोरम की अहमियत को देखते हुए पाकिस्तान के इस बैठक से दूरी बनाने की संभावना कम है. 

भारत कर रहा बैठक की अध्यक्षता

मई में होने वाली शंघाई सहयोग संगठन की अध्यक्षता भारत कर रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, एससीओ बैठक की तय तारीखें 4 और 5 मई है. अगर पाकिस्तान यह न्योता स्वीकार करता है तो लगभग पिछले 12 वर्षों में पाकिस्तान के किसी शीर्ष नेता का पहला भारत दौरा होगा. इससे पहले अंतिम बार पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार जुलाई 2011 में भारत आईं थीं. 

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एससीओ सदस्य में भारत और पाकिस्तान के अलावा चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान भी है. इसी तरह का निमंत्रण मध्य एशियाई देशों के साथ चीन और रूस के विदेश मंत्रियों को भी भेजा गया है. लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंधों के स्तर को देखते हुए पाकिस्तान के विदेश मंत्री को निमंत्रण कई मायनों में अहम है.

आर्थिक संकट में घिरे पाकिस्तान से लगातार भारत से बातचीत शुरू करने की अपील की जा रही थीं. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक टीवी चैनल से बात करते हुए कहा था कि पाकिस्तान तीन युद्धों से सबक सीख चुका है और भारत के साथ शांति से रहना चाहता है. 

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पीएम मोदी से की थी अपील

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक टीवी को दिए इंटरव्यू में कहा था कि हम एक दूसरे के पड़ोसी देश हैं और दोनों को एक दूसरे के साथ ही रहना है. भारत के साथ हमारे तीन युद्ध हुए हैं और इसने लोगों के लिए और अधिक दुख, गरीबी और बेरोजगारी ही लाई है. हमने अपना सबक सीख लिया है और हम शांति से रहना चाहते हैं.

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा था, "यह हमारे ऊपर है कि हम शांति से रहें और तरक्की करें या एक-दूसरे से झगड़ कर अपना समय और संसाधन को बर्बाद करें. मैं पीएम मोदी को संदेश देना चाहता हूं कि हम गरीबी को कम करना चाहते हैं. हम अपने लोगों के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं और रोजगार देना चाहते हैं. हम बम और गोला-बारूद पर अपने संसाधनों को बर्बाद नहीं करना चाहते हैं. "

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भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते काफी खराब

पिछले आठ वर्षों में भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते काफी खराब हुए हैं. अगस्त 2015 में भारत ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री सरताज अजीज को भारत आने का निमंत्रण दिया था. भारत के तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अजीज को भारत में हुर्रियत नेताओं से मिलने से परहेज करने के लिए कहा था जिसके बाद पाकिस्तान ने दौरा रद्द कर दिया था.

वहीं, पाकिस्तान का दौरा करने वाली अंतिम भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज थीं. दिसंबर 2015 में इस्लामाबाद में हार्ट ऑफ एशिया (Heart of Asia) सम्मेलन में शामिल होने के लिए स्वराज पाकिस्तान गईं थीं. उसके बाद पठानकोट (जनवरी 2016), उरी (सितंबर 2016) और पुलवामा (फरवरी 2019) में हुए आतंकवादी हमलों से दोनों देशों के बीच रिश्ते और खराब हो गए. 

अगस्त 2019 में भारत ने जम्मू कश्मीर राज्य से आर्टिकल 370 को निरस्त करने और राज्य का विभाजन जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के रूप में दो केंद्र शासित क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव पास किया गया था. इसके बाद पाकिस्तान ने भारत से राजनयिक संबंध को खत्म करते हुए बस और ट्रेन सेवाओं पर रोक लगा दी.

पाकिस्तान गंभीर आर्थिक संकट में 

पाकिस्तान गंभीर आर्थिक तंगी और महंगाई से जूझ रहा है. विदेशी मुद्रा भंडार नौ वर्ष के निचले स्तर पर है और मौजूदा विदेशी मुद्रा भंडार एक महीने के राशने के लिए भी पर्याप्त नहीं है. देश की बिगड़ती अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा संकट ने पाकिस्तान को विदेशी संपत्ति बेचने पर मजबूर कर दिया है. 

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