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Corona in China: चीन में इलाज को तरस रहे लोग, भारत भेजेगा दवाइयां

दुनिया की सबसे बड़ी दवाई निर्माता कंपनी भारत के सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) के चेयरपर्सन का कहना है कि वह चीन की मदद करने को तैयार हैं. चीन में ओमिक्रॉन के नए सब-वेरिएंट BF.7 के मामले धड़ाधड़ सामने आ रहे हैं, जिससे अस्पतालों में जगह नहीं है. कब्रिस्तान में भी शवों को दफ्नाने के लिए चार से पांच दिन की वेटिंग चल रही है.

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सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

चीन में जिस रफ्तार से कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, उससे पूरी दुनिया में खलबली मच गई है. कई देशों में कोरोना के मामले देखने को मिल रहे हैं. ऐसे में भारत मदद के लिए आगे आया है, उसने कहा है कि वह बुखार की दवाइयां चीन एक्सपोर्ट करने के लिए तैयार है. 

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दुनिया की सबसे बड़ी दवाई निर्माता कंपनी भारत के सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) के चेयरपर्सन का कहना है कि वह चीन की मदद करने को तैयार हैं. चीन में ओमिक्रॉन के नए सब-वेरिएंट BF.7 के मामले धड़ाधड़ सामने आ रहे हैं, जिससे अस्पतालों में जगह नहीं है. कब्रिस्तान में भी शवों को दफ्नाने के लिए चार से पांच दिन की वेटिंग चल रही है.

भारत के विदेश मंत्रालय का कहना है कि दुनिया में जेनेरिक दवाइयों की सबसे बड़ी दवा कंपनियों में से एक चीन की मदद करने को तैयार है. 

बता दें कि चीन में जीरो कोविड पॉलिसी के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों के बाद चीन ने यह विवादित पॉलिसी हटा दी थी. 

पॉलिसी के हटते ही चीन में कोरोना के मामलों की झड़ी लग गई. इससे चीन में बुखार की दवाइयों और कोरोना टेस्ट किसट की भारी मांग देखने को मिल रही है. चीन में लोगों ने भारी स्टॉक में दवाइयों को खरीदना शुरू कर दिया है, जिसे देखते हुए दवाइयों का स्टॉक खत्म हो रहा है, ऐसे में चीन में दवा दुकानों ने दवाइयां खरीदने को लेकर लिमिट तय कर दी है. साथ में दवा कंपनियों को दवाइयों का उत्पादन बढ़ाने को भी कहा गया है. 

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चीन में दवाओं की मांग बढ़ी

चीन में ibuprofen और paracetamol जैसी बुखार की दवाओं की भारी कमी देखने को मिल रही है लेकिन इनकी मांग बहुत अधिक है.

फार्मास्युटिकल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरपर्सन साहिल मुंजल का कहना है कि ibuprofen और paracetamol की मांग बढ़ी है. फिलहाल चीन में इसकी भारी कमी है. इनकी भारी मांग है. 

दवाइयां खरीदने की लिमिट तय

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में दवाइयों की किल्लत को देखते हुए स्थानीय लोगों के दवा खरीदने की लिमिट तय कर दी गई है. लोगों को एक ही तरह की दवा खरीदने को कहा गया है. उदाहरण के लिए वे या तो ibuprofen की टैबलेट ले सकते हैं या फिर उसे लिक्विड फॉर्म में खरीद सकते हैं. 

चीन में दवाओं की किल्लत को देखते हुए जर्मनी पहले ही चीन को BioNTech की पहली खेप भेज चुका है. यह पहली विदेशी कोरोना वैक्सीन है, जिसे चीन भेजा गया है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बाग्ची ने कहा कि हम चीन में कोरोना की स्थिति पर नजर रखे हुए हैं. हमने हमेशा संकट में घिरे अन्य देशों की मदद की है.

चीन की इस स्थिति पर वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन का कहना है कि चीन में जिस तरह से जीरो कोविड पॉलिसी हटने के बाद कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, वह चिंताजनक है. चीन में वैक्सीनेशन दर कम होने की वजह से बड़ी संख्या में लोगों इसकी चपेट में आ रहे हैं.

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बता दें कि चीन में कोरोना काल की शुरुआत से ही जीरो कोविड पॉलिसी लागू थी. लेकिन भारी विरोध के चलते कुछ हफ्तों पहले ही इसे हटा दिया गया. इसके चलते तेजी से कोरोना केस बढ़ने लगे. इसके बाद से लोगों ने घर पर दवाओं की जमाखोरी शुरू दी, इसके चलते संक्रमित लोगों को इबुप्रोफेन और एसिटामिनोफेन जैसी सामान्य दवाएं भी नहीं मिल पा रही हैं. 

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