हिंद महासागर में धाक जमाने के लिए चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है. पहले समुद्री सर्वे में शामिल चीन का जहाज शि यान 6 हाल ही में श्रीलंका के तट पर सर्वे पूरा करने के बाद 2 दिसंबर को सिंगापुर पहुंचा है. इसी बीच चीन ने श्रीलंका और मालदीव से एक और समुद्री सर्वे करने के लिए अपने जहाज को वहां के बंदरगाहों पर डॉक करने की अनुमति मांगी है. जबकि भारत पहले ही श्रीलंका और मालदीव के सामने इस पर आपत्ति जता चुका है.
रिपोर्ट के मुताबिक, 5 जनवरी 2024 से मई 2024 के अंत तक दक्षिण हिंद महासागर में सर्वे करने के लिए चीन ने श्रीलंका और मालदीव से वहां की बंदरगाहों पर अपने जहाज डॉक करने और गहरे पानी में सर्वे करने की अनुमित मांगी है. समुद्र में चीन की इस हरकत का भारत शुरुआत से ही विरोध करता रहा है. 2 दिसंबर को ही चीनी सर्वे जहाज शि यान 6 ने अपना पहला सर्वे पूरा किया है.
आधुनिक तकनीकों से लैस है चीन का यह जहाज
अगामी सर्वे के लिए चीन जियांग यांग होंग 03 (Xiang Yang Hong 03) जहाज का इस्तेमाल करेगा, जो फिलहाल दक्षिण चीन सागर में जियामेन तट से दूर मौजूद है. श्रीलंका और मालदीव से अनुमति मिलने के बाद यह जहाज मलक्का के रास्ते श्रीलंका और मालदीव के तटों तक पहुंचेगा. भारत पहले भी श्रीलंका और मालदीव के सामने इस पर आपत्ति जता चुका है. भारत ने श्रीलंका और मालदीव से चीनी जहाज को भविष्य के सैन्य अभियानों के लिए हिंद महासागर में अनुमति नहीं देने के लिए कहा है.
2016 में बने जियांग यांग होंग-03 नवीनतम सर्वेक्षण और निगरानी तकनीकों से लैस जहाज है. इस जहाज का वजन 4813 टन बताया जा रहा है. पिछली बार भारत के विरोध के बावजूद श्रालंका ने चीनी जहाज शि यान 6 को सर्वे की अनुमति दी थी. 25 अक्टूबर 2023 को कोलंबो बंदरगाह पर डॉक करने से पहले चीनी जहाज शि यान 6 को चेन्नई से 500 समुद्री मील दूर भी देखा गया था. श्रीलंकाई EEZ और दक्षिण हिंद महासागर में सर्वे करने के बाद 20 नवंबर को यह पोत मलक्का जलडमरूमध्य से बाहर निकला था.
भारत क्यों है चिंतित?
पहले श्रीलंका और अब प्रो चाइना कंट्री मालदीव द्वारा चीनी पोत को अपने बंदरगाह पर डॉक करने की अनुमति देने से भारत इसलिए भी चिंतित है क्योंकि चीन का यह जहाज बैलिस्टिक मिसाइल ट्रैकर्स और रिसर्च सर्विलांस तकनीकों से लैस है.
भारत इस बात को लेकर भी चिंतित है कि चीन समुद्र में रिसर्च के नाम पर भारत की जासूसी करने के लिए इन जहाजों का इस्तेमाल कर रहा है. जुलाई 2023 में भारत दौरे पर आए श्रीलंकाई राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के सामने भी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे को उठाया था. भारत ने श्रालंका से कहा था कि श्रीलंका को भारत की रणनीतिक चिंताओं को सम्मान करना चाहिए.
कूटनीतिक और राजनीतिक शब्दावली में हिन्द महासागर भारत का बैकयार्ड कहलाता है. इससे भारत का मजबूत राजनीतिक, आर्थिक और यहां तक कि सामाजिक रिश्ता है. लेकिन चीन कई बार हिंद महासागर में अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया की नौसेनाएं की मुक्त आवाजाही पर सवाल उठाता रहा है.